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मंडी बंद होने से छिना सात हजार लोगों से रोजगार
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ललितपुर। लॉक डाउन होने से जिला मुख्यालय पर स्थित गल्ला मंडी वीरान सी हो गई है। इससे जिले के किसान उपज बेचने के लिए परेशान हो रहे हैं। गल्ला मंडी में कार्य करने वाले सात हजार मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
जनपद की गल्ला मंडी प्रदेश की नामचीन मंडियों में शुमार है। जहां पर जनपद के साथ ही समीपवर्ती सीमाओं से सटे मध्यप्रदेश के जिलों के किसान उपज बेचने के लिए आते हैं। अप्रैल में गल्ला मंडी अनाज की भरपूर आवक होने से खचाखच भरी रहती है। अब रोजगार न मिलने से पल्लेदारों को अधिक परेशानी हो रही है। पल्लेदार मंडी में चबूतरों पर बैठकर मजदूरी मिलने की आस लगाए हैं। व्यापारियों में पक्के व कच्चे आढ़तिया भी व्यापार न चलने से मायूस हो गए हैं। आवक अधिक होने से गल्ला मंडी को प्रतिमाह लगभग दो करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है। गल्ला मंडी के राजस्व को चपत भी लग रही है।
किसान उपज की बिक्री के लिए भटक रहे
बीते मार्च में लगाए गए लॉक डाउन से गल्ला मंडी बंद चल रही है। जबकि, इसी समय से किसानों की रबी की फसल आती है। किसान उपज बेचने के लिए जिला मुख्यालय मंडी पहुंचते थे, लेकिन मंडी बंद होने से किसान उपज की बिक्री के लिए भटक रहे हैं। वहीं, गल्ला मंडी में पल्लेदार, तौलने वाले व लोडिंग टैक्सी चालकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
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मंडी में रजिस्टर्ड 500 व्यापारी
नवीन गल्ला मंडी में लगभग 500 व्यापारी रजिस्टर्ड हैं। इनमें 300 व्यापारियों को पक्की दुकानें आवंटित हैं। 128 व्यापारियों को व्यापार करने के लिए खाली भूखंड आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा 48 से अधिक व्यापारी फुुटपाथ पर कारोबार करते हैं, लेकिन बीते माह से सभी व्यापारी कारोबार के लिए परेशान हो रहे हैं।
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चंदेरा में कुछ कारोबारी चोरी छिपे अनाज की खरीद कर रहे
गल्ला मंडी बंद होने से अब तक दो करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हो चुका है। मंडी को एक दिन के लिए खोला गया था, लेकिन किसानों की भीड़ इतनी अधिक हो गई कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना असंभव हो गया। इस पर मंडी सचिव को निलंबित कर दिया गया और मंडी बंद कर दी गई। गल्ला मंडी बंद होने के कारण औद्योगिक क्षेत्र चंदेरा में कुछ कारोबारी चोरी छिपे अनाज की खरीद कर रहे हैं। इस कारण शासन को राजस्व का नुकसान हो रहा है। यही नहीं गल्ला मंडी बंद हो जाने से अब तक दो करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो चुका है। किसानों को भी नुकसान हो रहा है, क्योंकि उन्हें अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा है।
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गल्ला मंडी में पल्लेदारी करके अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं, लेकिन बीते दिनों से बंद होने से बेरोजगारी के संकट से जूझ रहे हैं।
- राजेश
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परिवार का पालन पोषण करने के लिए मजदूरी ही एक मात्र सहारा है। मजदूरी का साधन गल्ला मंडी थी, जो बंद होने से परेशानी बढ़ गई है।
- अमर
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गल्ला मंडी बंद होने से पूरी तरह से बेरोजगारी की कगार पर आ खड़े हुए हैं। इससे आर्थिक संकट भी गहराता जा रहा है।
- शिवराज
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मजदूरों को कुछ धनराशि का भुगतान कराया जाए, जिससे आर्थिक समस्याओं का समाधान हो सके।
- शंकर
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गल्ला मंडी खुल जाए तो लोगों के सामने से बेरोजगारी का संकट खत्म हो जाए, परिवार की स्थिति को दुरुस्त किया जा सके।
- महेंद्र कोरी
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मजदूरी मिलती तो अभी अनाज खरीद कर रख लेते, बाद में मंहगा होने पर खरीदना मुश्किल हो जाता है।
- प्रकाश पंथ
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लॉकडाउन में गल्ला मंडी बंद होने से मंडी के राजस्व प्रभावित होने की समीक्षा नहीं की गई है। समीक्षा के बाद जानकारी हो सकेगी।
- अनिल कुमार मिश्र, अपर जिलाधिकारी
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जनपद की गल्ला मंडी प्रदेश की नामचीन मंडियों में शुमार है। जहां पर जनपद के साथ ही समीपवर्ती सीमाओं से सटे मध्यप्रदेश के जिलों के किसान उपज बेचने के लिए आते हैं। अप्रैल में गल्ला मंडी अनाज की भरपूर आवक होने से खचाखच भरी रहती है। अब रोजगार न मिलने से पल्लेदारों को अधिक परेशानी हो रही है। पल्लेदार मंडी में चबूतरों पर बैठकर मजदूरी मिलने की आस लगाए हैं। व्यापारियों में पक्के व कच्चे आढ़तिया भी व्यापार न चलने से मायूस हो गए हैं। आवक अधिक होने से गल्ला मंडी को प्रतिमाह लगभग दो करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है। गल्ला मंडी के राजस्व को चपत भी लग रही है।
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किसान उपज की बिक्री के लिए भटक रहे
बीते मार्च में लगाए गए लॉक डाउन से गल्ला मंडी बंद चल रही है। जबकि, इसी समय से किसानों की रबी की फसल आती है। किसान उपज बेचने के लिए जिला मुख्यालय मंडी पहुंचते थे, लेकिन मंडी बंद होने से किसान उपज की बिक्री के लिए भटक रहे हैं। वहीं, गल्ला मंडी में पल्लेदार, तौलने वाले व लोडिंग टैक्सी चालकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
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मंडी में रजिस्टर्ड 500 व्यापारी
नवीन गल्ला मंडी में लगभग 500 व्यापारी रजिस्टर्ड हैं। इनमें 300 व्यापारियों को पक्की दुकानें आवंटित हैं। 128 व्यापारियों को व्यापार करने के लिए खाली भूखंड आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा 48 से अधिक व्यापारी फुुटपाथ पर कारोबार करते हैं, लेकिन बीते माह से सभी व्यापारी कारोबार के लिए परेशान हो रहे हैं।
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चंदेरा में कुछ कारोबारी चोरी छिपे अनाज की खरीद कर रहे
गल्ला मंडी बंद होने से अब तक दो करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हो चुका है। मंडी को एक दिन के लिए खोला गया था, लेकिन किसानों की भीड़ इतनी अधिक हो गई कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना असंभव हो गया। इस पर मंडी सचिव को निलंबित कर दिया गया और मंडी बंद कर दी गई। गल्ला मंडी बंद होने के कारण औद्योगिक क्षेत्र चंदेरा में कुछ कारोबारी चोरी छिपे अनाज की खरीद कर रहे हैं। इस कारण शासन को राजस्व का नुकसान हो रहा है। यही नहीं गल्ला मंडी बंद हो जाने से अब तक दो करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो चुका है। किसानों को भी नुकसान हो रहा है, क्योंकि उन्हें अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा है।
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गल्ला मंडी में पल्लेदारी करके अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं, लेकिन बीते दिनों से बंद होने से बेरोजगारी के संकट से जूझ रहे हैं।
- राजेश
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परिवार का पालन पोषण करने के लिए मजदूरी ही एक मात्र सहारा है। मजदूरी का साधन गल्ला मंडी थी, जो बंद होने से परेशानी बढ़ गई है।
- अमर
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गल्ला मंडी बंद होने से पूरी तरह से बेरोजगारी की कगार पर आ खड़े हुए हैं। इससे आर्थिक संकट भी गहराता जा रहा है।
- शिवराज
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मजदूरों को कुछ धनराशि का भुगतान कराया जाए, जिससे आर्थिक समस्याओं का समाधान हो सके।
- शंकर
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गल्ला मंडी खुल जाए तो लोगों के सामने से बेरोजगारी का संकट खत्म हो जाए, परिवार की स्थिति को दुरुस्त किया जा सके।
- महेंद्र कोरी
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मजदूरी मिलती तो अभी अनाज खरीद कर रख लेते, बाद में मंहगा होने पर खरीदना मुश्किल हो जाता है।
- प्रकाश पंथ
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लॉकडाउन में गल्ला मंडी बंद होने से मंडी के राजस्व प्रभावित होने की समीक्षा नहीं की गई है। समीक्षा के बाद जानकारी हो सकेगी।
- अनिल कुमार मिश्र, अपर जिलाधिकारी