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Lalitpur News: आधार और खतौनी में नाम अलग होने से ई-फार्मर रजिस्ट्री में बाधा
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिलावन (ललितपुर)। आधार और राजस्व अभिलेखों में नाम अलग-अलग होने से ज्यादातर किसानों को ई-फार्मर रजिस्ट्री कराने में समस्या आ रही है। यदि नाम में सुधार नहीं हुआ तो कई किसान प्रधानमंत्री सम्मान निधि से वंचित हो सकते हैं।
सरकार ने सभी किसानों के लिए ई-फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य कर रखा है। किसान सम्मान निधि का लाभ भी उसी को मिलेगा जिसने ई-फार्मर रजिस्ट्री करा रखी है। किसान कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर ई-फार्मर रजिस्ट्री कराने पहुंच रहे हैं, लेकिन ज्यादातर के आधार और खतौनी में नाम अलग-अलग होने के कारण रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।
सीएससी संचालकों ने बताया कि किसानों का नाम मिसमैच होने से ज्यादातर की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। सर्वर की भी समस्या बनी हुई है। इस कारण किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। दिनभर में बमुश्किल दो चार किसानों का ही काम हो पा रहा है।
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नाम बदलवाने को लेकर दुविधा में किसान : किसानों के पास दो ही तरीके हैं या तो खतौनी में आधार के अनुसार नाम बदलवाएं या फिर आधार में नाम बदलवाएं। चूंकि आधार पहले से ही बैंक, बीमा, बच्चों के स्कूल के साथ अन्य सरकारी योजनाओं में लिंक हैं, ऐसे में यदि आधार में बदलवाते हैं तो उसे जहां-जहां आधार लिंक है, वहां-वहां बदलाव करवाना पड़ेगा। इससे उनकी परेशानी और बढ़ सकती है। दूसरा राजस्व अभिलेखों में आधार के अनुसार नाम बदलवाएं तो इसकी प्रक्रिया भी जटिल है। ऐसे में किसान नाम बदलवाने को लेकर दुविधा में हैं।
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सिलावन (ललितपुर)। आधार और राजस्व अभिलेखों में नाम अलग-अलग होने से ज्यादातर किसानों को ई-फार्मर रजिस्ट्री कराने में समस्या आ रही है। यदि नाम में सुधार नहीं हुआ तो कई किसान प्रधानमंत्री सम्मान निधि से वंचित हो सकते हैं।
सरकार ने सभी किसानों के लिए ई-फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य कर रखा है। किसान सम्मान निधि का लाभ भी उसी को मिलेगा जिसने ई-फार्मर रजिस्ट्री करा रखी है। किसान कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर ई-फार्मर रजिस्ट्री कराने पहुंच रहे हैं, लेकिन ज्यादातर के आधार और खतौनी में नाम अलग-अलग होने के कारण रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।
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सीएससी संचालकों ने बताया कि किसानों का नाम मिसमैच होने से ज्यादातर की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। सर्वर की भी समस्या बनी हुई है। इस कारण किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। दिनभर में बमुश्किल दो चार किसानों का ही काम हो पा रहा है।
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नाम बदलवाने को लेकर दुविधा में किसान : किसानों के पास दो ही तरीके हैं या तो खतौनी में आधार के अनुसार नाम बदलवाएं या फिर आधार में नाम बदलवाएं। चूंकि आधार पहले से ही बैंक, बीमा, बच्चों के स्कूल के साथ अन्य सरकारी योजनाओं में लिंक हैं, ऐसे में यदि आधार में बदलवाते हैं तो उसे जहां-जहां आधार लिंक है, वहां-वहां बदलाव करवाना पड़ेगा। इससे उनकी परेशानी और बढ़ सकती है। दूसरा राजस्व अभिलेखों में आधार के अनुसार नाम बदलवाएं तो इसकी प्रक्रिया भी जटिल है। ऐसे में किसान नाम बदलवाने को लेकर दुविधा में हैं।