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Maharajganj News: 15 फीसदी गर्भवती हाई रिस्क की जद में, समय पर पहचान से टला खतरा

Wed, 16 Sep 2026 01:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Wed, 16 Sep 2026 01:45 AM IST
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15% of pregnant women fall into the high-risk category; timely detection averts danger.
- 10,205 गर्भवतियों की जांच में 1604 हाईरिस्क, फरेंदा में सबसे अधिक मामले
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महराजगंज। जिले में करीब 15 फीसदी गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की जद में मिली हैं। अप्रैल से जुलाई के बीच प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत 10,205 गर्भवती महिलाओं की जांच हुई। इनमें 15.72 प्रतिशत यानी करीब 1,604 महिलाएं हाई रिस्क पाई गईं। राहत की बात यह है कि समय रहते इनकी पहचान होने से विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इलाज शुरू कराया जा रहा है।

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फरेंदा में सबसे ज्यादा हाई रिस्क गर्भवती

जांच में सबसे अधिक 208 हाई रिस्क गर्भवती फरेंदा सीएचसी में मिलीं। वहीं राजकीय महिला चिकित्सालय (आरएमसी) में 26 और रतनपुर सीएचसी में 29 महिलाएं हाई रिस्क पाई गईं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सभी सरकारी अस्पतालों में पीएमएसएमए के दौरान गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच की जा रही है।
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16 महिलाओं में मिली टीबी, 232 में बीपी-शुगर की समस्या

रतनपुर सीएचसी में जांच के दौरान 16 गर्भवती महिलाओं में टीबी की पुष्टि हुई। बेहतर इलाज के लिए सभी को बड़े अस्पताल रेफर किया गया। 11 महिलाओं में गर्भ की असामान्य स्थिति मिली, जबकि 232 में बीपी, शुगर समेत अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पाई गईं। 17 महिलाएं जुड़वां या तीन बच्चों से गर्भवती मिलीं।
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गर्भधारण से पहले की लापरवाही भी बनी वजह

फरेंदा सीएचसी अधीक्षक डॉ. एमपी सोनकर ने बताया कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, एचआईवी, हीमोग्लोबिन समेत अन्य जांच कराए जाने से हाई रिस्क मामलों की पहचान हो रही है। कई महिलाओं में एनीमिया, कम वजन, बीपी, शुगर और थायराइड की समस्या मिली। उन्होंने बताया कि गर्भधारण से पहले स्वास्थ्य की अनदेखी भी हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का कारण बन रही है। आरएमसी अधीक्षक डॉ. रेशमा खातून ने बताया कि कई महिलाएं गर्भधारण के शुरुआती तीन माह में जांच के लिए अस्पताल नहीं आतीं। गंभीर हालत में पहुंचने पर उन्हें रेफर करना पड़ता है।
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18 से कम और 35 से अधिक उम्र में ज्यादा खतरा

सीएचसी सदर की स्त्री एवं प्रसव रोग विशेषज्ञ डॉ. रोमा गुप्ता के अनुसार हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में मां या गर्भस्थ शिशु को सामान्य से अधिक जटिलताओं का खतरा रहता है। 18 वर्ष से कम या 35 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भधारण, बीपी, शुगर, थायराइड, किडनी या हृदय रोग, प्रीएक्लेम्पसिया, गर्भकालीन डायबिटीज, प्लेसेंटा की समस्या और जुड़वां या तीन बच्चों का गर्भ होना इसके प्रमुख कारण हैं।


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रक्तस्राव या भ्रूण की हलचल कम हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

गर्भावस्था में योनि से रक्तस्राव, लगातार तेज पेट दर्द, भ्रूण की हलचल अचानक कम होना, तेज सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना, चेहरे-हाथ-पैर में अचानक सूजन, सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, चक्कर या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
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अस्पताल का नाम हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की संख्या
बृजमनगंज 47
धानी 87
घुघली 66
लक्ष्मीपुर 141
मिठौरा 160
निचलौल 144
पनियरा 161
परतावल 125
फरेंदा 208
रतनपुर 29
आरएमसी नौतनवा 26
महराजगंज 195
सिसवा 77
जिला अस्पताल 139
कुल 1605
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