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Maharajganj News: कोल्ड डायरिया और निमोनिया की चपेट में आ रहे बच्चे
Sat, 30 Dec 2023 05:02 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 30 Dec 2023 05:02 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। ठंड बढ़ गई है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। बच्चे सूखी खांसी, कोल्ड डायरिया और निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। बीमारी से उबरने में बच्चाें को एक सप्ताह से अधिक का समय लग रहा है। सांस की नली में सूजन से बच्चे कराह रहे हैं और रातभर सो भी नहीं पा रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञों की ओपीडी में ऐसे बच्चों की भरमार है। जिला अस्पताल के चिकित्सक अभिभावकाें को बच्चों की देखरेख की सलाह दे रहे हैं। हर रोज जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में 300 बच्चे पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेष डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि 15 से लेकर 20 मरीज कोल्ड डायरिया, बलगम की खांसी के आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों की छाती में संक्रमण से उन्हें सूखी खांसी आ रही है। रात में खांसी ज्यादा होती है। इससे बच्चे सो नहीं पा रहे हैं, जो कुछ खाते हैं खांसी के कारण उल्टी कर देते हैं। पसलियां चलने से बच्चों को दर्द भी हो रहा है। सांस लेने में परेशानी वाले बच्चों को दिन में दो से तीन बार नेबुलाइजर कराना पड़ रहा है। भांप भी दिलाई जा रही है। इसके अलावा लगातार दवाएं चलानी पड़ रही हैं।
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महराजगंज। ठंड बढ़ गई है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। बच्चे सूखी खांसी, कोल्ड डायरिया और निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। बीमारी से उबरने में बच्चाें को एक सप्ताह से अधिक का समय लग रहा है। सांस की नली में सूजन से बच्चे कराह रहे हैं और रातभर सो भी नहीं पा रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञों की ओपीडी में ऐसे बच्चों की भरमार है। जिला अस्पताल के चिकित्सक अभिभावकाें को बच्चों की देखरेख की सलाह दे रहे हैं। हर रोज जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में 300 बच्चे पहुंच रहे हैं।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विशेष डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि 15 से लेकर 20 मरीज कोल्ड डायरिया, बलगम की खांसी के आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों की छाती में संक्रमण से उन्हें सूखी खांसी आ रही है। रात में खांसी ज्यादा होती है। इससे बच्चे सो नहीं पा रहे हैं, जो कुछ खाते हैं खांसी के कारण उल्टी कर देते हैं। पसलियां चलने से बच्चों को दर्द भी हो रहा है। सांस लेने में परेशानी वाले बच्चों को दिन में दो से तीन बार नेबुलाइजर कराना पड़ रहा है। भांप भी दिलाई जा रही है। इसके अलावा लगातार दवाएं चलानी पड़ रही हैं।
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