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खेती लायक नहीं रही बीमार मिट्टी

Wed, 06 Dec 2017 01:20 AM IST
Lalitpur
Lalitpur Updated Wed, 06 Dec 2017 01:20 AM IST
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sick soil
carp field - फोटो : demo
धरती पुत्र जिस भूमि पर आश्रित है वह अब खेतीबाड़ी लायक नहीं रही है। इसका खुलासा मृदा नमूनों की परीक्षण रिपोर्ट से हुआ है। मिट्टी में जीवांश कार्बन के साथ सल्फर सहित कई पोषक तत्वों की कमी देखी जा रही है। इससे सतर्क होने की जगह वह फसल में पुरानी पद्घति अपना रहे हैं। इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ रहा है।
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भारत सरकार ने मिट्टी की सेहत के प्रति किसानों को जागरूक बनाने के मकसद से सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम चला रखी है। इसके अंतर्गत कृषकों को हेल्थ कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। वर्ष 2015-16 व 16-17 में दो लाख छप्पन हजार नौ सौ तिरासी सॉयल हेल्थ कार्ड बांटने के लक्ष्य के सापेक्ष एक लाख बयालीस हजार छह सौ उन्नीस कार्डों का वितरण किया जा चुका है। इस दौरान 92 हजार 542 मृदा के नमूनों का परीक्षण किया गया। इसी प्रकार वर्ष 2017-18 में मिले लक्ष्य एक लाख अट्ठाइस हजार चार सौ इक्यावनवें के मुकाबले करीब साढ़े छह हजार मृदा के नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है। इसमें जीवांश कार्बन का अति न्यून स्तर, फास्फेट, सल्फर व जिंक की मात्रा भी कम पाई गई है। इसके अतिरिक्त लोहा, मैगनीज व बोरान कहीं कम तो कहीं मध्यम स्तर में है। पोटाश की मात्रा अधिकतम है। इस स्थिति से बेपरवाह कृषक पुरानी पद्घति में कृषि कार्य कर रहा है। इससे बीमार मिट्टी का उपचार होने की जगह हालात और भी भयावह होते जा रहे हैं। इसका विपरीत असर फसल की पैदावार पर भी पड़ रहा है।
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ये हैं खराबी के कारण
खेती में फसल चक्र जरूरी है। यदि खेतों में मूंग, उड़द की फसल पलट दी जाए तो जीवांश कार्बन की उपलब्धता हो जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं किया जा रहा है। फसल चक्र के अभाव में नाइट्रोजन की उपलब्धता पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। सनई, ढेचा की खेती भी नहीं कर रहे हैं। जैविक खाद से कल्चर बनता है। इसके अलावा खेतों में जिप्सम का भी उपयोग नहीं किया जा रहा है।
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तत्वों के फायदे
फास्फोरस से दाना चमकदार होता है। पोटाश की कमी से पौधे कमजोर होते हैं। जीवांश कार्बन की कमी से मिट्टी में बैक्टीरिया कम हो जाते हैं। इससे पौधों को घुलनशील अवस्था में फास्फोरस व पोटाश नहीं मिल पाता है। नाइट्रोजन की कमी से पौधों की वृद्धि रुक जाती है। सल्फर की कमी से तिलहनी फसल में ऑयल की मात्रा कम हो जाती है।


इतने हुए मृदा हेल्थ कार्ड वितरित
जिले में लक्ष्य दो लाख छप्पन हजार नौ सौ तिरासी के मुुकाबले एक लाख ब्यालीस हजार छह सौ उन्नीस हेल्थ कार्ड वितरित किए जा चुके हैं।

कृषकों को कर रहे जागरूक
रासायनिक खादों का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है तो फसल चक्र के फायदे से अनभिज्ञ हैं। कृषकों को इसके बारे में उन्हें जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी बांटे जा रहे हैं।
सदानंद चौधरी
जिला कृषि अधिकारी ललितपुर
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