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फीस का चार्ट स्कूल प्रबंध के वेबसाईट पर करें अपलोड

Sun, 08 Jul 2018 12:05 AM IST
Updated Sun, 08 Jul 2018 12:05 AM IST
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फीस का चार्ट स्कूल प्रबंध के वेबसाईट पर करें अपलोड
अब वेबसाइट पर अपलोड करने पड़ेंगे फीस चार्ट
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अपर मुख्य सचिव ने जारी की गाइड लाइन
स्कूल प्रबंधकों को 15 जुलाई तक अपडेट करने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर प्रदेश की सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब फीस चार्ट का ब्योरा प्रबंधन को स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड करना पडे़गा। इससे अभिभावक घर बैठे ऑनलाइन स्कूल की फीस के बारे में जानकारी ले सकेंगे। अपर मुख्य सचिव ने फीस के घालमेल पकड़े जाने पर कड़ी कर्रवाई का निर्देश दिए हैं। स्ववित्त पोषित, स्वतंत्र विद्यालय शुल्क निर्धारण अध्यादेश-2018 पर सरकार ने अमल करना शुरू कर दिया है।
प्रदेश के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा को अध्यादेश को प्रभावी बनाने के लिए निर्देशित किया है। शासन के तेवर तल्ख होते ही अधिकारियों ने स्कूल प्रबंध पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। स्कूल संचालकों को 15 जुलाई तक स्कूल की वेबसाइट पर फीस चार्ट की स्कैन कॉपी अपलोड करने के निर्देश दिया है। वेबसाइट पर फीस चार्ट अपलोड न करने वाले स्कूल को कड़ी चेतावनी भी जारी की गई है। इसके अलावा वर्ष 2015-16, 2016-17-18 व 18-19 का शिक्षकों की मासिक वेतन वृद्धि भी अपलोड करना पडे़ा। सरकार की इस नई व्यवस्था से स्कूल प्रबंधक परेशान हैं। वहीं अभिभावकों में कहा कि निजी स्कूलों के मनमानी पर शिकंजा कसने से सुधार हो सकता है। डीआईओएस अशोक कुमार सिंह ने बताया कि इसके लिए स्कूल प्रबंधकों को पत्र भेजकर व फीस व अन्य गतिविधियां वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है। बताया कि ब्योरा छिपाने वाले प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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शुल्क निर्धारण अध्यादेश में कुछ खास बातें
महराजगंज। डीआईओएस अशोक कुमार सिंह ने बताया कि सालाना 20 हजार से अधिक फीस लेने वाले स्कूल नियम के दायरे में है। एक बार यूनिफार्म निर्धारित होने के बाद अगले पांच साल तक नहीं बदला जा सकता। ड्रेस में बदलाव की जरूरत होने पर मंडलीय समिति से अनुमति लेनी होगी। बच्चों की फीस पर वृद्धि केवल सात से आठ प्रतिशत तक कर सकेंगे। वहीं शिक्षकों का भत्ता बढ़ेगा। मंडल की समिति का निर्णय न मानने पर स्कूल प्रबंध को जुर्माना देना होगा। मनमानी फीस लेने की शिकायत की पुष्टि होने पर स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।
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