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भागवत है भारत का मुकुटमणि शास्त्र
ललितपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jul 2015 01:46 AM IST
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ललितपुर। श्री सिद्धपीठ चंडीधाम मंदिर पर सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण आयोजन में सोमवार को शिवभक्तों ने श्रद्धा व उत्साह के साथ 17 लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया।
शिवलिंग निर्माण के बाद महंतों के निर्देशन में श्रद्धालुओं द्वारा विधि- विधान के साथ बेलपत्र, जल, दूध, शहद व गंगाजल से महाभिषेक किया। स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कथा का वाचन करते हुए कहा कि भक्ति नौ प्रकार की होती है। भगवान श्रीराम जब वनवास के दौरान शबरी के आश्रम में आते हैं तो शबरी उनका स्वागत करती है। उनके चरणों को पखारती हैं, उन्हें आसन पर बैठाती हैं और रसभरे कंद मूल फल लाकर अर्पित करती है। भगवान बार- बार उन फलों के स्वाद की सराहना करते हुए आनंदपूर्वक उनका सेवन करते हैं।
वहीं, श्रद्धालुओं को श्रीमदभागवत कथा सुनाते हुए आचार्य बृजमोहन सैमयल ने कहा कि भागवत भारत का मुकुटमणि शास्त्र है। इसके प्रत्येक श्लोक में श्रीकृष्ण प्रेम की सुगंध है। इसमें साधन, ज्ञान, सिद्ध ज्ञान, साधन भक्ति, सिद्ध-भक्ति, मर्यादा-मार्ग, अनुग्रह-मार्ग द्वैत व अद्वैत समन्वय के साथ प्रेरणादाई उपाख्यानों का अदभुत संग्रह है। महापुराण की आरती उपजिलाधिकारी सदर रमेश चंद्र व आयकर अधिकारी पीडी साहू ने की। इस मौके पर रमाकांत उपाध्याय, अनिल नायक, सदार वीके सिंह, रामगोपाल शास्त्री, राजीव बबेले, दीपक सोनी, वीरेंद्र पुरोहित, अनूप मोदी, राजेश यादव, धमेंद्र रावत, राहुल शुक्ला, मुन्नीलाल, शिवशंकर पुरोहित, महादेवप्रसाद, दुर्गा प्रसाद, निदेश पाठक, विवेक लिटौरिया, वेद लिटौरिया, नितिन उपाध्याय, शत्रुघ्न यादव, गोल्डी पुरोहित आदि मौजूद रहे।
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शिवलिंग निर्माण के बाद महंतों के निर्देशन में श्रद्धालुओं द्वारा विधि- विधान के साथ बेलपत्र, जल, दूध, शहद व गंगाजल से महाभिषेक किया। स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कथा का वाचन करते हुए कहा कि भक्ति नौ प्रकार की होती है। भगवान श्रीराम जब वनवास के दौरान शबरी के आश्रम में आते हैं तो शबरी उनका स्वागत करती है। उनके चरणों को पखारती हैं, उन्हें आसन पर बैठाती हैं और रसभरे कंद मूल फल लाकर अर्पित करती है। भगवान बार- बार उन फलों के स्वाद की सराहना करते हुए आनंदपूर्वक उनका सेवन करते हैं।
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वहीं, श्रद्धालुओं को श्रीमदभागवत कथा सुनाते हुए आचार्य बृजमोहन सैमयल ने कहा कि भागवत भारत का मुकुटमणि शास्त्र है। इसके प्रत्येक श्लोक में श्रीकृष्ण प्रेम की सुगंध है। इसमें साधन, ज्ञान, सिद्ध ज्ञान, साधन भक्ति, सिद्ध-भक्ति, मर्यादा-मार्ग, अनुग्रह-मार्ग द्वैत व अद्वैत समन्वय के साथ प्रेरणादाई उपाख्यानों का अदभुत संग्रह है। महापुराण की आरती उपजिलाधिकारी सदर रमेश चंद्र व आयकर अधिकारी पीडी साहू ने की। इस मौके पर रमाकांत उपाध्याय, अनिल नायक, सदार वीके सिंह, रामगोपाल शास्त्री, राजीव बबेले, दीपक सोनी, वीरेंद्र पुरोहित, अनूप मोदी, राजेश यादव, धमेंद्र रावत, राहुल शुक्ला, मुन्नीलाल, शिवशंकर पुरोहित, महादेवप्रसाद, दुर्गा प्रसाद, निदेश पाठक, विवेक लिटौरिया, वेद लिटौरिया, नितिन उपाध्याय, शत्रुघ्न यादव, गोल्डी पुरोहित आदि मौजूद रहे।
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