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Lalitpur News: 60 लाख के गबन के मामले में शासन ने मांगी रिपोर्ट
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। तत्कालीन भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी देवेंद्र निरंजन व वरिष्ठ लिपिक दिनेश अग्निहोत्री पर कार्पस फंड से 60 लाख रुपये के गबन का आरोप लगा था। पूर्व में कराई गई जांच की जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने मुख्य विकास अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है।
ग्राम भरतपुरा के भागीरथ सिंह ने एक प्रार्थनापत्र मुख्यमंत्री को 11 मार्च 2023 को भेजा था। आरोप लगाया था कि विकास खंड बार के ग्राम म्यांव व सूरीखुर्द, विकास खंड मड़ावरा के ग्राम पिपरिया में भूमि संरक्षण अधिकारी ने बिना माप व फर्जी पत्रावली तैयार कर भुगतान कर दिया था। यह भुगतान वित्तीय वर्ष 2022-23 में कार्पस फंड के अंतर्गत नाबार्ड की योजना में किया गया। इससे भूमि सुधार, खेत तालाब व बंधा निर्माण जैसे कार्य होने थे। आरोप लगाया कि करीब 60 लाख रुपये की धनराशि का बंदरबांट किया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय से जिलाधिकारी को जांच करने के निर्देश दिए गए थे।
जानकारों का कहना है कि राजनीतिक दबाव के चलते यह जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई। शासन ने अब जिला प्रशासन को कड़ा पत्र भेजकर जांच आख्या तलब की है। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने इस प्रकरण की जांच आख्या मुख्य विकास अधिकारी से मांगी है। पत्रावली तलाश कर इसकी जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी केके पांडे ने जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी राजेश कुमार सिंह व सहायक अभियंता लोक निर्माण विभाग रोहित त्रिपाठी को नामित कर तीन दिन में रिपोर्ट तलब की है। मुख्य विकास अधिकारी केके पांडे ने बताया कि इसकी जांच आख्या जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी।
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ललितपुर। तत्कालीन भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी देवेंद्र निरंजन व वरिष्ठ लिपिक दिनेश अग्निहोत्री पर कार्पस फंड से 60 लाख रुपये के गबन का आरोप लगा था। पूर्व में कराई गई जांच की जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने मुख्य विकास अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है।
ग्राम भरतपुरा के भागीरथ सिंह ने एक प्रार्थनापत्र मुख्यमंत्री को 11 मार्च 2023 को भेजा था। आरोप लगाया था कि विकास खंड बार के ग्राम म्यांव व सूरीखुर्द, विकास खंड मड़ावरा के ग्राम पिपरिया में भूमि संरक्षण अधिकारी ने बिना माप व फर्जी पत्रावली तैयार कर भुगतान कर दिया था। यह भुगतान वित्तीय वर्ष 2022-23 में कार्पस फंड के अंतर्गत नाबार्ड की योजना में किया गया। इससे भूमि सुधार, खेत तालाब व बंधा निर्माण जैसे कार्य होने थे। आरोप लगाया कि करीब 60 लाख रुपये की धनराशि का बंदरबांट किया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय से जिलाधिकारी को जांच करने के निर्देश दिए गए थे।
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जानकारों का कहना है कि राजनीतिक दबाव के चलते यह जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई। शासन ने अब जिला प्रशासन को कड़ा पत्र भेजकर जांच आख्या तलब की है। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने इस प्रकरण की जांच आख्या मुख्य विकास अधिकारी से मांगी है। पत्रावली तलाश कर इसकी जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी केके पांडे ने जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी राजेश कुमार सिंह व सहायक अभियंता लोक निर्माण विभाग रोहित त्रिपाठी को नामित कर तीन दिन में रिपोर्ट तलब की है। मुख्य विकास अधिकारी केके पांडे ने बताया कि इसकी जांच आख्या जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी।
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