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मासूमों के लिए संजीवनी बना नवजात शिशु देखभाल इकाई
Mon, 14 Jan 2019 11:23 PM IST
राकेश पांडेय
ब्यूरो/अमर उजाला महराजगंज
ब्यूरो/अमर उजाला महराजगंज
Published by: राकेश पांडेय
Updated Mon, 14 Jan 2019 11:23 PM IST
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जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाइ में वच्चों की देखरेख करती नर्स।
- फोटो : अमर उजाला
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महराजगंज। जिला अस्पताल में नवजात शिशु देखभाल इकाई मासूमों के लिए संजीवनी बना है। अप्रैल से दिसंबर माह तक इस वार्ड में 2223 बच्चे भर्ती हुए। जिसमें 1814 बच्चे स्वस्थ होकर घर गए। जबकि 252 बच्चे जिला अस्पताल से रेफर हुए। जन्म होने के बाद बीमार बच्चों के इलाज के लिए नवजात शिशु देखभाल इकाई में इलाज की बेहतर व्यवस्था है। डॉक्टरों की टीम के साथ स्टाफ नर्स की निगरानी में बच्चों का इलाज होता है।
नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में 20 अत्याधुनिक सुसज्जित बेड हैं। इकाई पर 24 घंटे सेवा की सुविधा उपलब्ध है। प्रतिमाह इस व्यवस्था के बीच भी 75 से 100 की संख्या में बच्चे स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इकाई पूरी तरह वातानुकूलित भवन में संचालित है। 13 स्टाफ नर्स और 7 बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नवजात शिशु देखभाल इकाई में है। इस वार्ड में शिफ्टवार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। अप्रैल से दिसंबर तक 2223 बच्चे भर्ती हुए हैं। 1814 स्वस्थ होकर घर गए। 252 बच्चों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। नौ माह में 70 बच्चों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। डॉक्टरों की ओर से बच्चों के बेहतर इलाज का प्रयास किया जाता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रंजन मिश्रा ने बताया कि एक माह तक शिशु को सबसे ज्यादा गंभीर बीमारी का खतरा रहता है। देखभाल में थोड़ी सी भी लापरवाही बच्चों पर भारी साबित हो सकती है। ऐसे में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने देश में तेजी से हो रहे शिशु मृत्यु दर को ध्यान में रखते हुए जिला चिकित्सालय में बच्चों की देखभाल के लिए इस वार्ड को बनाया गया है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर आरबी. राम ने बताया कि बच्चों के बेहतर इलाज की व्यवस्था जिला अस्पताल में है। डॉक्टरों की टीम नवजात शिशु देखभाल इकाई में शिफ्टवार ड्यूटी पर लगी रहती है। प्रयास यही रहता है कि अस्पताल में भर्ती सभी बच्चों का बेहतर इलाज हो। सितंबर 2018 में 12 बेड से बढ़ाकर 20 बेड कर दिया गया। इससे ज्यादा बच्चों को भर्ती करने में सहूलियत हो गई।
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नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में 20 अत्याधुनिक सुसज्जित बेड हैं। इकाई पर 24 घंटे सेवा की सुविधा उपलब्ध है। प्रतिमाह इस व्यवस्था के बीच भी 75 से 100 की संख्या में बच्चे स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इकाई पूरी तरह वातानुकूलित भवन में संचालित है। 13 स्टाफ नर्स और 7 बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नवजात शिशु देखभाल इकाई में है। इस वार्ड में शिफ्टवार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। अप्रैल से दिसंबर तक 2223 बच्चे भर्ती हुए हैं। 1814 स्वस्थ होकर घर गए। 252 बच्चों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। नौ माह में 70 बच्चों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। डॉक्टरों की ओर से बच्चों के बेहतर इलाज का प्रयास किया जाता है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रंजन मिश्रा ने बताया कि एक माह तक शिशु को सबसे ज्यादा गंभीर बीमारी का खतरा रहता है। देखभाल में थोड़ी सी भी लापरवाही बच्चों पर भारी साबित हो सकती है। ऐसे में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने देश में तेजी से हो रहे शिशु मृत्यु दर को ध्यान में रखते हुए जिला चिकित्सालय में बच्चों की देखभाल के लिए इस वार्ड को बनाया गया है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर आरबी. राम ने बताया कि बच्चों के बेहतर इलाज की व्यवस्था जिला अस्पताल में है। डॉक्टरों की टीम नवजात शिशु देखभाल इकाई में शिफ्टवार ड्यूटी पर लगी रहती है। प्रयास यही रहता है कि अस्पताल में भर्ती सभी बच्चों का बेहतर इलाज हो। सितंबर 2018 में 12 बेड से बढ़ाकर 20 बेड कर दिया गया। इससे ज्यादा बच्चों को भर्ती करने में सहूलियत हो गई।