{"_id":"5b6604e04f1c1b49778b621f","slug":"131533412576-lalitpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला चिकित्सालय में चिकित्सक और नर्सो में उभरे मतभेद","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
महिला चिकित्सालय में चिकित्सक और नर्सो में उभरे मतभेद
Updated Sun, 05 Aug 2018 01:26 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चिकित्सक और नर्सो में उभरे मतभेद
जिला महिला चिकित्सालय का हाल
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिला महिला चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी के चलते कार्य की अधिकता विवाद का कारण बन रही है। शनिवार को चिकित्सक और नर्सों के बीच की अनबन का मामला सीएमएस के समक्ष पहुंच गया। इसे किसी तरह शांत कराया गया। हालांकि, सीएमएस इस मामले पर पर्दा डालते नजर आए।
संस्थागत प्रसव के प्रति लोगों में आई जागरूकता से जिला महिला चिकित्सालय पर काम का दबाव बढ़ गया है। इस हिसाब से अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। विशेषकर आपरेशन करने वाले विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है। ऐसे में एक महिला चिकित्सक पर समूचा अस्पताल निर्भर होकर रह गया है। बीते कई दिनों से एक महिला चिकित्सक की नर्सों से किसी बात को लेकर अनबन चल रही है। शनिवार को यह मामला तीखी बहस में तब्दील हो गया। इससे इलाज करा रहे मरीजों को काफी दिक्कत आई। नर्सों ने एकजुटता दिखाते हुए महिला चिकित्सक के साथ काम करने से मना कर दिया। जब मरीज परेशान होने लगे तो यह प्रकरण सीएमएस हरेंद्र चौहान के पास पहुंच गया। उन्होंने अपने चैंबर में नर्सों से करीब आधा घंटा चर्चा की और उनका गुस्सा शांत कराया। तब जाकर नर्सें काम पर लौटी। महिला चिकित्सक और नर्सों के बीच रही अनबन को लोग कई तरह से देख रहे हैं। मालूम हो कि महिला चिकित्सालय में डिलीवरी के नाम पर अवैध उगाही के शिकायतें कई बार हो चुकी हैं। हालांकि, पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में इनकी अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई। कुल मिलाकर महिला अस्पताल के विवाद आए दिन सामने आते रहते हैं, जिससे अस्पताल सुर्खियों में बना रहता है।
कार्य अधिकता से आ जाता चिड़चिड़ापन
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी किसी से छिपी नहीं है। यहां एक चिकित्सक को 24 से 36 घंटे काम करना पड़ता है। वहीं, नर्सों पर भी काम का दबाव है, ऐसी स्थिति में चिड़चिड़ापन होना स्वाभाविक है। उन्होंने चिकित्सक एवं नर्सो के बीच मतभेद होने से इंकार किया है।
विज्ञापन
डा. हरेंद्र चौहान, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला चिकित्सालय
विज्ञापन
जिला महिला चिकित्सालय का हाल
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिला महिला चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी के चलते कार्य की अधिकता विवाद का कारण बन रही है। शनिवार को चिकित्सक और नर्सों के बीच की अनबन का मामला सीएमएस के समक्ष पहुंच गया। इसे किसी तरह शांत कराया गया। हालांकि, सीएमएस इस मामले पर पर्दा डालते नजर आए।
संस्थागत प्रसव के प्रति लोगों में आई जागरूकता से जिला महिला चिकित्सालय पर काम का दबाव बढ़ गया है। इस हिसाब से अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। विशेषकर आपरेशन करने वाले विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है। ऐसे में एक महिला चिकित्सक पर समूचा अस्पताल निर्भर होकर रह गया है। बीते कई दिनों से एक महिला चिकित्सक की नर्सों से किसी बात को लेकर अनबन चल रही है। शनिवार को यह मामला तीखी बहस में तब्दील हो गया। इससे इलाज करा रहे मरीजों को काफी दिक्कत आई। नर्सों ने एकजुटता दिखाते हुए महिला चिकित्सक के साथ काम करने से मना कर दिया। जब मरीज परेशान होने लगे तो यह प्रकरण सीएमएस हरेंद्र चौहान के पास पहुंच गया। उन्होंने अपने चैंबर में नर्सों से करीब आधा घंटा चर्चा की और उनका गुस्सा शांत कराया। तब जाकर नर्सें काम पर लौटी। महिला चिकित्सक और नर्सों के बीच रही अनबन को लोग कई तरह से देख रहे हैं। मालूम हो कि महिला चिकित्सालय में डिलीवरी के नाम पर अवैध उगाही के शिकायतें कई बार हो चुकी हैं। हालांकि, पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में इनकी अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई। कुल मिलाकर महिला अस्पताल के विवाद आए दिन सामने आते रहते हैं, जिससे अस्पताल सुर्खियों में बना रहता है।
विज्ञापन
कार्य अधिकता से आ जाता चिड़चिड़ापन
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी किसी से छिपी नहीं है। यहां एक चिकित्सक को 24 से 36 घंटे काम करना पड़ता है। वहीं, नर्सों पर भी काम का दबाव है, ऐसी स्थिति में चिड़चिड़ापन होना स्वाभाविक है। उन्होंने चिकित्सक एवं नर्सो के बीच मतभेद होने से इंकार किया है।
विज्ञापन
डा. हरेंद्र चौहान, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला चिकित्सालय