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आनलाइन शिक्षा को बनाया फीस वसूलने का हथकंडा

Mon, 25 May 2020 12:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2020 12:27 AM IST
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online education don,t accepted
ललितपुर। लॉकडाउन में निजी और सरकारी स्कूलों द्वारा दी जा रही ऑनलाइन शिक्षा पर शिक्षक व अभिभावक एकमत नहीं है। अभिभावक जहां इसे फीस वसूलने का हथकंडा बता रहे हैं, वहीं शिक्षक इस कठिन दौर में डिजिटल एजुकेशन को सार्थक पहल बता रहे हैं। वे मानते हैं कि ग्रामीण परिवेश में संसाधनों की कमी है, जिससे ऑनलाइन शिक्षा के सार्थक परिणाम प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं।
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कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए स्कूल व कॉलेज बंद किए गए हैं। लॉकडाउन लंबा खिंचता देख स्कूलों ने ऑनलाइन शिक्षा देना प्रारंभ कर दिया है। इसमें व्हाट्सएप को जरिया बनाया गया है। इसे लेकर अभिभावकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि ऑनलाइन शिक्षा देने का कोई फायदा नहीं है। इसमें बच्चों को पढ़ाई करने में काफी मुश्किल होती है। व्हाट्सएप के इतने ग्रुप होते है कि अधिकतर विद्यार्थी इन ग्रुप ही खोलते नहीं है, पढ़ने की तो बात दूर है। हर मां-बाप अपने बच्चों को अच्छे से अच्छे विद्यालयों में पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन उनके लिए विद्यालय की फीस जमा करना बड़ी चुनौती होती है।
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मौजूदा दौर संकट का है, इसमें व्यापारी से लेकर आम आदमी की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है। इसके बाद भी निजी विद्यालय बच्चों की फीस वसूलने का बहाना ढूूंढ रहे व उन्होंने ऑनलाइन शिक्षा देना प्रारंभ कर दिया है। अभिभावकों ने तीन माह की फीस माफ करने की मांग की है। ग्रामीण परिवेश में बच्चों को व्हाट्सएप पर शिक्षा देना संभव नहीं है। अभिभावकों की हालत यह हो गई है कि उन्हें पहले ग्रुप में खुद पढ़ना पढ़ता है, उसके बाद बच्चों को समझना पढ़ता है। स्कूल के शिक्षक केवल ग्रुप में पोस्ट कर देते हैं, बाकी उन्हें किसी नहीं सुनना है। वास्तव में यह ऑनलाइन शिक्षा नहीं है, वे व्हाट्सएप पर केवल होमवर्क बच्चों को दे रहे हैं। यह तो फीस लेने का केवल बहाना है। अभिभावक को प्रतिदिन 1 से 1.5 जीबी का डाटा डॉउनलोड करना पड़ता है, उसके बाद डाटा खत्म हो जाता है। इस तरह हो गई ऑनलाइन पढ़ाई। कुछ अभिभावकों का मत है कि शासन की मंशा अनुसार लाइव क्लासेज पढ़ाना थी, जबकि जिले के निजी विद्यालयों द्वारा व्हाट्सएप पर वीडियो और फोटो पहुंचा कर पढ़ाया जा रहा है। इस प्रकार वीडियो पहुंचा कर पढ़ाने में किसी भी प्रकार से फीस लेने का उन्हें हक नहीं बनता है।
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वर्तमान में सिखाने की प्रक्रिया में ई-लर्निंग तरीके, ऑनलाइन प्रशिक्षण और अन्य डिजिटल पद्धतियों के इस्तेमाल को महत्व दिया जा रहा है, परंतु ग्रामीण परिवेश के छात्रों में ऑनलाइन शिक्षा हेतु सुविधाएं विकसित करना एवं ऑनलाइन खतरों से बचने हेतु समझ विकसित करना भी अत्यंत आवश्यक है।
- गिरीश साहू, शिक्षक
प्राथमिक स्तर पर शिक्षण में बच्चों को आत्मीयता की अत्यधिक आवश्यकता होती है और यह तकनीकी संसाधनों से प्रदत्त नहीं की जा सकती है। बाल मनोविज्ञान के अनुसार, खेल में गहरी रुचि की इस अवस्था में यदि तकनीकी का समावेश अनावश्यक रूप से बालमन के साथ किया गया तो न केवल यह उनके व्यक्तित्व को प्रभावित करेगी, बल्कि कई अन्य शारीरिक और मानसिक व्याधियों की जड़ भी बन सकती है।
- हेमंत तिवारी, शिक्षक
वर्तमान कठिन समय में डिजिटल एजुकेशन सार्थक पहल है, परंतु ग्रामीण परिवेश में संसाधनों के अभाव से सार्थक परिणाम प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं।
- अमृता लोहिया, शिक्षिका
ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था बच्चों के सर्वांगीण विकास में निश्चित रूप से मील का पत्थर साबित हो रही है, परंतु यदि बेसिक शिक्षा की बात की जाए तो आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों हेतु कठिन कार्य है। यदि बच्चों में डाटा सहित एंड्रॉयड फोन की डाटा सहित उपलब्धता सुनिश्चित हो जाए तो यह बच्चे भी शहरी बच्चों से आगे निकल सकते हैं।
- अनूप सैनी, शिक्षक
सरकार द्वारा लाइव क्लासेस चलाने का नियम है, लेकिन वर्तमान में व्हाटसएप क्लासेस चलाई जा रही हैं। इस पर बच्चों का शुल्क मांगना सरकार गलत है। इसके अतिरिक्त अधिकतर निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें नहीं चलाई जाती हैं। जिलाधिकारी को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- अजय तोमर
व्हाट्सएप पर शिक्षा दो प्रतिशत भी कारगर नहीं है। केवल ग्रुप पर वीडियो व फोटो डाली जा रही है। इसमें बच्चा काम कर रहा है या नहीं। इसकी निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है। इस पढ़ाई को आधार बनाकर अभिभावकों से फीस वसूलना गलत है।

- मोंटी शुक्ला
बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा प्रदान की जा रही है, जिन बच्चों के पास एंड्रायड फोन नहीं है, उनको दूरदर्शन और रेडियो पर प्रसारित कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा दी जा रही है। जिनके पास मोबाइल फोन हैं, उनको यू-टयूब व दीक्षा एप के माध्यम से शिक्षण सामग्री उपलब्ध हो रही है।
- रामप्रवेश
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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