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पेयजल संकट: 22 दिन में कम हो गया एक फुट पानी

Sat, 14 Nov 2015 12:58 AM IST
ब्यूराे
ब्यूराे Updated Sat, 14 Nov 2015 12:58 AM IST
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Water crisis : in 22 days was reduced to a foot of water
ललितपुर। गोविंद सागर बांध के पानी का स्तर बहुत तेजी से कम हो रहा है। हालातों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 22 दिन में करीब एक फुट पानी कम हो गया है। ऐसे में गर्मी में पेयजल संकट गहराने के आसार नजर आने लगे हैं, क्योंकि जिस रफ्तार से बांध में पानी का लेबल कम हो रहा है, उससे फरवरी माह में मुख्य पाइप लाइन पानी छोड़ सकती है। इन हालातों में मोटर की सहायता से ही शहर वासियों को पेयजल मिल पाएगा। मार्च में यह संकट और गहरा सकता है।
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दो लाख से अधिक आबादी वाले शहर में 28 हजार से अधिक मकान हैं, लेकिन साढ़े दस हजार उपभोक्ता के नल के संयोजन हैं। ऐसे में माना जा सकता है कि या तो बाकी लोग पानी की चोरी कर रहे हैं अथवा वह हैंडपंप के सहारे हैं। गोविंद सागर बांध से आने वाले कच्चे पानी को 31 एमएलडी वाले शोधित प्लांट में पानी साफ करने के बाद टंकियों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पेयजल पहुंचाया जाता है। इसके बाद मोटरों की सहायता से नगर के विभिन्न स्थानों पर मौजूद टंकियों को भरा जाता है।
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सुबह 5.30 बजे इन टंकियों के बाल्व खोलकर पाइप लाइनों के माध्यम से नगर के उपभोक्ताओं तक साफ पेयजल पहुंचाया जाता है। गोविंद सागर बांध का कुल भराव क्षेत्र 1,196 फुट है। इतने पानी में सिंचाई के साथ आसानी से नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक पेयजल पहुंच जाता है। लेकिन, इस बार बारिश कम होने से गोविंद सागर बांध मात्र 1,181 फुट ही भर पाया है।
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सिंचाई विभाग के अफसरों की मानें तो कुल भराव के सापेक्ष बांध में मात्र 37 प्रतिशत पानी है। लेकिन,  इसमें से 22 प्रतिशत ही उपयोगी जल है। शेष 15 प्रतिशत जल डेड स्टोरेज है, अर्थात इस पानी का उपयोग पेयजल के लिए नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में पानी समय से पहले ही खत्म हो सकता है।

माह अक्तूबर की 21 तारीख को गोविंद सागर बांध में 1,181 फुट पानी था, जो अब 1,180 फुट के नीचे चला गया है। इससे साफ है कि इन 22 दिनों में एक फुट पानी कम हो गया है। वहीं, 1,178 फुट तक ही पानी जल संस्थान की मुख्य पाइप लाइन पकड़ती है। इसके बाद मोटरों की सहायता से पानी पहुंचाने का काम शुरू हो जाता है। लेकिन, जिस गति से बांध का पानी कम हो रहा है उसके अनुसार जनवरी माह तक बांध का पानी खत्म हो जाएगा। इसके बाद नगरवासियों को मोटर की सहायता से पानी मिल पाएगा। लेकिन, मार्च के बाद वह पानी भी कम हो जाएगा। ऐसी स्थिति में संकट पैदा होना तय है।

बड़ी मात्रा में है सिल्ट
गोविंद सागर बांध में लंबे समय से सिल्ट की सफाई नहीं की गई है। वर्तमान में बड़ी मात्रा में सिल्ट मौजूद है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों में पानी का जो लेबल दिखाया जा रहा है, उसमें यह सिल्ट भी मौजूद है। इस स्थिति में जो 22 प्रतिशत पेयजल का पानी अफसरों द्वारा बताया जा रहा है। दरअसल, पानी इससे भी कम है। ऐसी स्थिति में गर्मी में पेयजल संकट के आसार तय हैं।

इनका कहना है-
बरसात कम होने से गोविंद सागर बांध में बहुत कम पानी है। लेकिन, इस पर लगातार नजर रखी जा रही है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी कम भराव का मुद्दा उठाया गया है। निर्धारित सीमा से पानी कम होने पर सिंचाई विभाग को पत्र लिखा जाएगा, जिससे जाखलौन पंप कैनाल (जेपीसी) से गर्मी में पेयजल उपलब्ध हो सके।

- आरएस चौधरी
अधिशासी अभियंता, जल संस्थान

जल संस्थान की ओर से अभी तक पानी की कमी को लेकर कोई पत्राचार नहीं किया गया है। सामान्य तौर पर 1,178 फुट तक जल संस्थान की मुख्य पाइप लाइन पानी पकड़े रहती है। लेकिन, इससे नीचे जाने पर उनको मोटर की सहायता लेनी होगी। गोविंद सागर बांध में कितनी सिल्ट है, इसकी जांच नहीं हुई है।
- आनंद स्वरूप अरजरिया
 सहायक अभियंता, गोविंद सागर बांध।
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