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वेतन नहीं मिला तो लखनऊ में आन्दोलन की चेतावनी
Updated Fri, 24 Aug 2018 12:14 AM IST
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चौकीदारों ने लखनऊ में आंदोलन करने की दी चेतावनी
फोटो
मानदेय की जगह वेतन निर्धारित करने की मांग को लेकर दिया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। ग्रामीण पुलिस चौकीदार संगठन जिला इकाई की ओर से मानदेय की जगह वेतन निर्धारित करने, राज्य कर्मचारी का दर्जा देने समेत अन्य मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दिया। संगठन की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित मांगों का ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया। इस दौरान चौकीदारों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वक्ताओं ने कहा कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो लखनऊ में आंदोलन किया जाएगा।
जिलाध्यक्ष बाले खां ने कहा कि बिहार और गुजरात में चौकीदारों को राज्य कर्मचारी का दर्जा प्राप्त हो चुका है। यूपी में ग्रामीण चौकीदारों का मानदेय महज 15 सौ रुपये ही मिल रहा है। वेतन तय न करके राज्य सरकार ने चौकीदारों को मानदेय पर रखा है। इससे चौकीदारों को जीवन-यापन में समस्या हो रही है। थानों पर जब चाहे तब ड्यूटी कराई जाती है, लेकिन इस बारे में विचार नहीं किया जा रहा है। इस दौरान शिव कुमार कन्नौजिया, इंद्रजीत, रामनाथ वर्मा, नाथू गुप्ता, अनिरूद्ध प्रसाद, शोभा, अशफाक, रामनयन, समसुद्दीन, जलालुद्दीन, गोरख पांडेय, महेश कुमार, वीरेंद्र यादव, इंदल, लाल बहादूर, रामजी, रामअवध, अखिलेश कुमार, प्रवीण कुमार, जर्नादन, रामप्रीत, सरस्वती देवी, रेखा आदि मौजूद रहीं।
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मानदेय की जगह वेतन निर्धारित करने की मांग को लेकर दिया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। ग्रामीण पुलिस चौकीदार संगठन जिला इकाई की ओर से मानदेय की जगह वेतन निर्धारित करने, राज्य कर्मचारी का दर्जा देने समेत अन्य मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दिया। संगठन की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित मांगों का ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया। इस दौरान चौकीदारों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वक्ताओं ने कहा कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो लखनऊ में आंदोलन किया जाएगा।
जिलाध्यक्ष बाले खां ने कहा कि बिहार और गुजरात में चौकीदारों को राज्य कर्मचारी का दर्जा प्राप्त हो चुका है। यूपी में ग्रामीण चौकीदारों का मानदेय महज 15 सौ रुपये ही मिल रहा है। वेतन तय न करके राज्य सरकार ने चौकीदारों को मानदेय पर रखा है। इससे चौकीदारों को जीवन-यापन में समस्या हो रही है। थानों पर जब चाहे तब ड्यूटी कराई जाती है, लेकिन इस बारे में विचार नहीं किया जा रहा है। इस दौरान शिव कुमार कन्नौजिया, इंद्रजीत, रामनाथ वर्मा, नाथू गुप्ता, अनिरूद्ध प्रसाद, शोभा, अशफाक, रामनयन, समसुद्दीन, जलालुद्दीन, गोरख पांडेय, महेश कुमार, वीरेंद्र यादव, इंदल, लाल बहादूर, रामजी, रामअवध, अखिलेश कुमार, प्रवीण कुमार, जर्नादन, रामप्रीत, सरस्वती देवी, रेखा आदि मौजूद रहीं।
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