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Lalitpur News: शिकारी के फंदे से रेस्क्यू कर तेंदुआ को निकला, वापस जंगल में छोड़ा

Sun, 14 Jan 2024 03:24 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jan 2024 03:24 PM IST
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Leopard rescued from hunter's trap and released back into the forest
संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। देवगढ़ वन रेंज में गढ़ाेली के निकट एक तेंदुआ शिकारी के फंदे में फंस गया। कानपुर से आई वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू कर उसे बाहर निकाला। इसके बाद उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर जंगल में छोड़ दिया। इस घटना से जंगलों में शिकारियों की सक्रियता साफ दिखाई दे रही है।
शुक्रवार दोपहर में देवगढ़ वन क्षेत्र के ग्राम गढ़ौली के पास तेंदुआ शिकारी के फंदे में फंस गया था। बेहाल होकर वह दर्द से कराहने लगा। गांव वालों ने वन विभाग को इसकी सूचना दी। प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी गौतम सिंह टीम के साथ जंगली इलाके से खेतों के रास्ते जहां से आवाज आ रही थी, उस दिशा में चले। उन्हें झाड़ियों में तेंदुआ दिखाई दिया। ड्रोन कैमरे की मदद से देखा तो वह तारों से जकड़ा हुआ था। वह चलने-फिरने में असमर्थ था। उसे सकुशल निकालने के लिए कानपुर से टीम बुलाई गई। देर रात करीब ढाई बजे कड़ी मशक्कत कर उसे बेहोश किया गया। इसके बाद उसे शिकारी के फंदे से बाहर निकालकर पिंजरा में बंद कर देवगढ़ रेंज स्थित कार्यालय लाया गया। यहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर देवगढ़ के घने जंगलों में छोड़ दिया गया।
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तेंदुआ के पिछले भाग में फंसा था फंदा
रेस्क्यू टीम जब तेंदुआ को बेहोश कर उसके पास गई तो देखा कि उसके पिछले भाग में तारों का फंदा फंसा हुआ था। उसकी उम्र करीब चार से पांच साल बताई जा रही है। उसके शरीर पर कहीं भी गहरी चोट का निशान नहीं पाया गया। इसका वजन 60 से 70 किलो बताया गया है।
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शिकारियों पर लगाम कसने के दावों को इस घटना ने दिखाया आईना
वन विभाग हमेशा शिकारियों पर नजर रखने की बात करता है, लेकिन अभी तक क्षेत्र में सक्रिय एक भी शिकारी नहीं पकड़ा गया है। वन क्षेत्रों में जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए शिकारी फंदे तैयार करते हैं। इनमें जब जानवर फंस जाता है, तो उसको मार देते हैं। ये फंदे जंगली सुअर व चीतल आदि को पकड़ने के लिए बिछाए जाते हैं। इन फंदों में अक्सर वनों में विचरण करने वाले दुर्लभ प्रजाति के पशु भी फंस जाते हैं, इससे उनकी मौत हो जाती है। बीते फरवरी में एक तेंदुआ का बच्चा इसमें फंसकर अपनी जान गवां चुका है। यह घटना गौना वन रेंज के महौली क्षेत्र में हुई थी। वन विभाग आज तक शिकारियों का पता नहीं लगा पाई है, इससे उनके हौसले बुलंद हैं।
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तीन माह से दहशत में थे ग्रामीण, वन विभाग ने नकारा था तेंदुए की चहलकदमी
करीब तीन माह पूर्व गांव में तेंदुए ने जानवरों को घायल किया था, इससे ग्रामीणों में दहशत थी। उस समय वन विभाग ने तेंदुआ होने की घटना को सिरे से नकार दिया था। कुछ दिनों तक जंगलों में गश्त करने की बात कही थी, लेकिन उस समय सही ढंग से जांच कर निगरानी रखी होती तो आज यह हादसा नहीं होता।
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टल गई बड़ी घटना
जहां तेंदुआ फंदे में फंसा पाया गया, उससे कुछ ही दूरी पर खेत है। यहां फसल की देखरेख व अन्य कार्य के लिए लोगों का आना-जाना बना रहता है। जिस समय यह तेंदुआ फंदे में फंसा, उस दौरान वहां कई लोग खेतों में काम कर रहे थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर वह फंदे में नहीं फंसता तो किसी को अपना शिकार भी बना सकता था।

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रात में करीब ढाई बजे रेस्क्यू कर तेंदुआ को बाहर निकाला गया। उसे देवगढ़ के जंगलों में छोड़ दिया गया है, यहां तेंदुए का निवास है।-गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।
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