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Lalitpur News: जंगल में बसे गांव में रहकर शिक्षा दे रहे शिक्षक
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मड़ावरा। प्रदेश की सीमा पर वनांचल में स्थित ग्राम लखंजर और बारई के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक सीमित संसाधनों के बावजूद सफल संचालन कर रहे हैं। जनपद के आकांक्षी विकासखंड के सीमांत ग्राम लखंजर के कंपोजिट विद्यालय में यशवेंद्र सिंह कार्यरत हैं। वहीं, बारई के प्राथमिक विद्यालय में मनीष यादव अपनी लगन और कर्मठता से स्कूल संचालित कर रहे हैं। ये शिक्षक विभिन्न कठिनाइयों के बीच शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।
बारई के शिक्षक मनीष यादव गांव में ही किराए पर रहकर सेवा दे रहे हैं। वह बताते हैं कि उनके गांव में बिजली मात्र दो घंटे मिलती है। मोबाइल नेटवर्क और स्वच्छ पेयजल की भी लगातार किल्लत बनी रहती है। ब्लॉक मुख्यालय से लगभग तीस किलोमीटर दूर स्थित विद्यालय तक पहुंचने के लिए जंगल के रास्ते से गुजरना खतरनाक होता है। इन अभावों के बावजूद उन्होंने गांव में रहकर ही विद्यालय संचालन का निर्णय लिया है। इस कार्य में ग्रामीणों का पर्याप्त सहयोग भी उन्हें प्राप्त हो रहा है। कंपोजिट विद्यालय लखंजर में कक्षा एक से आठवीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। यहां 68 छात्र संख्या है और विद्यालय एक शिक्षक तथा एक शिक्षामित्र के भरोसे चल रहा है। शिक्षक यशवेंद्र सिंह कुशल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
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संसाधनों का अभाव और चुनौतियां
ब्लॉक मुख्यालय मड़ावरा से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित लखंजर गांव तक पहुंचना एक दूभर कार्य है। धौरीसागर से लगभग 08 किलोमीटर लंबा जंगल से होकर गुजरने वाला कच्चा रास्ता काफी परेशानी भरा रहता है। इस रास्ते पर बाघ, लकड़बग्घे और जंगली सूकरों जैसे जानवरों का खतरा बना रहता है। गांव में स्वच्छ पेयजल, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। किसी स्कूली छात्र या व्यक्ति के बीमार होने पर प्राथमिक उपचार मिलना भी मुश्किल होता है।
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शिक्षकों का समर्पण और योगदान
शिक्षक यशवेंद्र सिंह सीमित संसाधनों में भी विद्यालय का कुशल संचालन कर रहे हैं। वह मध्याह्न भोजन योजना और निशुल्क गणवेश हेतु डीबीटी योजना जैसी सरकारी योजनाओं को लागू करते हैं। यूडाइस और प्रेरणा एप समेत विभिन्न सरकारी पोर्टलों पर विद्यालय संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, वह स्कूली छात्रों के शिक्षण में भी भरपूर योगदान देते हैं। मनीष यादव भी गांव की विषम परिस्थितियों में रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की अलख
ये शिक्षक प्रदेश के वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा के महत्व को दर्शाते हैं। उनकी लगन और कर्मठता अन्य शिक्षकों के लिए एक मिसाल पेश करती है। ग्रामीणों का सहयोग भी इन विद्यालयों के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सीमित संसाधनों के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का उनका प्रयास सराहनीय है। यह दिखाता है कि कैसे व्यक्तिगत समर्पण से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।
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विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा, संस्कार और कुशल मार्गदर्शन
ललितपुर। प्राथमिक विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जा रही है। शिक्षक शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए काफी मेहनत करते हैं। इसके परिणामस्वरूप गांव के विद्यार्थी अच्छे संस्थानों में प्रवेश पा रहे हैं। शिक्षक खराब मौसम की परवाह किए बिना ग्रामीण अंचलों के विद्यालयों में बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज और राजकीय इंटर कॉलेज के अध्यापकों ने बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा की जानकारी दी। फिलहाल जिले के सभी विद्यालयों में शिक्षक दिवस के कार्यक्रमों की तैयारियां चल रही हैं।
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फोटो-13
शासन ने प्राथमिक विद्यालयों के लिए 19 मानदंड निर्धारित किए हैं। इनमें पेयजल, शौचालय, एलईडी टीवी, पुस्तकालय और मध्याह्न भोजन जैसे बिंदु शामिल हैं। इन पर काम करते हुए बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है। खेल गतिविधियां भी कराई जाती हैं और सरकारी योजनाओं से लाभान्वित कराया जा रहा है।-मनोज कुमार शर्मा,प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय मैलवारा कलां
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फोटो-14
बच्चों को निपुण बनाने के लिए प्रकृति की गोद में रहकर शिक्षा दी जाती है। यहां समृद्ध पुस्तकालय और टीएलएम युक्त कक्षाएं हैं। विद्यालय से दो छात्रों का अटल आवासीय विद्यालय में चयन हुआ। एक छात्र नवोदय विद्यालय दैलवारा के लिए भी चुना गया।-दीपक यादव,प्रभारी प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय नयाबाग
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बारई के शिक्षक मनीष यादव गांव में ही किराए पर रहकर सेवा दे रहे हैं। वह बताते हैं कि उनके गांव में बिजली मात्र दो घंटे मिलती है। मोबाइल नेटवर्क और स्वच्छ पेयजल की भी लगातार किल्लत बनी रहती है। ब्लॉक मुख्यालय से लगभग तीस किलोमीटर दूर स्थित विद्यालय तक पहुंचने के लिए जंगल के रास्ते से गुजरना खतरनाक होता है। इन अभावों के बावजूद उन्होंने गांव में रहकर ही विद्यालय संचालन का निर्णय लिया है। इस कार्य में ग्रामीणों का पर्याप्त सहयोग भी उन्हें प्राप्त हो रहा है। कंपोजिट विद्यालय लखंजर में कक्षा एक से आठवीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। यहां 68 छात्र संख्या है और विद्यालय एक शिक्षक तथा एक शिक्षामित्र के भरोसे चल रहा है। शिक्षक यशवेंद्र सिंह कुशल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
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संसाधनों का अभाव और चुनौतियां
ब्लॉक मुख्यालय मड़ावरा से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित लखंजर गांव तक पहुंचना एक दूभर कार्य है। धौरीसागर से लगभग 08 किलोमीटर लंबा जंगल से होकर गुजरने वाला कच्चा रास्ता काफी परेशानी भरा रहता है। इस रास्ते पर बाघ, लकड़बग्घे और जंगली सूकरों जैसे जानवरों का खतरा बना रहता है। गांव में स्वच्छ पेयजल, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। किसी स्कूली छात्र या व्यक्ति के बीमार होने पर प्राथमिक उपचार मिलना भी मुश्किल होता है।
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शिक्षकों का समर्पण और योगदान
शिक्षक यशवेंद्र सिंह सीमित संसाधनों में भी विद्यालय का कुशल संचालन कर रहे हैं। वह मध्याह्न भोजन योजना और निशुल्क गणवेश हेतु डीबीटी योजना जैसी सरकारी योजनाओं को लागू करते हैं। यूडाइस और प्रेरणा एप समेत विभिन्न सरकारी पोर्टलों पर विद्यालय संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, वह स्कूली छात्रों के शिक्षण में भी भरपूर योगदान देते हैं। मनीष यादव भी गांव की विषम परिस्थितियों में रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की अलख
ये शिक्षक प्रदेश के वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा के महत्व को दर्शाते हैं। उनकी लगन और कर्मठता अन्य शिक्षकों के लिए एक मिसाल पेश करती है। ग्रामीणों का सहयोग भी इन विद्यालयों के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सीमित संसाधनों के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का उनका प्रयास सराहनीय है। यह दिखाता है कि कैसे व्यक्तिगत समर्पण से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।
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विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा, संस्कार और कुशल मार्गदर्शन
ललितपुर। प्राथमिक विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जा रही है। शिक्षक शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए काफी मेहनत करते हैं। इसके परिणामस्वरूप गांव के विद्यार्थी अच्छे संस्थानों में प्रवेश पा रहे हैं। शिक्षक खराब मौसम की परवाह किए बिना ग्रामीण अंचलों के विद्यालयों में बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज और राजकीय इंटर कॉलेज के अध्यापकों ने बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा की जानकारी दी। फिलहाल जिले के सभी विद्यालयों में शिक्षक दिवस के कार्यक्रमों की तैयारियां चल रही हैं।
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शासन ने प्राथमिक विद्यालयों के लिए 19 मानदंड निर्धारित किए हैं। इनमें पेयजल, शौचालय, एलईडी टीवी, पुस्तकालय और मध्याह्न भोजन जैसे बिंदु शामिल हैं। इन पर काम करते हुए बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है। खेल गतिविधियां भी कराई जाती हैं और सरकारी योजनाओं से लाभान्वित कराया जा रहा है।-मनोज कुमार शर्मा,प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय मैलवारा कलां
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बच्चों को निपुण बनाने के लिए प्रकृति की गोद में रहकर शिक्षा दी जाती है। यहां समृद्ध पुस्तकालय और टीएलएम युक्त कक्षाएं हैं। विद्यालय से दो छात्रों का अटल आवासीय विद्यालय में चयन हुआ। एक छात्र नवोदय विद्यालय दैलवारा के लिए भी चुना गया।-दीपक यादव,प्रभारी प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय नयाबाग
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