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विजयपुरा हत्याकांड: सड़क जाम करने में 17 नामजद, 100 अज्ञात पर केस
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संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट। पांच दिन पहले शव रखकर सड़क जाम करने के मामले में पूराकलां पुलिस ने 17 नामजद और 100 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामला दर्ज होते ही प्रदर्शनकारियों में हड़कंप मच गया।
जमीन की रंजिश के चलते विजयपुरा के मजरा तिवारीवारे में एक पक्ष ने युवक आशीष कुशवाहा पर घात लगाकर हमला कर दिया था। घायल युवक की मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने पहले गांव विजयपुरा और फिर तालबेहट के पूराकलां तिराहे पर शव रखकर सड़क जाम कर दिया था।
पूराकलां में तैनात उपनिरीक्षक वीरेंद्र कुमार की तहरीर के आधार पर दर्ज मुकदमे में बताया गया कि 24 अप्रैल की शाम करीब पांच बजे सूचना मिली कि आशीष कुशवाहा पर पड़ोस के केहर कुशवाहा समेत चार लोगों ने कुल्हाड़ी से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव लाया जा रहा था, तभी करीब 100-125 लोग विजयपुरा में पूराकलां-तालबेहट रोड पर शव रखकर जाम लगाने लगे।
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सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन समझाने के बावजूद लोग नहीं माने और करीब 40-45 मिनट तक सड़क जाम रखा। इसके बाद प्रदर्शनकारी शव को ट्रैक्टर-ट्रालियों में रखकर विजयपुरा से हिगौंरा होते हुए तालबेहट पहुंचे और पूराकलां तिराहे पर फिर से जाम लगा दिया।
पुलिस के अनुसार इस दौरान आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। एंबुलेंस, बसें और अन्य वाहन फंसे रहे, जिनमें सवार बीमार, बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं भीषण गर्मी में परेशान होते रहे। पुलिस ने इसे लोक मार्ग अवरुद्ध करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और आदेशों की अवहेलना मानते हुए कार्रवाई की।
इन पर दर्ज हुआ मामला
इस मामले में हरीराम, कामता, रामेश्वर, प्रकाश (पुत्र रामदयाल), प्रकाश (पुत्र रामसेवक), लल्लू, राकेश, खुशी, द्वारका, हरीलाल, अरविंद, राम सिंह, जगदीश (पुत्र शिवदयाल), जगदीश (पुत्र फुंदा कुशवाहा), सुखदास, प्रभू सहित 17 लोगों को नामजद करते हुए करीब 100 अज्ञात पर केस दर्ज किया गया है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठने लगे सवाल
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिन पहले तालबेहट के ग्राम खांदी के मजरा रामनगर में भी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में घर में घुसकर तोड़फोड़ और सड़क जाम किया था, लेकिन उस मामले में अब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। ऐसे में दोनों घटनाओं में अलग-अलग रवैया अपनाने को लेकर नाराजगी जताई जा रही है।
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तालबेहट। पांच दिन पहले शव रखकर सड़क जाम करने के मामले में पूराकलां पुलिस ने 17 नामजद और 100 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामला दर्ज होते ही प्रदर्शनकारियों में हड़कंप मच गया।
जमीन की रंजिश के चलते विजयपुरा के मजरा तिवारीवारे में एक पक्ष ने युवक आशीष कुशवाहा पर घात लगाकर हमला कर दिया था। घायल युवक की मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने पहले गांव विजयपुरा और फिर तालबेहट के पूराकलां तिराहे पर शव रखकर सड़क जाम कर दिया था।
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पूराकलां में तैनात उपनिरीक्षक वीरेंद्र कुमार की तहरीर के आधार पर दर्ज मुकदमे में बताया गया कि 24 अप्रैल की शाम करीब पांच बजे सूचना मिली कि आशीष कुशवाहा पर पड़ोस के केहर कुशवाहा समेत चार लोगों ने कुल्हाड़ी से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव लाया जा रहा था, तभी करीब 100-125 लोग विजयपुरा में पूराकलां-तालबेहट रोड पर शव रखकर जाम लगाने लगे।
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सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन समझाने के बावजूद लोग नहीं माने और करीब 40-45 मिनट तक सड़क जाम रखा। इसके बाद प्रदर्शनकारी शव को ट्रैक्टर-ट्रालियों में रखकर विजयपुरा से हिगौंरा होते हुए तालबेहट पहुंचे और पूराकलां तिराहे पर फिर से जाम लगा दिया।
पुलिस के अनुसार इस दौरान आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। एंबुलेंस, बसें और अन्य वाहन फंसे रहे, जिनमें सवार बीमार, बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं भीषण गर्मी में परेशान होते रहे। पुलिस ने इसे लोक मार्ग अवरुद्ध करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और आदेशों की अवहेलना मानते हुए कार्रवाई की।
इन पर दर्ज हुआ मामला
इस मामले में हरीराम, कामता, रामेश्वर, प्रकाश (पुत्र रामदयाल), प्रकाश (पुत्र रामसेवक), लल्लू, राकेश, खुशी, द्वारका, हरीलाल, अरविंद, राम सिंह, जगदीश (पुत्र शिवदयाल), जगदीश (पुत्र फुंदा कुशवाहा), सुखदास, प्रभू सहित 17 लोगों को नामजद करते हुए करीब 100 अज्ञात पर केस दर्ज किया गया है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठने लगे सवाल
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिन पहले तालबेहट के ग्राम खांदी के मजरा रामनगर में भी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में घर में घुसकर तोड़फोड़ और सड़क जाम किया था, लेकिन उस मामले में अब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। ऐसे में दोनों घटनाओं में अलग-अलग रवैया अपनाने को लेकर नाराजगी जताई जा रही है।