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लापरवाही: बिना सुरक्षा के बैंक तक पहुंचता बिजली विभाग का कैश
Updated Tue, 24 Apr 2018 12:50 AM IST
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बिना सुरक्षा के बैंक तक पहुंचता बिजली विभाग का कैश
ललितपुर। पिछले दिनों पड़ोसी जनपद झांसी में स्कूटर से कैश जमा करने जा रहे बिजली विभाग के कैशियर के साथ हुई लूट के बाद भी जिले के अफसरों की नींद नहीं टूटी है। जनपद में संचालित हो रहे सभी कैश काउंटरों पर 10 से 12 लाख रुपये जमा होने वाला कैश बिना किसी सुरक्षा के कर्मचारी दो पहिया वाहनों से बैंकों में जमा करने के लिए ले जाते हैं। इन्हें अधिकारियों द्वारा न तो वाहन ही उपलब्ध कराए जाते हैं और न ही सुरक्षा। ऐसे में कैश ले जाते समय कभी भी लूट की घटना की संभावना बनी रहती है।
जिला में बिजली विभाग उपखंड व खंडीय कार्यालय के अंतर्गत दस कैश काउंटर हैं। जिसके तहत जिला परिषद स्थित खंडीय कार्यालय, उपखंड कार्यालय प्रथम के तहत नझाई बाजार, उपखंड कार्यालय द्वितीय के अंतर्गत गल्ला मंडी व पाली, महरौनी कार्यालय के अंतर्गत महरौनी, बानपुर और मड़ावरा एवं तालबेहट कार्यालय के अंतर्गत तालबेहट, बांसी और जखौरा में कैश काउंटर संचालित हो रहे हैं। हर रोज दोपहर तक इन कैश काउंटरों पर बिजली बिल जमा किया जाता है और दोपहर बाद काउंटर बंद होने पर विद्युत बिलों की जमा राशि को बैंकों में जमा किया जाता है।
बैंकों में यह धनराशि कैशियर को अपने निजी दो पहिया वाहनों से बिना कोई सुरक्षा के ही बैंकों तक ले जानी होती है। इसके लिए न तो कैशियर के पास न तो सरकारी सेवा में लगे चार पहिया वाहन ही उपलब्ध कराए जाते हैं और न ही विभाग द्वारा सुरक्षा के लिए गार्ड ही भेजे जाते हैं। ऐसे में हर रोज कैशियर को यहां विद्युत बिल की काउंटरों पर जमा धनराशि बिना कोई सुरक्षा के बैंक तक अपनी ही रिक्स पर ले जानी होती है। जबकि बिजली विभाग में अधीक्षण अभियंता, शहरी और ग्रामीण अधिशासी अभियंताओं के अलावा जिला में चार उपखंड अधिकारियों सभी के लिए एक-एक वाहन कुल मिलाकर करीब सात चार पहिया सरकारी वाहन लगे हुए हैं। लेकिन यह सभी वाहन सरकारी कार्यों से ज्यादा अफसरों की सेवा में ही रहते हैं। जबकि इन कैश काउंटरों पर उपभोक्ताओं द्वारा जमा किए जाने वाले विद्युत बिल की धनराशि लाखों में होती है। यह राशि कैशियर दो पहिया वाहनों से बिना सुरक्षा गार्ड के हर रोज जमा करने के लिए जोखिम उठाकर बैंकों तक ले जाना होता है। अकेले नझाई बाजार में खुले काउंटरों पर ही हर रोज छह से सात लाख रुपये और कई बार इससे भी कहीं अधिक कैश जमा होता है। लेकिन कैशियर को मजबूरी में जोखिम उठाकर ही बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के बैंकों में कैस जमा करने जाना होता है। गत दिनों झांसी में बिजली विभाग के एक कैशियर के साथ मारपीट करने के साथ लाखों रुपये की लूट हो गई और यह खबर समाचार पत्रों की सुर्खियां भी बनी रहती है, जिस पर जिला के विद्युत कार्यालयों में भी इसकी खूब चर्चा रही, लेकिन इसके बाद भी अधिकारी अभी भी नहीं चेते हैं और जनपद के सभी कैश काउंटरों पर जमा कैश बैंकों तक खौफ के साए में ही पहुंचाया जा रहा है।
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अवकाश के दिन कैश रखना मुसीबत
विद्युत अधिकारियों द्वारा अधिकांश रविवार या फिर कई बार अवकाश के दिनों में भी विद्युत कैश काउंटर खोलने के आदेश दिए जाते हैं। उस दिन बैंक भी बंद रहते हैं। ऐसे में यह काउंटरों पर जमा होने वाला कैश खंडीय कार्यालय में बने चेस्ट में जमा होना चाहिए। लेकिन उस दिन हैड कैशियर या अन्य उच्चाधिकारियों के न होने पर यह कैश कैशियर को मजबूरन अपने घर में अपनी ही रिस्क पर रखना होता है, जो अगले दिन बैंक खुलने पर ही जमा किया जा सकता है। ऐसे में अवकाश के दिनों में घर में कैश रखना कैशियर के लिए बड़ी मुसीबत बन जाता है।
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यह है नियम
कैश काउंटरों पर जमा होने वाला कैश कैशियर द्वारा खंडीय कार्यालय में पहले हैड कैशियर के पास जमा करना होता है। इसके बाद हैड कैशियर की जिम्मेदारी होती है कि वह कैश को बैंक में सरकारी चार पहिया वाहन के साथ सुरक्षा गार्डों की सुरक्षा में बैंक तक ले जाए और बैंक में रुपये जमा कराए।
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प्राइवेट कर्मचारियों के हाथों कैश जमा की जिम्मेदारी
बिजली विभाग में विभाग द्वारा कंपनी के माध्यम से कई जगह कैश काउंटरों पर प्राइवेट कर्मचारी लगाए गए हैं, जो बिजली बिल जमा तो करते हैं। इसके साथ ही इन्हीं कर्मचारियों से ही विभाग द्वारा बैंक में कैश जमा करने की जिम्मेेदारी भी सौंप रखी है।
इनका कहना है-
सुरक्षा के बीच ही कैश जमा कराने के दिए निर्देश
विद्युत कैश काउंटरों पर जमा कैश को एक्सईएन, एसडीओ को दिए गए सरकारी वाहनों के साथ असलहाधारी गार्डों की सुरक्षा के बीच ही जमा कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। कोई भी प्राइवेट आदमी कैश जमा नहीं करेगा। यदि कोई नियम का पालन नहीं करता है तो स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
एसके वर्मा, प्रबंध निदेशक डीवीवीएनएल, आगरा।
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ललितपुर। पिछले दिनों पड़ोसी जनपद झांसी में स्कूटर से कैश जमा करने जा रहे बिजली विभाग के कैशियर के साथ हुई लूट के बाद भी जिले के अफसरों की नींद नहीं टूटी है। जनपद में संचालित हो रहे सभी कैश काउंटरों पर 10 से 12 लाख रुपये जमा होने वाला कैश बिना किसी सुरक्षा के कर्मचारी दो पहिया वाहनों से बैंकों में जमा करने के लिए ले जाते हैं। इन्हें अधिकारियों द्वारा न तो वाहन ही उपलब्ध कराए जाते हैं और न ही सुरक्षा। ऐसे में कैश ले जाते समय कभी भी लूट की घटना की संभावना बनी रहती है।
जिला में बिजली विभाग उपखंड व खंडीय कार्यालय के अंतर्गत दस कैश काउंटर हैं। जिसके तहत जिला परिषद स्थित खंडीय कार्यालय, उपखंड कार्यालय प्रथम के तहत नझाई बाजार, उपखंड कार्यालय द्वितीय के अंतर्गत गल्ला मंडी व पाली, महरौनी कार्यालय के अंतर्गत महरौनी, बानपुर और मड़ावरा एवं तालबेहट कार्यालय के अंतर्गत तालबेहट, बांसी और जखौरा में कैश काउंटर संचालित हो रहे हैं। हर रोज दोपहर तक इन कैश काउंटरों पर बिजली बिल जमा किया जाता है और दोपहर बाद काउंटर बंद होने पर विद्युत बिलों की जमा राशि को बैंकों में जमा किया जाता है।
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बैंकों में यह धनराशि कैशियर को अपने निजी दो पहिया वाहनों से बिना कोई सुरक्षा के ही बैंकों तक ले जानी होती है। इसके लिए न तो कैशियर के पास न तो सरकारी सेवा में लगे चार पहिया वाहन ही उपलब्ध कराए जाते हैं और न ही विभाग द्वारा सुरक्षा के लिए गार्ड ही भेजे जाते हैं। ऐसे में हर रोज कैशियर को यहां विद्युत बिल की काउंटरों पर जमा धनराशि बिना कोई सुरक्षा के बैंक तक अपनी ही रिक्स पर ले जानी होती है। जबकि बिजली विभाग में अधीक्षण अभियंता, शहरी और ग्रामीण अधिशासी अभियंताओं के अलावा जिला में चार उपखंड अधिकारियों सभी के लिए एक-एक वाहन कुल मिलाकर करीब सात चार पहिया सरकारी वाहन लगे हुए हैं। लेकिन यह सभी वाहन सरकारी कार्यों से ज्यादा अफसरों की सेवा में ही रहते हैं। जबकि इन कैश काउंटरों पर उपभोक्ताओं द्वारा जमा किए जाने वाले विद्युत बिल की धनराशि लाखों में होती है। यह राशि कैशियर दो पहिया वाहनों से बिना सुरक्षा गार्ड के हर रोज जमा करने के लिए जोखिम उठाकर बैंकों तक ले जाना होता है। अकेले नझाई बाजार में खुले काउंटरों पर ही हर रोज छह से सात लाख रुपये और कई बार इससे भी कहीं अधिक कैश जमा होता है। लेकिन कैशियर को मजबूरी में जोखिम उठाकर ही बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के बैंकों में कैस जमा करने जाना होता है। गत दिनों झांसी में बिजली विभाग के एक कैशियर के साथ मारपीट करने के साथ लाखों रुपये की लूट हो गई और यह खबर समाचार पत्रों की सुर्खियां भी बनी रहती है, जिस पर जिला के विद्युत कार्यालयों में भी इसकी खूब चर्चा रही, लेकिन इसके बाद भी अधिकारी अभी भी नहीं चेते हैं और जनपद के सभी कैश काउंटरों पर जमा कैश बैंकों तक खौफ के साए में ही पहुंचाया जा रहा है।
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अवकाश के दिन कैश रखना मुसीबत
विद्युत अधिकारियों द्वारा अधिकांश रविवार या फिर कई बार अवकाश के दिनों में भी विद्युत कैश काउंटर खोलने के आदेश दिए जाते हैं। उस दिन बैंक भी बंद रहते हैं। ऐसे में यह काउंटरों पर जमा होने वाला कैश खंडीय कार्यालय में बने चेस्ट में जमा होना चाहिए। लेकिन उस दिन हैड कैशियर या अन्य उच्चाधिकारियों के न होने पर यह कैश कैशियर को मजबूरन अपने घर में अपनी ही रिस्क पर रखना होता है, जो अगले दिन बैंक खुलने पर ही जमा किया जा सकता है। ऐसे में अवकाश के दिनों में घर में कैश रखना कैशियर के लिए बड़ी मुसीबत बन जाता है।
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यह है नियम
कैश काउंटरों पर जमा होने वाला कैश कैशियर द्वारा खंडीय कार्यालय में पहले हैड कैशियर के पास जमा करना होता है। इसके बाद हैड कैशियर की जिम्मेदारी होती है कि वह कैश को बैंक में सरकारी चार पहिया वाहन के साथ सुरक्षा गार्डों की सुरक्षा में बैंक तक ले जाए और बैंक में रुपये जमा कराए।
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प्राइवेट कर्मचारियों के हाथों कैश जमा की जिम्मेदारी
बिजली विभाग में विभाग द्वारा कंपनी के माध्यम से कई जगह कैश काउंटरों पर प्राइवेट कर्मचारी लगाए गए हैं, जो बिजली बिल जमा तो करते हैं। इसके साथ ही इन्हीं कर्मचारियों से ही विभाग द्वारा बैंक में कैश जमा करने की जिम्मेेदारी भी सौंप रखी है।
इनका कहना है-
सुरक्षा के बीच ही कैश जमा कराने के दिए निर्देश
विद्युत कैश काउंटरों पर जमा कैश को एक्सईएन, एसडीओ को दिए गए सरकारी वाहनों के साथ असलहाधारी गार्डों की सुरक्षा के बीच ही जमा कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। कोई भी प्राइवेट आदमी कैश जमा नहीं करेगा। यदि कोई नियम का पालन नहीं करता है तो स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
एसके वर्मा, प्रबंध निदेशक डीवीवीएनएल, आगरा।