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बयान देने आए शिकायतकर्ताओं ने लगाए दुव्र्यवहार के आरोप
Updated Fri, 13 Jul 2018 01:09 AM IST
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बयान देने आए शिकायतकर्ताओं ने लगाए दुर्व्यवहार के आरोप
ललितपुर। नेशनल मिशन सस्टेनेवल फार एग्रीकल्चर योजना में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है। बृहस्पतिवार को ग्राम खिरिया लटकनजू से आए ग्रामीणों के भ्रष्टाचार के मामले में बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। ऐसा इसलिए शिकायत कर्ताओं ने जांच अधिकारी पर ही दुर्व्यवहार के आरोप लगा दिए हैं। इससे जांच का मामला खटाई में पड़ गया है।
नेशनल मिशन सस्टेनेवल फार एग्रीकल्चर योजना के तहत भैस पालन में कृषकों को अनुदान दिया जाता है। इस मामले में ग्राम खिरिया लटकनजू में कृषकों का चयन किया गया था। इस दौरान अनुदान देने से पहले चयनित लाभार्थियों ने उगाही कर ली गई। इस मामले में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. शाक्य ने जांच की थी। इस दौरान उगाही के लगाए गए आरोप सही पाए गए थे, लेकिन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी है। बीते दिनों जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने इस मामले में नए सिरे से जांच सीडीओ को सौंप दी। आज शिकायतकर्ताओं के बयान की प्रक्रिया अपनाई गई। उस समय आरोपी अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। इससे शिकायतकर्ता असंतुष्ट दिखे। शिकायतकर्ताओं ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि बयान देने पहुंचे तो जांच अधिकारी ने बयान बदलने के लिए दबाव बनाया। इस दौरान बच्चों की कसम खाने व जेल भिजवाने के लिए कहा गया। उनसे बार-बार एक कर्मचारी का नाम जोड़ने के लिए कहा जा रहा था। उन्होंने 17 मई को मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा की गई जांच पर ही कार्रवाई करने की मांग की है। इससे एक बार फिर मामला जिलाधिकारी के पाले में आ गया है। शिकायतकर्ताओं में रामभरोसे मिश्रा, रूपनारायण पुरोहित, प्रभुदयाल पुरोहित, रामसेवक निरंजन, मथुरा प्रसाद निरंजन, नारायण निरंजन आदि शामिल रहे।
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ललितपुर। नेशनल मिशन सस्टेनेवल फार एग्रीकल्चर योजना में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है। बृहस्पतिवार को ग्राम खिरिया लटकनजू से आए ग्रामीणों के भ्रष्टाचार के मामले में बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। ऐसा इसलिए शिकायत कर्ताओं ने जांच अधिकारी पर ही दुर्व्यवहार के आरोप लगा दिए हैं। इससे जांच का मामला खटाई में पड़ गया है।
नेशनल मिशन सस्टेनेवल फार एग्रीकल्चर योजना के तहत भैस पालन में कृषकों को अनुदान दिया जाता है। इस मामले में ग्राम खिरिया लटकनजू में कृषकों का चयन किया गया था। इस दौरान अनुदान देने से पहले चयनित लाभार्थियों ने उगाही कर ली गई। इस मामले में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. शाक्य ने जांच की थी। इस दौरान उगाही के लगाए गए आरोप सही पाए गए थे, लेकिन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी है। बीते दिनों जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने इस मामले में नए सिरे से जांच सीडीओ को सौंप दी। आज शिकायतकर्ताओं के बयान की प्रक्रिया अपनाई गई। उस समय आरोपी अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। इससे शिकायतकर्ता असंतुष्ट दिखे। शिकायतकर्ताओं ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि बयान देने पहुंचे तो जांच अधिकारी ने बयान बदलने के लिए दबाव बनाया। इस दौरान बच्चों की कसम खाने व जेल भिजवाने के लिए कहा गया। उनसे बार-बार एक कर्मचारी का नाम जोड़ने के लिए कहा जा रहा था। उन्होंने 17 मई को मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा की गई जांच पर ही कार्रवाई करने की मांग की है। इससे एक बार फिर मामला जिलाधिकारी के पाले में आ गया है। शिकायतकर्ताओं में रामभरोसे मिश्रा, रूपनारायण पुरोहित, प्रभुदयाल पुरोहित, रामसेवक निरंजन, मथुरा प्रसाद निरंजन, नारायण निरंजन आदि शामिल रहे।
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