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मारपीट के मामले में अभियुक्त को तीन वर्ष की सजा
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ललितपुर। थाना पाली अंतर्गत ग्राम करमरा में पांच वर्ष पुराने मारपीट एवं एससीएसटी के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) बाबर खान ने आरोपी को दोषी पाते हुए तीन वर्ष की कारावास एवं तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
थाना पाली अंतर्गत ग्राम राधापुुर निवासी चतरे अहिरवार ने छह अप्रैल 2016 को थाना पाली में तहरीर देकर बताया था कि सुबह साढ़े दस बजे वह ललितपुर जाने के लिए ग्राम करमरा के बस स्टैंड पर बैठा था, तभी वहां ग्राम करमरा निवासी महाराज सिंह लोधी आया और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने हुए बोला कि उसकी फर्शी (पत्थर की पट्टी) पर क्यों बैठा है, यहां मत बैठ। गाली देने से मना किया तो उसने लोहे की छड़ से मार दिया, जिससे उसके सिर में व पीठ में चोटें आईं। थाना पाली पुुलिस ने उक्त मामले में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र सविता ने बताया कि शनिवार को न्यायाधीश ने उक्त मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गईं दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए आरोपी को एससीएसटी एक्ट के मामले में दोषी पाते हुए तीन वर्ष के कारावास एवं तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। न्यायाधीश ने जुर्माना वसूल होने की स्थिति में आधी राशि पीड़ित को देने के आदेश भी दिए।
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थाना पाली अंतर्गत ग्राम राधापुुर निवासी चतरे अहिरवार ने छह अप्रैल 2016 को थाना पाली में तहरीर देकर बताया था कि सुबह साढ़े दस बजे वह ललितपुर जाने के लिए ग्राम करमरा के बस स्टैंड पर बैठा था, तभी वहां ग्राम करमरा निवासी महाराज सिंह लोधी आया और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने हुए बोला कि उसकी फर्शी (पत्थर की पट्टी) पर क्यों बैठा है, यहां मत बैठ। गाली देने से मना किया तो उसने लोहे की छड़ से मार दिया, जिससे उसके सिर में व पीठ में चोटें आईं। थाना पाली पुुलिस ने उक्त मामले में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र सविता ने बताया कि शनिवार को न्यायाधीश ने उक्त मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गईं दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए आरोपी को एससीएसटी एक्ट के मामले में दोषी पाते हुए तीन वर्ष के कारावास एवं तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। न्यायाधीश ने जुर्माना वसूल होने की स्थिति में आधी राशि पीड़ित को देने के आदेश भी दिए।
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