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Lalitpur News: कार्डियोलॉजिस्ट के बिना कैसे हो हृदय रोगियों का उपचार

Sat, 07 Dec 2024 12:05 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 07 Dec 2024 12:05 AM IST
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How to treat heart patients without a cardiologist?
संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में भले ही तमाम सुविधाओं का दावा किया जा रहा हो, लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट के अभाव में हृदय रोगियों को उपचार नहींं मिल पा रहा हैं। ऐसे में मेडिकल काॅलेज हृदय रोगियों के लिए महज रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन लगभग दो मरीज रेफर हो रहे हैं। हद तो तब हो गई, जब सुविधाओं में विस्तार तो दूर उपलब्ध कराई गईं सुविधाएं तक दम तोड़ रही हैं।
जनपद में सर्दी के दस्तक देते ही वीपी के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इस मौसम में ह्रदय रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। लेकिन, इसके बाद भी मेडिकल कॉलेज में ह्रदय रोगियों के उपचार की सुविधाएं नहीं हो सकी है। यहां पर वर्तमान में फिजिशियन के सहारे उपचार दिया जा रहा है। कार्डियोलॉजिस्ट के अभाव में मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। हृदय रोगियों को जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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सीसीयू में अब तक ऑक्सीजन की लाइन नहीं डाली गई है। वहीं हृदय गति की जांच के लिए इको मशीन चार माह से खराब पड़ी हुई है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज के गहन ह्रदय चिकित्सा इकाई में महज प्राथमिक उपचार तक ही सीमित बनी हुई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन दो ह्रदय रोगियों को सुविधाओं के अभाव में रेफर करना पड़ रहा है।
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डेढ़ गुना बढ़ गई ईसीजी तो दो गुनी हो रही बीपी जांच : हृदय गति और लय का पता लगाने के लिए एक इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) का उपयोग किया जाता है। मेडिकल कॉलेज में लगभग एक माह से ईसीजी जांच की संख्या बढ़ गई है। एक माह पहले जहां प्रतिदिन आठ से दस होे रहीं थीं। अब संख्या बढ़कर 12 से 15 तक पहुंच गई है। वहीं बीपी के मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। अक्तूबर माह में जहां प्रतिदिन 40 से 50 मरीज पहुंच रहे थे, अब संख्या दो गुनी हो गई है। प्रतिदिन 70 से 80 मरीज जांच को पहुंच रहे हैं।
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