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आप्शन वन चिट- फंड कंपनी की होगी जांच
ललितपुर/ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jun 2015 01:43 AM IST
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ललितपुर। तीन बार नाम बदल चुकी चिट-फंड कंपनी आप्शन वन की जांच जिलाधिकारी ने डिप्टी कलेक्टर को सौंप दी है, उनसे जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई है।
जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी कि तुवन चौराहा के पास चिट फंड कंपनी आप्शन वन का कार्यालय है। यह कंपनी लोगों को ऊंचे सपने दिखाकर करोड़ों रुपये जमा कर रही है। कंपनी ने वर्ष 2009 से अब तक तीन बार नाम बदला है। आरोप लगाया गया है कि कंपनी बार- बार नाम बदलकर लोगों से धनराशि ऐंठती है।
पहले इसका नाम हॉली डे पैकेज था, फिर एडवांटेज ट्रेड कंपनी और अब आप्शन वन हो गया है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी गई तो पता चला कि कंपनी फर्जी है। कंपनी का वाणिज्य मंत्रालय, रिर्जव बैंक एवं सेबी में कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। सेबी ने 18 दिसंबर 2014 को कंपनी के खिलाफ आदेश पारित कर कंपनी को पैसा जमा करने पर रोक लगा दी थी। लेकिन, इसके बाद भी कंपनी पास बुक खोलकर पैसा जमा कर रही है। कंपनी की ब्रांच तालबेहट, महरौनी, मड़ावरा और जाखलौन में हैं।
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शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर ने डिप्टी कलेक्टर रत्नाकर मिश्र को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी है। साथ ही यह भी कहा कि जांच कर एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट दें।
पचास करोड़ का है कारोबार
ललितपुर। कंपनी का टर्नओवर करोड़ों रुपये में है। एक अनुमान के मुताबिक कंपनी का लगभग पचास करोड़ रुपये का कारोबार चल रहा है।
पर्ल्स कंपनी की भी होगी जांच
ललितपुर। जिलाधिकारी ने एक अन्य प्राइवेट कंपनी पर्ल्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने डिप्टी कलेक्टर रत्नाकर मिश्र को दिए निर्देशों में कहा है कि कंपनी द्वारा पैसा जमा कराया जा रहा है, लेकिन लोगों द्वारा भुगतान मांगने पर कर्मचारियों द्वारा नहीं दिया जा रहा है। अत: कंपनी की पूरी जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
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जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी कि तुवन चौराहा के पास चिट फंड कंपनी आप्शन वन का कार्यालय है। यह कंपनी लोगों को ऊंचे सपने दिखाकर करोड़ों रुपये जमा कर रही है। कंपनी ने वर्ष 2009 से अब तक तीन बार नाम बदला है। आरोप लगाया गया है कि कंपनी बार- बार नाम बदलकर लोगों से धनराशि ऐंठती है।
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पहले इसका नाम हॉली डे पैकेज था, फिर एडवांटेज ट्रेड कंपनी और अब आप्शन वन हो गया है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी गई तो पता चला कि कंपनी फर्जी है। कंपनी का वाणिज्य मंत्रालय, रिर्जव बैंक एवं सेबी में कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। सेबी ने 18 दिसंबर 2014 को कंपनी के खिलाफ आदेश पारित कर कंपनी को पैसा जमा करने पर रोक लगा दी थी। लेकिन, इसके बाद भी कंपनी पास बुक खोलकर पैसा जमा कर रही है। कंपनी की ब्रांच तालबेहट, महरौनी, मड़ावरा और जाखलौन में हैं।
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शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर ने डिप्टी कलेक्टर रत्नाकर मिश्र को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी है। साथ ही यह भी कहा कि जांच कर एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट दें।
पचास करोड़ का है कारोबार
ललितपुर। कंपनी का टर्नओवर करोड़ों रुपये में है। एक अनुमान के मुताबिक कंपनी का लगभग पचास करोड़ रुपये का कारोबार चल रहा है।
पर्ल्स कंपनी की भी होगी जांच
ललितपुर। जिलाधिकारी ने एक अन्य प्राइवेट कंपनी पर्ल्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने डिप्टी कलेक्टर रत्नाकर मिश्र को दिए निर्देशों में कहा है कि कंपनी द्वारा पैसा जमा कराया जा रहा है, लेकिन लोगों द्वारा भुगतान मांगने पर कर्मचारियों द्वारा नहीं दिया जा रहा है। अत: कंपनी की पूरी जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करें।