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तापमान में उतार चढ़ाव से बढ़ी लोगों की परेशानी
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तापमान में उतार चढ़ाव से बढ़ी लोगों की परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। मौसम में उतार चढ़ाव का लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। एक पखवारे से न्यूनतम व अधिकतम तापमान में तेजी से उतार चढ़ाव हो रहा है। दिन में तेज धूप होने के बाद शाम होते ही गलन बढ़ जा रही है। गलन बढ़ने के कारण जिला प्रशासन ने स्कूलों का समय सुबह नौ से अपराह्न तीन बजे तक का कर दिया है। उधर, तापमान में उतार चढ़ाव के कारण सर्दी, खांसी व बुखार से पीड़ित होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है।
गलन बढ़ने के कारण जिला अस्पताल में भी मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ गई है। मरीज अपने घर से कंबल लेकर आते हैं। शाम को तापमान में गिरावट होने की वजह से गलन बढ़ने लगती है। चिकित्सक भी लोगों को शाम को घर अथवा कार्यालय से बाहर गर्म कपड़े पहनकर निकलने और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न लेने का सुझाव दे रहे हैं। इस बीच एक सप्ताह के दौरान न्यूनतम तापमान में भी तेजी से उतार चढ़ाव हुआ है। जिला अस्पताल में 29 दिसंबर को 660 मरीज, 30 को 711, 31 को 750 व एक जनवरी को 780 मरीज, 2 को 791, 3 को 810 एवं 4 जनवरी को 850 मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचे। लोगों का कहना है कि इस कड़ाके की ठंड में भी अस्पताल परिसर में अलाव के इंतजाम नहीं किए गए हैं। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों व उनके तीमारदारों में दिक्कत हो रही है।
मौसम वैैैज्ञानिक कैलाश पांडेय का कहना है कि सबसे ज्यादा ठंडा 30 एवं 31 दिसंबर को थी। उस दौरान दिन का अधिकतम तापमान 21 व 22 और न्यूनतम 6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। इससे पहले 29 दिसंबर को अधिकतम 21 एवं न्यूनतम 9 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था। एक जनवरी को अधिकतम 23 व न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस, 2 को अधिकतम 18 व न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस, 3 को अधिकतम 23 व न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस, 4 को अधिकतम 24 और न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया। मौसम में इस उतार चढ़ाव के कारण इन दिनों गलन बढ़ी है। ऐसे में लोगों को सचेत रहने की जरूरत है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरबी राम ने सुझाव दिया कि ठंड से बचाव करने की जरूरत है। ठंड के कारण अस्पताल में खांसी, बुखार आदि से पीड़ित ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इसको देखते हुए बच्चों एवं बुजुर्गों को विशेष रूप से सजग रहने की जरूरत है। अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए बेहतर प्रबंध है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। मौसम में उतार चढ़ाव का लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। एक पखवारे से न्यूनतम व अधिकतम तापमान में तेजी से उतार चढ़ाव हो रहा है। दिन में तेज धूप होने के बाद शाम होते ही गलन बढ़ जा रही है। गलन बढ़ने के कारण जिला प्रशासन ने स्कूलों का समय सुबह नौ से अपराह्न तीन बजे तक का कर दिया है। उधर, तापमान में उतार चढ़ाव के कारण सर्दी, खांसी व बुखार से पीड़ित होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है।
गलन बढ़ने के कारण जिला अस्पताल में भी मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ गई है। मरीज अपने घर से कंबल लेकर आते हैं। शाम को तापमान में गिरावट होने की वजह से गलन बढ़ने लगती है। चिकित्सक भी लोगों को शाम को घर अथवा कार्यालय से बाहर गर्म कपड़े पहनकर निकलने और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा न लेने का सुझाव दे रहे हैं। इस बीच एक सप्ताह के दौरान न्यूनतम तापमान में भी तेजी से उतार चढ़ाव हुआ है। जिला अस्पताल में 29 दिसंबर को 660 मरीज, 30 को 711, 31 को 750 व एक जनवरी को 780 मरीज, 2 को 791, 3 को 810 एवं 4 जनवरी को 850 मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचे। लोगों का कहना है कि इस कड़ाके की ठंड में भी अस्पताल परिसर में अलाव के इंतजाम नहीं किए गए हैं। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों व उनके तीमारदारों में दिक्कत हो रही है।
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मौसम वैैैज्ञानिक कैलाश पांडेय का कहना है कि सबसे ज्यादा ठंडा 30 एवं 31 दिसंबर को थी। उस दौरान दिन का अधिकतम तापमान 21 व 22 और न्यूनतम 6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। इससे पहले 29 दिसंबर को अधिकतम 21 एवं न्यूनतम 9 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था। एक जनवरी को अधिकतम 23 व न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस, 2 को अधिकतम 18 व न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस, 3 को अधिकतम 23 व न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस, 4 को अधिकतम 24 और न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया। मौसम में इस उतार चढ़ाव के कारण इन दिनों गलन बढ़ी है। ऐसे में लोगों को सचेत रहने की जरूरत है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरबी राम ने सुझाव दिया कि ठंड से बचाव करने की जरूरत है। ठंड के कारण अस्पताल में खांसी, बुखार आदि से पीड़ित ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इसको देखते हुए बच्चों एवं बुजुर्गों को विशेष रूप से सजग रहने की जरूरत है। अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए बेहतर प्रबंध है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।