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अवैध कटान व खनन पर पर्दा डालना पड़ा महंगा
Updated Wed, 07 Nov 2018 02:13 AM IST
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बालू और लकड़ी माफिया बेखौफ कर रहे हैं खनन
अफसरों की आपसी खींचतान का उठा रहे हैं फायदा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। वन विभाग के अफसरों को आपसी खींचतान काफी महंगी पड़ गई। बालू माफिया ने इसका फायदा उठाते हुए तालबेहट वन क्षेत्र में जमकर खनन किया, वहीं लकड़ी माफिया भी सक्रिय रहे। जब इसकी सूचना शासन स्तर पर पहुंची तो कई अफसरों के लिए लापरवाही गले का फंदा बन गई।
74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगल में इमारती पत्थर, सेंड स्टोन, बालू व कीमती पेड़ भी हैं। इस पर माफिया की नजर हमेशा बना रहती है और वह मौके की तलाश में रहते हैं। जिले में कई महीनों से वन अफसरों में आपसी खींचतान चल रही थी। इसमें एक रेंजर ने तो अपने स्थानांतरण के लिए डीएफओ को पत्र भी लिख दिया था। इसके बाद भी उन्हें वहां से हटाया नहीं गया तो उन्होंने अपरोक्ष रूप से अपने ही अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पर्दे के पीछे उन्होंने इसकी शिकायत वरिष्ठ अफसरों से करना प्रारंभ कर दी। इस आपसी खींचतान में विभागीय कार्रवाई लगभग थम सी गई। महज दिखाने के लिए महीने में एक दो कार्रवाई की और शमन शुल्क वसूल कर अपनी पीठ थपथपा ली। लेकिन, इससे माफिया की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने बालू खनन व पेड़ों के कटान का सिलसिला जारी रखा। जब तालबेहट क्षेत्र का बालू खनन समाचार पत्रों की सुर्खियां बना तो शासन ने जांच बैठा दी। उन्होंने उरई डीएफओ के निर्देशन में गैरजनपद के स्टाफ के साथ मौके पर जांच करते हुए अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी। मुख्य वन संरक्षक जी नारायण मूर्ति जिले में अफसरों की आपसी खींचतान से नाराज थे। बीते दिनों एक वन कर्मी ने तालबेहट क्षेत्र में बालू खनन व पेड़ कटान की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कर दी थी। इन फोटो से क्षेत्र में चल रहे बालू खनन एवं पेड़ों के कटान की सच्चाई सामने आ गई। बिना किसी देर किए शासन ने जिले से वन अफसरों को हटा दिया।
यहां होता खनन
सूत्र बताते हैं कि तालबेहट वन क्षेत्र कड़ेसरा, वन ब्लाक पवा, सरखड़ी, सुनौरी, बिरधा, नत्थीखेड़ा, वनगुवां, पिपरई, खदरी में बालू खनन कारोबारी सक्रिय बने हैं। सबसे ज्यादा खनन वाह नाला में हो रहा है। झरर के पास सिद्दन टोरिया में भी खनन हो रहा है। यही नहीं, जगह-जगह बालू का भंडारण देखा जा सकता है।
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सागौन कटान भी रहा चर्चा में
मड़ावरा वन रेंज में सागौन के पेड़ों का कटान काफी चर्चा में रहा। यहां भी वन अफसरों को जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, माताटीला वन रेंज की विजरौठा वीट में जलाऊ लकड़ी पकड़ी गई। इसमें विभाग ने चालीस हजार रुपये का शमन शुल्क वसूला है।
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अफसरों की आपसी खींचतान का उठा रहे हैं फायदा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। वन विभाग के अफसरों को आपसी खींचतान काफी महंगी पड़ गई। बालू माफिया ने इसका फायदा उठाते हुए तालबेहट वन क्षेत्र में जमकर खनन किया, वहीं लकड़ी माफिया भी सक्रिय रहे। जब इसकी सूचना शासन स्तर पर पहुंची तो कई अफसरों के लिए लापरवाही गले का फंदा बन गई।
74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगल में इमारती पत्थर, सेंड स्टोन, बालू व कीमती पेड़ भी हैं। इस पर माफिया की नजर हमेशा बना रहती है और वह मौके की तलाश में रहते हैं। जिले में कई महीनों से वन अफसरों में आपसी खींचतान चल रही थी। इसमें एक रेंजर ने तो अपने स्थानांतरण के लिए डीएफओ को पत्र भी लिख दिया था। इसके बाद भी उन्हें वहां से हटाया नहीं गया तो उन्होंने अपरोक्ष रूप से अपने ही अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पर्दे के पीछे उन्होंने इसकी शिकायत वरिष्ठ अफसरों से करना प्रारंभ कर दी। इस आपसी खींचतान में विभागीय कार्रवाई लगभग थम सी गई। महज दिखाने के लिए महीने में एक दो कार्रवाई की और शमन शुल्क वसूल कर अपनी पीठ थपथपा ली। लेकिन, इससे माफिया की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने बालू खनन व पेड़ों के कटान का सिलसिला जारी रखा। जब तालबेहट क्षेत्र का बालू खनन समाचार पत्रों की सुर्खियां बना तो शासन ने जांच बैठा दी। उन्होंने उरई डीएफओ के निर्देशन में गैरजनपद के स्टाफ के साथ मौके पर जांच करते हुए अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी। मुख्य वन संरक्षक जी नारायण मूर्ति जिले में अफसरों की आपसी खींचतान से नाराज थे। बीते दिनों एक वन कर्मी ने तालबेहट क्षेत्र में बालू खनन व पेड़ कटान की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कर दी थी। इन फोटो से क्षेत्र में चल रहे बालू खनन एवं पेड़ों के कटान की सच्चाई सामने आ गई। बिना किसी देर किए शासन ने जिले से वन अफसरों को हटा दिया।
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यहां होता खनन
सूत्र बताते हैं कि तालबेहट वन क्षेत्र कड़ेसरा, वन ब्लाक पवा, सरखड़ी, सुनौरी, बिरधा, नत्थीखेड़ा, वनगुवां, पिपरई, खदरी में बालू खनन कारोबारी सक्रिय बने हैं। सबसे ज्यादा खनन वाह नाला में हो रहा है। झरर के पास सिद्दन टोरिया में भी खनन हो रहा है। यही नहीं, जगह-जगह बालू का भंडारण देखा जा सकता है।
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सागौन कटान भी रहा चर्चा में
मड़ावरा वन रेंज में सागौन के पेड़ों का कटान काफी चर्चा में रहा। यहां भी वन अफसरों को जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, माताटीला वन रेंज की विजरौठा वीट में जलाऊ लकड़ी पकड़ी गई। इसमें विभाग ने चालीस हजार रुपये का शमन शुल्क वसूला है।