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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Sehore: Husband Gets Life Term for Killing Wife Over Son Preference; Court Calls Mindset Stone-Age Thinking

एमपी: पांच बेटियों की मां थी रेखाबाई, पति को चाहिए था बेटा...कुल्हाड़ी से हत्या के बाद कोर्ट ने सुनाई कठोर सजा

Tue, 01 Sep 2026 05:36 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Tue, 01 Sep 2026 05:36 PM IST
सार

बुधनी में पांच बेटियों की मां रेखाबाई की कुल्हाड़ी से हत्या करने वाले पति राजेश कुमरे को अपर सत्र न्यायालय ने आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने पुत्र की चाह में पत्नी की हत्या को पाषाणयुगीन और शर्मनाक मानसिकता बताया।

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Sehore: Husband Gets Life Term for Killing Wife Over Son Preference; Court Calls Mindset Stone-Age Thinking
जिला अदालत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

करीब 20 साल की शादी और पांच बेटियों के बावजूद पुत्र की चाह में पत्नी की हत्या करने वाले पति को अदालत ने कठोर सजा सुनाई है। बुधनी अपर सत्र न्यायालय ने रेखाबाई की कुल्हाड़ी से हत्या के मामले में आरोपी पति राजेश कुमरे को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

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अभियोजन के अनुसार घटना 5 जून 2024 की रात करीब 9 बजे की है। आरोपी राजेश कुमरे ने अपनी पत्नी रेखाबाई पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला किया। उसने गर्दन, चेहरे और हाथ-पैर समेत शरीर के मर्मस्थलों पर वार किए। गंभीर चोटों के कारण रेखाबाई की मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। मामले की प्रथम सूचना रिपोर्ट बुधनी थाने में दर्ज कराई गई।

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अभियोजन के मुताबिक रेखाबाई और राजेश की शादी करीब 20 वर्ष पहले हुई थी। दंपती की पांच बेटियां थीं। पुत्र नहीं होने की मानसिकता आरोपी पर इस कदर हावी थी कि उसने अपनी पत्नी पर कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी जान ले ली।

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25 गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों से कसा शिकंजा
मामले की विवेचना उपनिरीक्षक संदीप जाट ने की। पुलिस ने साक्ष्य जुटाने के बाद आरोपी के खिलाफ अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 25 गवाहों के बयान कराए। न्यायालय ने प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ वैज्ञानिक साक्ष्यों का भी परीक्षण किया।

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मर्मस्थलों पर वार से सामने आई हत्या की मंशा
न्यायालय ने माना कि रेखाबाई की गर्दन और शरीर के मर्मस्थलों पर कुल्हाड़ी से किए गए वार महज हमला नहीं, बल्कि स्पष्ट हत्या की मंशा को दर्शाते हैं। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी राजेश कुमरे को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 के तहत हत्या का दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। शासन की ओर से पैरवी लोक अभियोजक पंकज रघुवंशी ने की।


पुत्र मोह पर कोर्ट की दो टूक टिप्पणी
फैसला सुनाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार सक्सेना ने पुत्र न होने की मानसिकता पर गंभीर टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि 21वीं सदी में पुत्र की चाह में करीब 20 वर्षों से साथ रह रही पत्नी की हत्या करना पाषाणयुगीन और शर्मनाक सोच का परिचायक है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि दिखावे या सामाजिक दबाव के कारण पुत्र को आवश्यक मानना पुरातन और अव्यावहारिक मानसिकता है। बेटे और बेटी में भेदभाव की सोच महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों की जमीन तैयार करती है।

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