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अध्ययन कर मधवलिया गोसदन की स्थिति स्पष्ट करें वन विभाग
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डीएम ने मधवलिया गो सदन की जमीन की मांगी रिपोर्ट
प्रभागीय वनाधिकारी को लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। जिलाधिकारी अमरनाथ उपाध्याय ने सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी को पत्र लिखकर मधवलिया गो सदन की भूमि के बारे में अध्ययन कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। ताकि शासन की मंशा के अनुरूप गो सदन की भूमि का राष्ट्रीय हित में उपयोग किया जा सके।
डीएम ने डीएफओ को लिखे पत्र में कहा है कि गो वंशीय पशुओं के संरक्षण व संवर्धन के लिए शासन ने निचलौल तहसील क्षेत्र के मधवलिया में गो सदन स्थापित किया है। इस गो सदन की अधिकांश भूमि या तो खाली पड़ी है अथवा जंगली घास उगी हुई है। छानबीन में पता चला है कि वन विभाग द्वारा गो सदन के कर्मचारियों को काम करने से न केवल मना किया जाता है बल्कि वन अधिनियम का हवाला देकर कार्रवाई की चेतावनी भी दी जाती है। उक्त भू खंड को अप्रयुक्त रखना राष्ट्रीय क्षति है। ऐसी स्थिति में प्रभागीय वनाधिकारी स्वयं अभिलेखीय एवं विधिक स्थिति का अध्ययन कर स्थिति स्पष्ट करते हुए अवगत कराएं। ताकि उस भूमि का उपयोग राष्ट्रीय हित में किया जा सके। विदित रहे, वन विभाग ने वर्ष 1969 में उक्त भूमि मधवलिया गो सदन को ट्रांसफर किया था, लेकिन उक्त भूमि के मसले पर अब भी वन विभाग व गो सदन प्रबंधन के बीच मतभेद बना हुआ है। जिलाधिकारी इस मामले के निस्तारण की कोशिश कर रहे हैं।
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प्रभागीय वनाधिकारी को लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। जिलाधिकारी अमरनाथ उपाध्याय ने सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी को पत्र लिखकर मधवलिया गो सदन की भूमि के बारे में अध्ययन कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। ताकि शासन की मंशा के अनुरूप गो सदन की भूमि का राष्ट्रीय हित में उपयोग किया जा सके।
डीएम ने डीएफओ को लिखे पत्र में कहा है कि गो वंशीय पशुओं के संरक्षण व संवर्धन के लिए शासन ने निचलौल तहसील क्षेत्र के मधवलिया में गो सदन स्थापित किया है। इस गो सदन की अधिकांश भूमि या तो खाली पड़ी है अथवा जंगली घास उगी हुई है। छानबीन में पता चला है कि वन विभाग द्वारा गो सदन के कर्मचारियों को काम करने से न केवल मना किया जाता है बल्कि वन अधिनियम का हवाला देकर कार्रवाई की चेतावनी भी दी जाती है। उक्त भू खंड को अप्रयुक्त रखना राष्ट्रीय क्षति है। ऐसी स्थिति में प्रभागीय वनाधिकारी स्वयं अभिलेखीय एवं विधिक स्थिति का अध्ययन कर स्थिति स्पष्ट करते हुए अवगत कराएं। ताकि उस भूमि का उपयोग राष्ट्रीय हित में किया जा सके। विदित रहे, वन विभाग ने वर्ष 1969 में उक्त भूमि मधवलिया गो सदन को ट्रांसफर किया था, लेकिन उक्त भूमि के मसले पर अब भी वन विभाग व गो सदन प्रबंधन के बीच मतभेद बना हुआ है। जिलाधिकारी इस मामले के निस्तारण की कोशिश कर रहे हैं।
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