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Lalitpur News: छुप-छुप के मैं रोता रहता, जब याद मदीना आता है...
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ललितपुर। कौमी एकता के प्रतीक अजीमुश्शान हजरत बाबा सदनशाह रहमत उल्ला अलैह की दरगाह पर चल रहे 105वें उर्स में मंगलवार सुबह सहरी तक कव्वालियों की महफ़िल सजी रही। उर्स के आखिरी दिन बड़ी संख्या में जायरीन यहां पहुंचे और उन्होंने बाबा के आस्ताने जियारत कर चादर पेश की। साथ ही देश में अमन-चैन के लिए दुआ की।
महफिल ए कव्वाली में कव्वाल सलीम जावेद ने खुदा की शान में हम्द-ए-पाक सुनाई। इसके बाद उन्होंनें सुनाया कि छुप-छुप के मैं रोता रहता हूं, जब याद मदीना आता है। मैं पागल सा हो जाता हूं, जब याद मदीना आता है। हजरत अली की शान में अली अली, मौला अली अली कव्वाली पर लोग खूब थिरके।
कव्वाल सलीम जावेद ने मनकबत पेश की कि कि़स्मत में मेरी चैन से जीना लिख दे, डूबे ना कभी मेरा सफ़ीना लिख दे। आधी रात के बाद से सहरी तक गजल का दौर चला। चादर शरीफ के अलावा अन्य कार्यक्रमों में भागीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग सम्मिलित हुए।
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तिरंगी चादर पेश की गई
कौमी एकता सेवा समिति के तत्वावधान में अजीमुश्शान सूफी संत हजरत बाबा सदनशाह रहमत उल्लाह अलैह के आस्ताने पर तिरंगी चादर पेश की गई। चादर की शोभायात्रा हजरत सैयद वाली फूटा बंगला की मजार से शुरू हुई और चर्च, अभिलाषा पंप होते हुए हजरत सदनशाह की दरगाह पर पहुंची। जहां जयारीनों ने बाबा से देश की एकता अखंडता के लिए दुआएं कीं। इस अवसर पर कौमी एकता सेवा समिति के अध्यक्ष परवेज पठान, सपा जिलाध्यक्ष अध्यक्ष नेपाल सिंह यादव, लक्ष्मीनारायण विश्कर्मा, धर्मेंद्र, रूपेश श्रीवास्तव, डॉ. तेजस्व श्रीवास्तव, सुरेंद्र पाल, भगत सिंह राठौर, दीपक फौजी, दयाराम राजपूत, शत्रुधन यादव, कुणाल राजा, नरेंद्र राजपूत, आयुष सैनी, राजेश झा, नितेश रजक, शैलेंद्र यादव, मुजम्मिल पठान, चंदन अहिरवार, राहुल साहू,रोहित यादव, अंकित साहू,दिव्यांशु, राजन, मकबूल राइन मौजूद रहे।
दुकानों पर देर रात तक जुटे रहे खरीदार
उर्स में रोजे के चलते दिन में खरीदार तो अधिक नहीं आए लेकिन रात में उमड़ी भीड़ से दुकानदार खुश दिखे। आलम यह था कि भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
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महफिल ए कव्वाली में कव्वाल सलीम जावेद ने खुदा की शान में हम्द-ए-पाक सुनाई। इसके बाद उन्होंनें सुनाया कि छुप-छुप के मैं रोता रहता हूं, जब याद मदीना आता है। मैं पागल सा हो जाता हूं, जब याद मदीना आता है। हजरत अली की शान में अली अली, मौला अली अली कव्वाली पर लोग खूब थिरके।
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कव्वाल सलीम जावेद ने मनकबत पेश की कि कि़स्मत में मेरी चैन से जीना लिख दे, डूबे ना कभी मेरा सफ़ीना लिख दे। आधी रात के बाद से सहरी तक गजल का दौर चला। चादर शरीफ के अलावा अन्य कार्यक्रमों में भागीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग सम्मिलित हुए।
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तिरंगी चादर पेश की गई
कौमी एकता सेवा समिति के तत्वावधान में अजीमुश्शान सूफी संत हजरत बाबा सदनशाह रहमत उल्लाह अलैह के आस्ताने पर तिरंगी चादर पेश की गई। चादर की शोभायात्रा हजरत सैयद वाली फूटा बंगला की मजार से शुरू हुई और चर्च, अभिलाषा पंप होते हुए हजरत सदनशाह की दरगाह पर पहुंची। जहां जयारीनों ने बाबा से देश की एकता अखंडता के लिए दुआएं कीं। इस अवसर पर कौमी एकता सेवा समिति के अध्यक्ष परवेज पठान, सपा जिलाध्यक्ष अध्यक्ष नेपाल सिंह यादव, लक्ष्मीनारायण विश्कर्मा, धर्मेंद्र, रूपेश श्रीवास्तव, डॉ. तेजस्व श्रीवास्तव, सुरेंद्र पाल, भगत सिंह राठौर, दीपक फौजी, दयाराम राजपूत, शत्रुधन यादव, कुणाल राजा, नरेंद्र राजपूत, आयुष सैनी, राजेश झा, नितेश रजक, शैलेंद्र यादव, मुजम्मिल पठान, चंदन अहिरवार, राहुल साहू,रोहित यादव, अंकित साहू,दिव्यांशु, राजन, मकबूल राइन मौजूद रहे।
दुकानों पर देर रात तक जुटे रहे खरीदार
उर्स में रोजे के चलते दिन में खरीदार तो अधिक नहीं आए लेकिन रात में उमड़ी भीड़ से दुकानदार खुश दिखे। आलम यह था कि भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।