{"_id":"60ad4b9d8ebc3ebb272b2c06","slug":"guru-ardash-maharaj-ka-festival-manaya-lalitpur-news-jhs195648586","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुरू अमरदास महाराज का मनाया प्रकाश पर्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुरू अमरदास महाराज का मनाया प्रकाश पर्व
विज्ञापन
ललितपुर। लक्ष्मीपुरा स्थित गुरुद्वारा में सिख पंथ के तीसरे गुरु श्री गुरु अमरदास महाराज का प्रकाश पर्व बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाया गया। इस दौरान कोरोना महामारी को समाप्त करने की अरदास की गई।
सर्वप्रथम हरजीत सिंह, सुरजीत सिंह खालसा परिवार की ओर से सहज पाठ साहिब की समाप्ति हुई। मुख्य ग्रंथि मोहकम सिंह ने गुरू जी के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु जी ने जाति प्रथा एवं ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त करने के लिए लंगर की प्रथा को सशक्त बनाया। उस जमाने में भोजन करने के लिए जातियों के अनुसार पंगतें लगा कराई जाती थी। गुरू अमर दास ने सभी के लिए एक ही पंगत में बैठकर लंगर खिलाना अनिवार्य किया, साथ ही छुआछूत के भेदभाव को समाप्त किया। अकबर बादशाह गुरू जी के दर्शनों के लिए गोइंदवाल साहिब आए थे, उन्होंने ने भी एक ही पंगत में बैठकर लंगर चखा था। जाति प्रथा को समाप्त करने के लिए गोइंदवाल साहिब में एक साझी बावड़ी का निर्माण कराया था। गुरु जी का जन्म अमृतसर के बासरके में श्री तेज भल्ला क्षत्रिय के घर माता सुलखनी के यहां हुआ था। सती प्रथा को समाप्त करने के लिए उन्होंने प्रचार किया। वह सती प्रथा के खिलाफ आवाज उठाने वाले पहले समाज सुधारक थे। अंत में कोरोना महामारी को समाप्त करने के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के चरणों मे अरदास की गई। कोरोना महामारी को देखते हुए किसी भी प्रकार के लंगर का आयोजन नहीं किया गया व सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखा गया। इस अवसर पर अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा, जितेंद्र सिंह सलूजा, हरविंदर सिंह सलूजा, मनजीत सिंह सलूजा, मेजर सिंह, हरजीत सिंह, गुनबीर सिंह, चरणजीत सिंह ,सुरजीत सिंह उपस्थित रहे। संचालन वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा ने किया।
विज्ञापन
सर्वप्रथम हरजीत सिंह, सुरजीत सिंह खालसा परिवार की ओर से सहज पाठ साहिब की समाप्ति हुई। मुख्य ग्रंथि मोहकम सिंह ने गुरू जी के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु जी ने जाति प्रथा एवं ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त करने के लिए लंगर की प्रथा को सशक्त बनाया। उस जमाने में भोजन करने के लिए जातियों के अनुसार पंगतें लगा कराई जाती थी। गुरू अमर दास ने सभी के लिए एक ही पंगत में बैठकर लंगर खिलाना अनिवार्य किया, साथ ही छुआछूत के भेदभाव को समाप्त किया। अकबर बादशाह गुरू जी के दर्शनों के लिए गोइंदवाल साहिब आए थे, उन्होंने ने भी एक ही पंगत में बैठकर लंगर चखा था। जाति प्रथा को समाप्त करने के लिए गोइंदवाल साहिब में एक साझी बावड़ी का निर्माण कराया था। गुरु जी का जन्म अमृतसर के बासरके में श्री तेज भल्ला क्षत्रिय के घर माता सुलखनी के यहां हुआ था। सती प्रथा को समाप्त करने के लिए उन्होंने प्रचार किया। वह सती प्रथा के खिलाफ आवाज उठाने वाले पहले समाज सुधारक थे। अंत में कोरोना महामारी को समाप्त करने के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के चरणों मे अरदास की गई। कोरोना महामारी को देखते हुए किसी भी प्रकार के लंगर का आयोजन नहीं किया गया व सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखा गया। इस अवसर पर अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा, जितेंद्र सिंह सलूजा, हरविंदर सिंह सलूजा, मनजीत सिंह सलूजा, मेजर सिंह, हरजीत सिंह, गुनबीर सिंह, चरणजीत सिंह ,सुरजीत सिंह उपस्थित रहे। संचालन वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा ने किया।
विज्ञापन