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Lalitpur News: कागजों में नियंत्रण...जमीन पर खतरा

Sat, 25 Apr 2026 02:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Apr 2026 02:00 AM IST
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Control on paper... danger on the ground
रोस्टर के मुताबिक फागिंग का दावा, हकीकत में कई मोहल्ले छूटे
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नहर में सड़ रहा कचरा, गंदे पानी से भी जगह-जगह बढ़ रहे मच्छर
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। विश्व मलेरिया दिवस पर जहां कागजों में तीन साल से मलेरिया नियंत्रण का दावा किया जा रहा है, वहीं जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। शहर से लेकर गांव तक गंदगी, ठहरा पानी और नहरों में सड़ता कचरा मच्छरों के पनपने को बढ़ावा दे रहा है, जबकि फागिंग और दवा छिड़काव के दावे कई इलाकों में दम तोड़ते दिख रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 तक 15,587 लोगों की जांच में मलेरिया का एक भी मरीज नहीं मिला। बावजूद इसके, विभाग ने जिले में 39 हाई रिस्क क्षेत्र चिन्हित किए हैं। इन क्षेत्रों में नियमित फागिंग और दवा छिड़काव की जरूरत है, लेकिन पालिका प्रशासन की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं।
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हकीकत यह है कि शहर के बीच से गुजर रही नहर में कूड़ा और गंदा पानी सड़ रहा है, जिससे मच्छरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत जागरूकता तो चलाई जा रही है, लेकिन नहर और अन्य जलभराव वाले स्थानों पर लार्वा नष्ट करने के लिए न तो दवा का छिड़काव किया जा रहा है और न ही ब्लीचिंग डाली जा रही है।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि फागिंग का दावा तो रोस्टर के अनुसार किया जाता है, लेकिन कई मोहल्ले इससे वंचित रह जाते हैं। वहीं, वीआईपी कॉलोनियों में प्राथमिकता के आधार पर फागिंग कराए जाने की बात भी सामने आ रही है। शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी स्थिति को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।

ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्र
नगर पालिका क्षेत्र के गोविंदनगर, आजादपुरा, नेहरूनगर, सिविल लाइन, चांदमारी, घुसयाना, जेल चौराहा, रामनगर, नदीपुरा समेत कई मोहल्लों के साथ विभिन्न ब्लॉकों के 39 क्षेत्रों को हाई रिस्क जोन में शामिल किया गया है।


आंकड़ों में स्थिति
2018 से 2026 (31 मार्च तक) के आंकड़ों के अनुसार मलेरिया के मामलों में लगातार कमी आई है और पिछले तीन वर्षों में एक भी मरीज नहीं मिला, जबकि डेंगू के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

मलेरिया के लक्षण
सर्दी के साथ बुखार, सिरदर्द, उल्टी, पसीना आना, कमजोरी और खून की कमी।

बचाव के उपाय
पानी जमा न होने दें
टंकियों व बर्तनों को ढककर रखें
मच्छरदानी का उपयोग करें
आसपास साफ-सफाई बनाए रखें

लोगों की राय
शहर में मच्छरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। फागिंग और दवा छिड़काव की जरूरत है। - सुदीप साहू, सरांयपुरा

मलेरिया के मरीज भले न हों, लेकिन मच्छरों की बढ़ती संख्या खतरे का संकेत है। - अमित तिवारी, नई बस्ती

शहर में रोस्टर के अनुसार फागिंग और दवा छिड़काव कराया जा रहा है। -दिनेश कुमार विश्वकर्मा, अधिशासी अधिकारी

पिछले तीन वर्षों से मलेरिया के मरीज शून्य हैं। लगातार ऐसा रहा तो जिला मलेरिया मुक्त हो सकता है।- अनिल क्रिस्टोफर मैसी, जिला मलेरिया अधिकारी
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