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अधिकांश अध्यक्ष ने की शिक्षा की अनदेखी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 21 Nov 2017 01:24 AM IST
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school lalitpur news
- फोटो : demo
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अभी तक नगर पालिका अध्यक्ष रहे जन प्रतिनिधियों ने सड़कों व नालियों का निर्माण कराकर ही खुद को विकास पुरुष मान लिया है। जबकि हकीकत यह है कि इन जनप्रतिनिधियों ने शिक्षा के क्षेत्र में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। नगर पालिका द्वारा संचालित बालक व बालिका दोनों इंटर कॉलेजों के हालात बदहाल हैं। कई दशक बीतने के बाद भी कोई भी नपा अध्यक्ष इन दोनों इंटर कॉलेजों को कॉमर्स व साइंस साइड की मान्यता नहीं दिला पाया है। स्थाई शिक्षकों के अभाव में हर वर्ष ठेके पर शिक्षक-शिक्षिकाएं उपलब्ध कराइ जा रही है।
नगर में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से नगर पालिका परिषद द्वारा बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग दो इंटर कॉलेज संचालित किए जा रहे हैं। बालकों को पीएन इंटर कॉलेज और बालिकाओं का नगर पालिका बालिका इंटर कॉलेज दोनों में ही हाईस्कूल तक की कक्षाएं मध्यमिक शिक्षा परिषद के सहायता प्राप्त हैं और 11वीं व 12वीं की कक्षाएं वित्त विहीन संचालित होते हैं। दोनों ही विद्यालयों की नींव आजादी के पहले रखी गई थी, पूर्व में इन विद्यालयों में प्राइमरी की कक्षाएं और फिर उच्च प्राथमिक कक्षाएं संचालित होती रहीं। पीएनइंटर कॉलेज में हाईस्कूल की नींव वर्ष 1944 में रखी गई और फिर 1997 में इंटरमीडिएट की कक्षाएं शुरू की गई।
इसी तरह नगर पालिका बालिका इंटर कॉलेज में हाईस्कूल की नींव 1971 में और इंटरमीडिएट की कक्षाएं 2001 से शुरू की गई थीं। इनते वर्षों से दोनों ही इंटर कॉलेज आर्ट साइड से ही संचालित हो रहे हैं। इतने वर्षों में अनेकों अध्यक्ष आए और चले गए, लेकिन किसी ने भी नगर के बच्चों के कॉमर्स व साइंस साइड की बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के बारे में नहीं सोचा है। पूर्व में कॉलेज के प्रधानाचार्य के द्वारा ही प्रयास किए गए हैं, लेकिन दोनों की विद्यालयों में लैब स्थापित नहीं होने के कारण इलाहाबाद शिक्षा परिषद के मानकों पर विद्यालय खरा नहीं उतर सका। इसके बाद भी किसी ने विद्यालय में लैक की स्थापना व अन्य विकास की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।
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नगर में बालिकाओं के लिए केवल एक ही इंटर कॉलेज है जहां पर साइंस साइड की व्यवस्था है वह राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, अन्य विकल्प नहीं होने के कारण सैकड़ों छात्राएं हर वर्ष साइंस साइड की शिक्षा से वंचित रहती हैं। उन्हें मजबूरन आर्ट साइड की ही शिक्षा लेनी पड़ती है। वहीं बालकों में भी साइंस साइड वर्ग में प्रवेश लेने के लिए होड़ लगी रहती है और हर वर्ष सैकड़ों छात्र भी वंचित रहे जाते हैं। इसके अलावा नगर पालिका के यह दोनों की विद्यालय ठेका के शिक्षक-शिक्षिकाओं के भरोसे पर चल रही है और दोनों ही विद्यालय विगत वर्षों से बिना प्रधानाचार्य के संचालित हो रहे हैं, दोनों में ही प्रभारी प्रधानाचार्य हैं।
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नगर में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से नगर पालिका परिषद द्वारा बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग दो इंटर कॉलेज संचालित किए जा रहे हैं। बालकों को पीएन इंटर कॉलेज और बालिकाओं का नगर पालिका बालिका इंटर कॉलेज दोनों में ही हाईस्कूल तक की कक्षाएं मध्यमिक शिक्षा परिषद के सहायता प्राप्त हैं और 11वीं व 12वीं की कक्षाएं वित्त विहीन संचालित होते हैं। दोनों ही विद्यालयों की नींव आजादी के पहले रखी गई थी, पूर्व में इन विद्यालयों में प्राइमरी की कक्षाएं और फिर उच्च प्राथमिक कक्षाएं संचालित होती रहीं। पीएनइंटर कॉलेज में हाईस्कूल की नींव वर्ष 1944 में रखी गई और फिर 1997 में इंटरमीडिएट की कक्षाएं शुरू की गई।
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इसी तरह नगर पालिका बालिका इंटर कॉलेज में हाईस्कूल की नींव 1971 में और इंटरमीडिएट की कक्षाएं 2001 से शुरू की गई थीं। इनते वर्षों से दोनों ही इंटर कॉलेज आर्ट साइड से ही संचालित हो रहे हैं। इतने वर्षों में अनेकों अध्यक्ष आए और चले गए, लेकिन किसी ने भी नगर के बच्चों के कॉमर्स व साइंस साइड की बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के बारे में नहीं सोचा है। पूर्व में कॉलेज के प्रधानाचार्य के द्वारा ही प्रयास किए गए हैं, लेकिन दोनों की विद्यालयों में लैब स्थापित नहीं होने के कारण इलाहाबाद शिक्षा परिषद के मानकों पर विद्यालय खरा नहीं उतर सका। इसके बाद भी किसी ने विद्यालय में लैक की स्थापना व अन्य विकास की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।
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नगर में बालिकाओं के लिए केवल एक ही इंटर कॉलेज है जहां पर साइंस साइड की व्यवस्था है वह राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, अन्य विकल्प नहीं होने के कारण सैकड़ों छात्राएं हर वर्ष साइंस साइड की शिक्षा से वंचित रहती हैं। उन्हें मजबूरन आर्ट साइड की ही शिक्षा लेनी पड़ती है। वहीं बालकों में भी साइंस साइड वर्ग में प्रवेश लेने के लिए होड़ लगी रहती है और हर वर्ष सैकड़ों छात्र भी वंचित रहे जाते हैं। इसके अलावा नगर पालिका के यह दोनों की विद्यालय ठेका के शिक्षक-शिक्षिकाओं के भरोसे पर चल रही है और दोनों ही विद्यालय विगत वर्षों से बिना प्रधानाचार्य के संचालित हो रहे हैं, दोनों में ही प्रभारी प्रधानाचार्य हैं।