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जामनी बांध से निकली टीकमगढ़- रजवाहा नहर को एक नबम्बर से चालू कराये जाने की किसानों ने की मांग
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betwa river.
- फोटो : betwa river.
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महरौनी। फसलों की सिंचाई के लिए किसानों ने जामनी बांध से निकली टीकमगढ़- रजवाहा नहर को एक नवंबर से चालू कराए जाने के लिए जिलाधिकारी से मांग की है। किसानों ने सिंचाई विभाग पर आरोप लगाते हुए बताया कि उन्हें सिंचाई के लिए पिछले बीस वर्ष से समय से पानी नहीं मिलता है, जिससे उनकी फसल को काफी नुकसान होता है।
किसानों ने कहा कि तहसील महरौनी के अंतर्गत सात गांव के किसानों को दिसंबर में पानी दिया जाता है। दिसंबर में टीकमगढ़- रजवाहा नहर में पानी छोड़ा जाता है, जब तक फसल 40 से 45 दिन की हो जाती है और किसानों को फसल में की गयी सिचाई का कोई लाभ नहीं मिल पाता है।
किसानों ने जैसे- तैसे खाद बीज का इंतजाम कर ख़रीफ की फसल में उड़द, मूंग, सोयाबीन बुवाई की थी, जो अतिवृष्टि के कारण फसल नष्ट हो गई और किसानों की लागत भी नही निकल सकी है। अब जैसे तैसे फिर किसान रबी की फसल के लिए खेतों को तैयार करने में लगा हुआ है। रबी की फसल बोने का समय नजदीक आता जा रहा है, किसान दलहनी फसलों को 15 अक्तूबर से बुवाई करते हैं, तो नवंबर के प्रथम सप्ताह में सिंचाई करनी पड़ेगी, नहीं तो सिंचाई के अभाव में फसल सूख जाएगी। अगर बुवाई में देरी करते हैं तो खेतों की नमी चली जाएगी और दलहनी फसल बोने का समय निकल जाएगा। जामनी बांध से निकली टीकमगढ़ रजवाहा पर महरौनी तहसील के ग्राम पाली, जखौरा, अगौरा, बम्हौरी, असोरा, कुम्हेडी मौजा की सिंचाई की जाती है, लेकिन 20 साल से यहां के किसानों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता रहा है। ग्राम जखौरा के किसानों ने जिलाधिकारी से एक नवंबर को नहर खुलवाने की मांग की है।
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तीन एकड़ जमीन है। पांच लड़के हैं। नहर का पानी समय से न मिलने से खेती की लागत भी नही निकलती। सिंचाई विभाग सुनता नही हैं।
- लम्पू अहिरवार
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दो एकड़ जमीन खुद की है और आठ एकड़ जमीन ठेके पर ली है। ठेका का रुपया गहने गिरवी रखकर दिये थे। नहर का पानी समय से नही मिलेगा तो हम तो बर्बाद हो जाएंगे ।
- मिलन अहिरवार
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डेढ एकड़ जमीन है, सिचाई का और कोई साधन नहीं है। नहर का पानी दिसंबर में मिलता है। देर से पानी मिलने पर लागत नहीं निकलती ।
- तुलसीराम विश्वकर्मा
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जैसे- तैसे खाद बीज का इंतजाम करके मटर, मसूर,चना की बुबाई कर रहे हैं। दलहनी फसलों की सिचाई 20 से 30 दिन में करनी पड़ती है। अगर नहर को एक नवंबर को खोल दिया जाता है, तो फसल को समय से पानी मिल जाएगा।
- एस पाल सिंह
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सिंचाई का और कोई साधन नहीं है। सिंचाई विभाग द्वारा नहर का पानी दिसंबर में छोड़ा जाता है जब तक फसलें 40-45 दिन की हो जाती हैं और सिंचाई का लाभ फसल को नहीं मिल पाता है।
- ऋषि पाल सिंह
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किसानों ने कहा कि तहसील महरौनी के अंतर्गत सात गांव के किसानों को दिसंबर में पानी दिया जाता है। दिसंबर में टीकमगढ़- रजवाहा नहर में पानी छोड़ा जाता है, जब तक फसल 40 से 45 दिन की हो जाती है और किसानों को फसल में की गयी सिचाई का कोई लाभ नहीं मिल पाता है।
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किसानों ने जैसे- तैसे खाद बीज का इंतजाम कर ख़रीफ की फसल में उड़द, मूंग, सोयाबीन बुवाई की थी, जो अतिवृष्टि के कारण फसल नष्ट हो गई और किसानों की लागत भी नही निकल सकी है। अब जैसे तैसे फिर किसान रबी की फसल के लिए खेतों को तैयार करने में लगा हुआ है। रबी की फसल बोने का समय नजदीक आता जा रहा है, किसान दलहनी फसलों को 15 अक्तूबर से बुवाई करते हैं, तो नवंबर के प्रथम सप्ताह में सिंचाई करनी पड़ेगी, नहीं तो सिंचाई के अभाव में फसल सूख जाएगी। अगर बुवाई में देरी करते हैं तो खेतों की नमी चली जाएगी और दलहनी फसल बोने का समय निकल जाएगा। जामनी बांध से निकली टीकमगढ़ रजवाहा पर महरौनी तहसील के ग्राम पाली, जखौरा, अगौरा, बम्हौरी, असोरा, कुम्हेडी मौजा की सिंचाई की जाती है, लेकिन 20 साल से यहां के किसानों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता रहा है। ग्राम जखौरा के किसानों ने जिलाधिकारी से एक नवंबर को नहर खुलवाने की मांग की है।
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तीन एकड़ जमीन है। पांच लड़के हैं। नहर का पानी समय से न मिलने से खेती की लागत भी नही निकलती। सिंचाई विभाग सुनता नही हैं।
- लम्पू अहिरवार
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दो एकड़ जमीन खुद की है और आठ एकड़ जमीन ठेके पर ली है। ठेका का रुपया गहने गिरवी रखकर दिये थे। नहर का पानी समय से नही मिलेगा तो हम तो बर्बाद हो जाएंगे ।
- मिलन अहिरवार
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डेढ एकड़ जमीन है, सिचाई का और कोई साधन नहीं है। नहर का पानी दिसंबर में मिलता है। देर से पानी मिलने पर लागत नहीं निकलती ।
- तुलसीराम विश्वकर्मा
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जैसे- तैसे खाद बीज का इंतजाम करके मटर, मसूर,चना की बुबाई कर रहे हैं। दलहनी फसलों की सिचाई 20 से 30 दिन में करनी पड़ती है। अगर नहर को एक नवंबर को खोल दिया जाता है, तो फसल को समय से पानी मिल जाएगा।
- एस पाल सिंह
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सिंचाई का और कोई साधन नहीं है। सिंचाई विभाग द्वारा नहर का पानी दिसंबर में छोड़ा जाता है जब तक फसलें 40-45 दिन की हो जाती हैं और सिंचाई का लाभ फसल को नहीं मिल पाता है।
- ऋषि पाल सिंह
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