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दो दिव्यांग शिक्षक नहीं उतरे मानक पर खरे
Sat, 16 Feb 2019 01:44 AM IST
देवेंद्र कुमार
lalitpur
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Sat, 16 Feb 2019 01:44 AM IST
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jila hospital, lalitpur news
- फोटो : demo
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बेसिक शिक्षा विभाग में वर्ष 2010 से लेकर अब तक की शिक्षक भर्ती की जांच में कई अध्यापक लपेटे में आते दिखाई दे रहे हैं। शुुरूआत में ही दो दिव्यांग अध्यापक जांच के शिकंजे में फंस गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के पैनल ने उन्हें अनफिट घोषित कर दिया है। इस पर बीएसए ने दोनों अध्यापकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
योगी सरकार ने सत्तारूढ़ होते ही बेसिक शिक्षा विभाग की कई भर्तियों पर जांच बैठा दी है। शासन ने इसकी जांच कमेटी एडीएम की अध्यक्षता में बनाई है। लंबे समय से जांच कमेटी इसमें लगी हुई है, लेकिन अब तक उसे कोई बड़ी सफलता नहीं मिल पाई है। इसको लेकर जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह चिंतित हैं। शुक्रवार को वह जांच की समीक्षा करने के लिए बीएसए कार्यालय पहुंच गए। यहां उन्होंने कई कमियां पकड़ी। इसमें स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित पैनल की रिपोर्ट देखकर वह हैरत में पड़ गए। बताया कि बीएसए ने 48 दिव्यांग शिक्षकों के स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए पैनल के पास भेजा। इसमें से पैनल ने 42 शिक्षकों के प्रमाण पत्रों को सही ठहरा दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि जो 11 श्रवण बाधित शिक्षक हैं, उन सभी को दिव्यांग मानते हुए उनके प्रमाण पत्र वैध बता दिए हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग के पास बहरेपन का परीक्षण करने के लिए उपकरण भी नहीं हैं। इससे पैनल की रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो गए। अब प्रशासनिक अफसर नए सिरे से श्रवण बाधित शिक्षकों के परीक्षण की तैयारी में है। चार दिव्यांग शिक्षक ऐसे भी रहे, जो पैनल के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुए। इन शिक्षकों को एक और अवसर परीक्षण का प्रदान किया जा रहा है। नेत्र से संबंधित दिव्यांग दो शिक्षक जांच में फंस गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के पैनल ने उन्हें अनफिट घोषित कर दिया है, इससे उनके प्रमाण पत्र की वैद्यता पर संकट खड़ा हो गया है।
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इस पर बीएसए ने दोनों शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस मौके पर एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह, एसडीएम सदर/बीएसए गजल भारद्वाज व जिला समाज कल्याण अधिकारी पीयूष चंद्र राय मौजूद रहे। जांच करीब एक घंटे तक चली। इस दौरान बीएसए कार्यालय के कई कर्मियों की सांस अटकी रही। जब सभी अधिकारी मौके से चले गए, तब जाकर विभागीय कर्मियों ने राहत की सांस ली।
- जांच में उजागर हुआ पुलिस का टालमटोल का रवैया
वर्ष 2010 से अब तक के 2160 अध्यापकों की जांच की जा रही है। इनके प्रणाम पत्रों के साथ पुलिस का वेरीफिकेशन कराया जा रहा है। इसके अलावा टीईटी प्रमाण पत्रों की ऑनलाइन जांच की जा रही है। पुलिस का सत्यापन में टालमटोल का रवैया उजागर हो रहा है। बीएसए ने शिक्षकों की सूची भेजी तो पुलिस ने शिक्षकवार ब्योरा भेजने की बात कह दी। जब शिक्षकवार विवरण पुलिस को दिया गया तो सत्यापन की जगह बीएसए ने शिक्षकों का थानावार ब्योरा व फोन नंबर देने के लिए कह दिया। इससे शिक्षकों का पुलिस वेरीफिकेशन नहीं हो पा रहा है।
जांच में पकड़ी कई कमियां
जिलाधिकारी ने अध्यापक भर्ती मामले की जांच में कई कमियां पकड़ी हैं। जिसमें दिव्यांग अध्यापकों के स्वास्थ्य परीक्षण की रिपोर्ट पर असंतोष जाहिर किया। दो दिव्यांग शिक्षक पैनल के परीक्षण में अनफिट पाए गए हैं। जिस पर ऐसे शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
योगेंद्र बहादुर सिंह
अपर जिलाधिकारी
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योगी सरकार ने सत्तारूढ़ होते ही बेसिक शिक्षा विभाग की कई भर्तियों पर जांच बैठा दी है। शासन ने इसकी जांच कमेटी एडीएम की अध्यक्षता में बनाई है। लंबे समय से जांच कमेटी इसमें लगी हुई है, लेकिन अब तक उसे कोई बड़ी सफलता नहीं मिल पाई है। इसको लेकर जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह चिंतित हैं। शुक्रवार को वह जांच की समीक्षा करने के लिए बीएसए कार्यालय पहुंच गए। यहां उन्होंने कई कमियां पकड़ी। इसमें स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित पैनल की रिपोर्ट देखकर वह हैरत में पड़ गए। बताया कि बीएसए ने 48 दिव्यांग शिक्षकों के स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए पैनल के पास भेजा। इसमें से पैनल ने 42 शिक्षकों के प्रमाण पत्रों को सही ठहरा दिया है।
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दिलचस्प बात यह है कि जो 11 श्रवण बाधित शिक्षक हैं, उन सभी को दिव्यांग मानते हुए उनके प्रमाण पत्र वैध बता दिए हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग के पास बहरेपन का परीक्षण करने के लिए उपकरण भी नहीं हैं। इससे पैनल की रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो गए। अब प्रशासनिक अफसर नए सिरे से श्रवण बाधित शिक्षकों के परीक्षण की तैयारी में है। चार दिव्यांग शिक्षक ऐसे भी रहे, जो पैनल के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुए। इन शिक्षकों को एक और अवसर परीक्षण का प्रदान किया जा रहा है। नेत्र से संबंधित दिव्यांग दो शिक्षक जांच में फंस गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के पैनल ने उन्हें अनफिट घोषित कर दिया है, इससे उनके प्रमाण पत्र की वैद्यता पर संकट खड़ा हो गया है।
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इस पर बीएसए ने दोनों शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस मौके पर एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह, एसडीएम सदर/बीएसए गजल भारद्वाज व जिला समाज कल्याण अधिकारी पीयूष चंद्र राय मौजूद रहे। जांच करीब एक घंटे तक चली। इस दौरान बीएसए कार्यालय के कई कर्मियों की सांस अटकी रही। जब सभी अधिकारी मौके से चले गए, तब जाकर विभागीय कर्मियों ने राहत की सांस ली।
- जांच में उजागर हुआ पुलिस का टालमटोल का रवैया
वर्ष 2010 से अब तक के 2160 अध्यापकों की जांच की जा रही है। इनके प्रणाम पत्रों के साथ पुलिस का वेरीफिकेशन कराया जा रहा है। इसके अलावा टीईटी प्रमाण पत्रों की ऑनलाइन जांच की जा रही है। पुलिस का सत्यापन में टालमटोल का रवैया उजागर हो रहा है। बीएसए ने शिक्षकों की सूची भेजी तो पुलिस ने शिक्षकवार ब्योरा भेजने की बात कह दी। जब शिक्षकवार विवरण पुलिस को दिया गया तो सत्यापन की जगह बीएसए ने शिक्षकों का थानावार ब्योरा व फोन नंबर देने के लिए कह दिया। इससे शिक्षकों का पुलिस वेरीफिकेशन नहीं हो पा रहा है।
जांच में पकड़ी कई कमियां
जिलाधिकारी ने अध्यापक भर्ती मामले की जांच में कई कमियां पकड़ी हैं। जिसमें दिव्यांग अध्यापकों के स्वास्थ्य परीक्षण की रिपोर्ट पर असंतोष जाहिर किया। दो दिव्यांग शिक्षक पैनल के परीक्षण में अनफिट पाए गए हैं। जिस पर ऐसे शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
योगेंद्र बहादुर सिंह
अपर जिलाधिकारी