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कोरोना ने सौ साल पहले फैले प्लेग की यादें ताजा कर दीं
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कोरोना ने सौ साल पहले फैले प्लेग की यादें ताजा कर दीं
महराजगंज। आज तो बहुत सुविधाएं हैं। अस्पताल, दवाएं और डॉक्टर भी पर्याप्त हैं, लेकिन सौ साल पहले जब प्लेग फैला था तब कुछ नहीं था। तब बहुत से लोगों ने जान गंवाई थी। शव कंधे पर नहीं लोग बैलगाड़ी से ले जाकर नाले में फेंककर चले आते थे। उम्र के अब इस पड़ाव पर कोरोना वायरस के संक्रमण के बारे में सुनकर एक बार फिर डर लगने लगा है, लेकिन सरकार ने जैसी व्यवस्था की है और लोग जिस प्रकार लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं, उससे मुझे भरोसा है कि हम इस भयानक बीमारी से पार पा लेंगे।
यह कहना है निचलौल तहसील क्षेत्र के टिकुलहिया गांव के 107 वर्षीय गाजर विश्वकर्मा का। 1913 में जन्मे गाजर ने भूली-बिसरी यादें और अपने बड़े-बुजुर्गों से सुनी चर्चा के आधार पर बताया कि आज से सौ बरस पहले जिले में ऐसे ही एक वायरस का कहर टूटा था। हर तरफ लोग परेशान थे। अब जबकि कोरोना वायरस ने दस्तक दी है तो एक बार फिर जेहन में प्लेग की याद ताजा हो गई। प्लेग का एक नहीं दो बार अटैक हुआ था और तमाम लोगों ने जान गंवाई थी। बकौल गाजर, 1920 में प्लेग की चपेट में आने से बहुत से लोगों की मौत हो गई थी। वह ऐसा दौर था तब अस्पताल कम थे, उपचार न के बराबर। एक डॉक्टर गांव में कैंप करते थे। मेरी मां और बहन भी बीमार हुई थी, लेकिन गांव के डॉक्टर के इलाज से दोनों ठीक हो गईं। गाजर ने बताया कि महज सात साल की उम्र में उस महामारी को देख रूह कांप गई थी। अब उम्र के इस पड़ाव में कोरोना वायरस के संक्रमण के बारे में सुनकर फिर डर लगने लगा है। कोरोना से जंग लड़ने के लिए लोग घरों में हैं। गांव-गांव, शहर-शहर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। परदेशियों को क्वारंटीन किया जा रहा है। अगर, यही व्यवस्था तब रही होती तो तमाम लोग काल के गाल में न समाए होते। गाजर विश्वकर्मा ने बताया कि देश कोरोना से जंग जीतेगा। इसके लिए लोगों को शत-प्रतिशत लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करना होगा। जब लोगों का सहयोग प्रशासन के साथ रहेगा तो हम कोरोना से जंग जीत जाएंगे। उन्होंने संदेश दिया कि संकट की इस घड़ी में लोगों को घर में ही रहना होगा।
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महराजगंज। आज तो बहुत सुविधाएं हैं। अस्पताल, दवाएं और डॉक्टर भी पर्याप्त हैं, लेकिन सौ साल पहले जब प्लेग फैला था तब कुछ नहीं था। तब बहुत से लोगों ने जान गंवाई थी। शव कंधे पर नहीं लोग बैलगाड़ी से ले जाकर नाले में फेंककर चले आते थे। उम्र के अब इस पड़ाव पर कोरोना वायरस के संक्रमण के बारे में सुनकर एक बार फिर डर लगने लगा है, लेकिन सरकार ने जैसी व्यवस्था की है और लोग जिस प्रकार लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं, उससे मुझे भरोसा है कि हम इस भयानक बीमारी से पार पा लेंगे।
यह कहना है निचलौल तहसील क्षेत्र के टिकुलहिया गांव के 107 वर्षीय गाजर विश्वकर्मा का। 1913 में जन्मे गाजर ने भूली-बिसरी यादें और अपने बड़े-बुजुर्गों से सुनी चर्चा के आधार पर बताया कि आज से सौ बरस पहले जिले में ऐसे ही एक वायरस का कहर टूटा था। हर तरफ लोग परेशान थे। अब जबकि कोरोना वायरस ने दस्तक दी है तो एक बार फिर जेहन में प्लेग की याद ताजा हो गई। प्लेग का एक नहीं दो बार अटैक हुआ था और तमाम लोगों ने जान गंवाई थी। बकौल गाजर, 1920 में प्लेग की चपेट में आने से बहुत से लोगों की मौत हो गई थी। वह ऐसा दौर था तब अस्पताल कम थे, उपचार न के बराबर। एक डॉक्टर गांव में कैंप करते थे। मेरी मां और बहन भी बीमार हुई थी, लेकिन गांव के डॉक्टर के इलाज से दोनों ठीक हो गईं। गाजर ने बताया कि महज सात साल की उम्र में उस महामारी को देख रूह कांप गई थी। अब उम्र के इस पड़ाव में कोरोना वायरस के संक्रमण के बारे में सुनकर फिर डर लगने लगा है। कोरोना से जंग लड़ने के लिए लोग घरों में हैं। गांव-गांव, शहर-शहर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। परदेशियों को क्वारंटीन किया जा रहा है। अगर, यही व्यवस्था तब रही होती तो तमाम लोग काल के गाल में न समाए होते। गाजर विश्वकर्मा ने बताया कि देश कोरोना से जंग जीतेगा। इसके लिए लोगों को शत-प्रतिशत लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करना होगा। जब लोगों का सहयोग प्रशासन के साथ रहेगा तो हम कोरोना से जंग जीत जाएंगे। उन्होंने संदेश दिया कि संकट की इस घड़ी में लोगों को घर में ही रहना होगा।
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