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Lalitpur News: अभी बाकी है मेरे लाल में जान... कोशिश तो करो

Tue, 22 Apr 2025 01:28 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 22 Apr 2025 01:28 AM IST
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There is still life left in my son... just try
संवाद न्यूज एजेंसी
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तालबेहट/ललितपुर। चिकित्सकों ने दोनों मासूम भाइयों को मृत घोषित किया तो परिजन को उन पर विश्वास नहीं हुआ कि उनके लाल की जान चली गई है। उनके जिंदा होने की आस में दोनों को उठाकर झांसी ले जाने लगे, लेकिन जब गांव के लोगों ने उन्हें समझाया तो वह कुछ दूर जाने के बाद लौट आए।
पेशे से मजदूर जितेंद्र की चार संतानें थीं, जिसमें दो पुत्रियां और दो पुत्र दिव्यांश उर्फ आयुष और सूर्यांश थे। कुएं के पानी में डूबने के बाद जब परिजन दिव्यांश व सूर्यांश को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो यहां तैनात चिकित्सक ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। लेकिन, परिजनों को चिकित्सकों की बात पर विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने दोबारा जांच करने को कहा।
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चिकित्सकों ने दोबारा भी जांच की और पुन: बताया कि दोनों की मौत हो चुकी है। लेकिन, परिजनों को विश्वास नहीं हुआ और जिंदा होने की आस में वह दोनों बच्चों दिव्यांश व सूर्यांश को लेकर झांसी जाने लगे। वह कह रहे थे कि उनके बच्चे अभी जीवित हैं और झांसी में ठीक हो जाएंगे। बच्चों के परिजनों का यह हाल देख नात-रिश्तेदार व ग्रामीणों ने उन्हें समझाया तो कुछ दूर तक जाने के बाद वह लौट आए।
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किसके हाथों में बांधेंगे राखी, किसे कहेंगे भइया : दिव्यांश और सूर्यांश की दोनों बहनें भी अस्पताल पहुंच गई थीं। वह रोते हुए घर वालों से कह रही थीं कि वह किसके हाथों में राखी बांधेगीं। किसे भइया कहेंगी। दोनों मासूम बच्चियों की ये बातें सुनकर वहां मौजूद अन्य लोगों की आंखें भी नम हो गई थीं और वह उनको समझाते रहे।
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आर्थिक सहायता देने का आश्वासन
पानी में डूबने से दो सगे भाइयों की मौत की जानकारी होने पर जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने एसडीएम तालबेहट से बात की। उन्होंने बच्चों की मौत पर संवेदना जताई और चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।

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हर एक की आंखें हुईं नम
पोस्टमार्टम के बाद देर शाम जब दोनों मासूम भाइयों के शव घर पहुंचे तो वहां भारी संख्या में गांव के लोग मौजूद थे। दोनों बच्चों के शव को जब अंतिम संस्कार के लिए घर के बाहर रखा गया तो मां का सबसे ज्यादा हाल बुरा था। वह दहाड़ें मारकर रो रही थी और अपने दोनों बच्चों के शव से लिपट गई थी। अन्य महिलाओं ने किसी प्रकार उसे समझाकर वहां से अलग किया। इसके बाद दोनों भाइयों के शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान वहां मौजूद हर एक व्यक्ति की आंखें नम थीं।
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