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विषधरों ने छोड़ दिया बिल
Updated Sun, 22 Jul 2018 06:28 PM IST
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रहें सावधान, विषधरों ने छोड़ दिया बिल
जिला अस्पताल में सर्प दंश से पीड़ित 23 लोगों का हुआ इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। भीषण गर्मी की वजह से बिलों में रहने वाले जहरीले सांप बरसात होते ही बाहर निकल रहे हैं। इन विषधरों का रोजना कोई न कोई शिकार हो रहा है। जागरूकता के अभाव में लोग पीड़ित को अस्पताल ले जाने की बजाय झाड़फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं। समय से उपचार न होने के कारण महीने भर के भीतर जिले में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 23 से अधिक लोगों ने जिला अस्पताल में इलाज कराया है। सबसे ज्यादा सर्प दंश के शिकार ग्रामीण इलाकों के लोग हुए हैं।
10 जुलाई को ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सभा गड़ौरा निवासी धर्मेंद्र विश्वकर्मा का बेटा सन्नी विश्वकर्मा (10) अपने दरवाजे के सामने खेल रहा था। किसी जहरीले सांप ने उसके पैर में डस लिया। परिजन झाड़ फूंक कराने के बाद इलाज के लिए सीएचसी निचलौल लेकर जा रहे थे कि रास्ते में ही उसकी की मौत हो गई। इसी तरह 17 जुलाई को बृजमनगंज थाना क्षेत्र के ग्राम सभा रामपुर के टोला दयालीपुर निवासी कमलेश सहानी (43) खेत में काम कर रहे थे। इस बीच किसी जहरीले सर्प ने काट लिया। परिजन ग्रामीणों की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धानी ले गए। जहां डॉक्टरों ने कमलेश को मृत घोषित कर दिया।
सपेरा जगधर प्रसाद का कहना है कि सांप अपनी बिल से बाहर निकलता है। सांप इंसान से डरता है। इस वजह से वह घर के किसी कोने में दुबका रहता है। इसलिए अंधेरे में जाते समय टार्च साथ रखें। रात में अगर बिस्तर से उठना हो तो पहले नीचे रोशनी से देख लें। जिस कमरे में सामान ज्यादा हो वहां आने जाने के दौरान सतर्कता बरतें।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर आरबी राम ने बताया कि जिस स्थान पर सर्प ने डसा है, वहां से ऊपर तीन अलग-अलग स्थानों पर रस्सी से बांध देना चाहिए। इसके अलावा नई ब्लेड से जहां सर्प ने डसा है, वहीं एक चीरा लगा देना चाहिए। इसके बाद फौरन पीड़ित को अस्पताल ले जाना चाहिए। इस बीच कोशिश करना चाहिए सर्प दंश का शिकार सोने न पाए। अस्पताल में इलाज की बेहतर व्यवस्था है। इंजेक्शन पर्याप्त हैं। सर्प दंश के शिकार लोग अस्पताल आकर इलाज कराएं और झाड़फूंक के चक्कर में न पडे़ं।
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जिला अस्पताल में सर्प दंश से पीड़ित 23 लोगों का हुआ इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। भीषण गर्मी की वजह से बिलों में रहने वाले जहरीले सांप बरसात होते ही बाहर निकल रहे हैं। इन विषधरों का रोजना कोई न कोई शिकार हो रहा है। जागरूकता के अभाव में लोग पीड़ित को अस्पताल ले जाने की बजाय झाड़फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं। समय से उपचार न होने के कारण महीने भर के भीतर जिले में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 23 से अधिक लोगों ने जिला अस्पताल में इलाज कराया है। सबसे ज्यादा सर्प दंश के शिकार ग्रामीण इलाकों के लोग हुए हैं।
10 जुलाई को ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सभा गड़ौरा निवासी धर्मेंद्र विश्वकर्मा का बेटा सन्नी विश्वकर्मा (10) अपने दरवाजे के सामने खेल रहा था। किसी जहरीले सांप ने उसके पैर में डस लिया। परिजन झाड़ फूंक कराने के बाद इलाज के लिए सीएचसी निचलौल लेकर जा रहे थे कि रास्ते में ही उसकी की मौत हो गई। इसी तरह 17 जुलाई को बृजमनगंज थाना क्षेत्र के ग्राम सभा रामपुर के टोला दयालीपुर निवासी कमलेश सहानी (43) खेत में काम कर रहे थे। इस बीच किसी जहरीले सर्प ने काट लिया। परिजन ग्रामीणों की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धानी ले गए। जहां डॉक्टरों ने कमलेश को मृत घोषित कर दिया।
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सपेरा जगधर प्रसाद का कहना है कि सांप अपनी बिल से बाहर निकलता है। सांप इंसान से डरता है। इस वजह से वह घर के किसी कोने में दुबका रहता है। इसलिए अंधेरे में जाते समय टार्च साथ रखें। रात में अगर बिस्तर से उठना हो तो पहले नीचे रोशनी से देख लें। जिस कमरे में सामान ज्यादा हो वहां आने जाने के दौरान सतर्कता बरतें।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर आरबी राम ने बताया कि जिस स्थान पर सर्प ने डसा है, वहां से ऊपर तीन अलग-अलग स्थानों पर रस्सी से बांध देना चाहिए। इसके अलावा नई ब्लेड से जहां सर्प ने डसा है, वहीं एक चीरा लगा देना चाहिए। इसके बाद फौरन पीड़ित को अस्पताल ले जाना चाहिए। इस बीच कोशिश करना चाहिए सर्प दंश का शिकार सोने न पाए। अस्पताल में इलाज की बेहतर व्यवस्था है। इंजेक्शन पर्याप्त हैं। सर्प दंश के शिकार लोग अस्पताल आकर इलाज कराएं और झाड़फूंक के चक्कर में न पडे़ं।