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रोजगार सेवक ने पिता और भाई के जॉब कार्ड बनाए, 82 हजार का गबन किया

Fri, 01 Jan 2021 02:05 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jan 2021 02:05 AM IST
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job card scam rojgar sevak 82 thousand
note.jpg - फोटो : note.jpg
ललितपुर। मनरेगा अधिनियम का उल्लंघन कर ग्राम रोजगार सेवक ने अपने घर में दो जॉब कार्ड बनाकर बिना मजदूरी कराए सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। जांच में मामला उजागर होने पर जिलाधिकारी ने 82 हजार रुपये से अधिक की वसूली करने और ग्राम रोजगार सेवक को हटाने के निर्देश दिए हैं।
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जिलाधिकारी को 14 दिसंबर को शिकायत मिली थी कि विकासखंड बिरधा के ग्राम तालगांव के ग्राम रोजगार सेवक आशीष दीक्षित ने अपने परिवार के सदस्यों के जॉब कार्ड बनाकर फर्जी हाजिरी भरकर भुगतान कर दिया है। जिलाधिकारी ने शिकायत की जांच उपायुक्त श्रम व रोजगार से कराई। उपायुक्त ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि ग्राम रोजगार सेवक ने वर्ष 2006 में अपने पिता रामसहाय के नाम से जॉब कार्ड बनाया था। उक्त जॉब कार्ड पर वित्तीय वर्ष 2008 से अब तक 432 दिन मनरेगा का कार्य दिया और 49,136 रुपये का भुगतान कर दिया। इसी प्रकार अपने भाई हरिशंकर का जॉब कार्र्ड बनाकर वर्ष 2009 में 275 दिन का मस्टर रोल जारी कर बिना कार्य कराए ही 33,642 रुपये का भुगतान कर दिया। ग्राम रोजगार सेवक आशीष दीक्षित ने बताया कि भाई हरिशंकर का विवाह दो वर्ष पूर्व हुआ है। इस प्रकार ग्राम रोजगार सेवक ने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने घर (एक ही परिवार) में दो जॉब कार्ड बनाकर सरकारी धनराशि 82,778 रुपये का गबन किया है।
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उपायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ग्रामवासियों एवं ग्राम रोजगार सेवक द्वारा मौखिक रूप से बताया गया कि उनके पिता ने पूर्व प्रधान के समय में भी मनरेगा मेट के रूप में कार्य किया था। इसके बाद अपने खेत पर पौधरोपण कर 13 फरवरी 2020 से छह दिन व 19 फरवरी से सात दिन (कुल 13 दिन) कार्य किया है। जबकि, इससे पूर्व इनके पिता ने कभी भी कोई मजूदरी नहीं की है। अत: मनरेगा अधिनियम का उल्लंघन करते हुए ग्राम रोजगार सेवक आशीष दीक्षित अपने ही घर (एक ही परिवार में) में दो जॉब कार्ड बनाकर बिना मजदूरी कराए सरकारी धनराशि के दुरुपयोग का दोषी पाया गया है। इस पर जिलाधिकारी ने दुरुपयोग की गई राशि की वसूली और रोजगार सेवक आशीष दीक्षित को एक सप्ताह के भीतर पद से हटाने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
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