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बेवसाइट पर अपलोड नहीं हो रही आख्या
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Sat, 01 Aug 2015 12:34 AM IST
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डीएम जुहेर बिन सगीर ने कहा कि गोद लेने का मतलब गांव जाकर निरीक्षण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गांव में नियमित भ्रमण कर गर्भवती महिलाओं, बच्चों, किशोरियों के स्वास्थ्य एवं पोषण के स्तर में सुधार लाएं। इस कार्य में एनजीओ की भी मदद ली जा सकती है। पोषण कार्यक्रम मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता का कार्यक्रम है। जिस कारण इसे केवल जनपद में नहीं बल्कि प्रदेश के सभी मंडल के अधिकारी, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी गांव गोद लेकर भ्रमण कर रहे हैं। उन्होंने हर तीसरे माह ब्लाक स्तरीय बैठक कर ग्राम स्तर पर कार्यरत कर्मचारी, कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण कराने के निर्देश सीएमओ को दिए। जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि जिले के कुल 46 ग्राम पंचायतों को गोद लिया गया है, जिसमें 23 अधिकारियों को लगाया गया है। अधिकारियों की भ्रमण आख्या प्राप्त हो रही हैं लेकिन, उन्हें बेवसाइट पर अपलोड नहीं किया पा रहा है। अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वह माइक्रोप्लान के अनुसार ही गांव के भ्रमण पर जाए। आशा कार्यकत्रियां एवं एएनएम गर्भवती महिलाओं के चेकअप का रिकार्ड सही ढंग से नहीं कर रही हैं। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी से कार्रवाई की अपेक्षा की गई है। जिस प्रकार माह जनवरी में अर्द्घवार्षिक सर्वेक्षण भरकर उपलब्ध कराया गया था, उसी प्रकार माह जुलाई में अर्द्घवार्षिक सर्वेक्षण उपलब्ध कराना है। उन्होंने एनआरसी के लिए चिह्नित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र पर अधिकारी अवश्य भेजें। इससे पहले जिलाधिकारी ने ग्राम गौना का भ्रमण किया।