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बिजली सुधार को योजना पूरी, काम अधूरा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Mar 2017 12:39 AM IST
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bitut bibhag, lalitpur news
- फोटो : demo
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शहर में बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए 18 करोड़ रुपए की लागत से विद्युत ढांचा तैयार कर योजना पूरी हो चुकी है, जबकि काम अब भी अधूरा पड़ा है। विद्युत सब स्टेशनों पर आज भी उक्त योजना में लगाए कैपेसिटर बैंक, पैनल शोपीस बने हुए हैं और बंच केबल भी अधूरी रह गई है। जबकि कंपनी को योजना का भुगतान भी किया जा चुका है।
शहरी क्षेत्र का बिजली ढांचा सुधारने और बिजली चोरी रोकने व बेहतर बिजली आपूर्ति के लिए आरएपीडीआर योजना के तहत विभिन्न फीडरों के अंतर्गत करीब 105 किलोमीटर बंच केबल बिछाने, 100 केवीए क्षमता के 95 विद्युत ट्रांसफार्मर ओवरलोड वाले स्थानों पर रखवाए जाने, नझाई बाजार, गल्ला मंडी व बाईपास विद्युत सब स्टेशनों पर विद्युत के फ्लक्चुअेशन को रोकने और हाइटेंशन लाइनों में कहीं भी फाल्ट पर ट्रांसफार्मर से बिजली बंद करने के लिए ट्रांसफार्मर पैनल स्थापित करने संबंधी विद्युत उपकरण स्थापित कराए गए। सब स्टेशनों पर सीटीपीटी, लाइनिंग अरेस्टर जैसे आधुनिक उपकरण भी लगाए गए।
वहीं, ओवरलोड होने या शटडाउन लेने पर ट्रांसफार्मर से बिजली बंद नहीं कर सीधे ब्रेकर पैनल से ही बिजली बंद करनी हो सकती है। वहीं, कैपेसिटर बैंक से वोल्टेज कम या अधिक होने पर कंट्रोल किया जा सकता है। इसके साथ ही 11 केवी हाइटेंशन लाइनों में फाल्ट की सूचना के लिए इंडीकेटर युक्त पैनल भी स्थापित किया गया है। यह सब कीमती उपकरण व विद्युत ढांचा उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन द्वारा शहर में 18 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कर खड़ा किया गया है।
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उक्त योजना का कार्य नोएडा की पावर टेक कंपनी द्वारा कराया गया है। कंपनी द्वारा शहर में विद्युत सुधार की उक्त योजना तो पूरी कर भुगतान भी प्राप्त कर लिया गया है, लेकिन उक्त योजना के अंतर्गत बहुत सा काम अब भी अधूरा पड़ा हुआ है। शहर में करीब 105 किलोमीटर की बंच केबल बिछाई गई, लेकिन कई स्थानों पर यह बंच केबल अब भी अनउपयोगी साबित हो रही है। गल्ला मंडी से पूर्व नहर के पास और इलाइट से आगे ऑफीसर्स कालौनी के पास बिछाई गई बंच केबल अब तक चार्ज नहीं हो सकी है, जिसके चलते बंच केबल खंभों के सहारे लटक रही है। सब स्टेशनों के यार्ड में वोल्टेज फ्लक्चुअेशन को रोकने के लिए कैपेसिटर बैंक तो स्थापित कराए गए हैं, लेकिन यह अब तक चार्ज नहीं होकर मात्र शोपीस बनकर रह गए हैं। वहीं सब स्टेशनों पर स्थापित कैपेसिटर पैनल व ट्रांसफार्मर पैनल भी शोपीस बने हुए हैं।
कार्पोरेशन द्वारा शहर में करोड़ों की लागत से स्थापित किए गए कीमती विद्युत उपकरण का विभाग में कोई उपयोग नहीं लिया जा रहा है। जैसे पूर्व में व्यवस्था का संचालन हो रहा था, वैसे आज भी उक्त उपकरणों का मात्र ढांचा ही तैयार किया जाकर मात्र शोपीस बना हुआ है। जो बिजली आपूर्ति में किसी भी प्रकार से सहायक नहीं है। कंपनी द्वारा उक्त करोड़ों के उपकरण विभाग के हैंडओवर कर योजना को पूरा दर्शा कर भुगतान भी लिया जा चुका है।
दर्जनों ट्रांसफार्मर बने शोपीस
आरएपीडीआरपी योजना के तहत करीब चार दर्जन से अधिक ट्रांसफार्मर कंपनी द्वारा चार्ज तो कर दिए गए, लेकिन यह ट्रांसफार्मर ऐसे स्थानों पर स्थापित कराए गए हैं, जिन पर लोड काफी कम है या फिर मात्र एक दर्जन कनेक्शन ही मुश्किल से हैं। ऐसे में यह ट्रांसफार्मर भी अनउपयोगी साबित हो रहे हैं, जबकि शहर में ही कई स्थान ऐसे में जहां ओवरलोड होने के चलते वहां अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की आवश्यकता आज भी है। गर्मियों के दिनों में यह ट्रांसफार्मर ऐसे स्थानों पर काफी उपयोगी साबित हो सकते थे।
आरएपीडीआरपी योजना का कार्य पूर्ण हो चुका है, अब आगे कार्य नहीं होगा। जो भी विद्युत ढांचा तैयार किया गया है, वह शीघ्र ही चार्ज किया जाएगा और कंपनी से मेंटीनेंस का कार्य कराया जाएगा।
-गौरव कुमार, अधिशासी अभियंता विद्युत।
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शहरी क्षेत्र का बिजली ढांचा सुधारने और बिजली चोरी रोकने व बेहतर बिजली आपूर्ति के लिए आरएपीडीआर योजना के तहत विभिन्न फीडरों के अंतर्गत करीब 105 किलोमीटर बंच केबल बिछाने, 100 केवीए क्षमता के 95 विद्युत ट्रांसफार्मर ओवरलोड वाले स्थानों पर रखवाए जाने, नझाई बाजार, गल्ला मंडी व बाईपास विद्युत सब स्टेशनों पर विद्युत के फ्लक्चुअेशन को रोकने और हाइटेंशन लाइनों में कहीं भी फाल्ट पर ट्रांसफार्मर से बिजली बंद करने के लिए ट्रांसफार्मर पैनल स्थापित करने संबंधी विद्युत उपकरण स्थापित कराए गए। सब स्टेशनों पर सीटीपीटी, लाइनिंग अरेस्टर जैसे आधुनिक उपकरण भी लगाए गए।
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वहीं, ओवरलोड होने या शटडाउन लेने पर ट्रांसफार्मर से बिजली बंद नहीं कर सीधे ब्रेकर पैनल से ही बिजली बंद करनी हो सकती है। वहीं, कैपेसिटर बैंक से वोल्टेज कम या अधिक होने पर कंट्रोल किया जा सकता है। इसके साथ ही 11 केवी हाइटेंशन लाइनों में फाल्ट की सूचना के लिए इंडीकेटर युक्त पैनल भी स्थापित किया गया है। यह सब कीमती उपकरण व विद्युत ढांचा उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन द्वारा शहर में 18 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कर खड़ा किया गया है।
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उक्त योजना का कार्य नोएडा की पावर टेक कंपनी द्वारा कराया गया है। कंपनी द्वारा शहर में विद्युत सुधार की उक्त योजना तो पूरी कर भुगतान भी प्राप्त कर लिया गया है, लेकिन उक्त योजना के अंतर्गत बहुत सा काम अब भी अधूरा पड़ा हुआ है। शहर में करीब 105 किलोमीटर की बंच केबल बिछाई गई, लेकिन कई स्थानों पर यह बंच केबल अब भी अनउपयोगी साबित हो रही है। गल्ला मंडी से पूर्व नहर के पास और इलाइट से आगे ऑफीसर्स कालौनी के पास बिछाई गई बंच केबल अब तक चार्ज नहीं हो सकी है, जिसके चलते बंच केबल खंभों के सहारे लटक रही है। सब स्टेशनों के यार्ड में वोल्टेज फ्लक्चुअेशन को रोकने के लिए कैपेसिटर बैंक तो स्थापित कराए गए हैं, लेकिन यह अब तक चार्ज नहीं होकर मात्र शोपीस बनकर रह गए हैं। वहीं सब स्टेशनों पर स्थापित कैपेसिटर पैनल व ट्रांसफार्मर पैनल भी शोपीस बने हुए हैं।
कार्पोरेशन द्वारा शहर में करोड़ों की लागत से स्थापित किए गए कीमती विद्युत उपकरण का विभाग में कोई उपयोग नहीं लिया जा रहा है। जैसे पूर्व में व्यवस्था का संचालन हो रहा था, वैसे आज भी उक्त उपकरणों का मात्र ढांचा ही तैयार किया जाकर मात्र शोपीस बना हुआ है। जो बिजली आपूर्ति में किसी भी प्रकार से सहायक नहीं है। कंपनी द्वारा उक्त करोड़ों के उपकरण विभाग के हैंडओवर कर योजना को पूरा दर्शा कर भुगतान भी लिया जा चुका है।
दर्जनों ट्रांसफार्मर बने शोपीस
आरएपीडीआरपी योजना के तहत करीब चार दर्जन से अधिक ट्रांसफार्मर कंपनी द्वारा चार्ज तो कर दिए गए, लेकिन यह ट्रांसफार्मर ऐसे स्थानों पर स्थापित कराए गए हैं, जिन पर लोड काफी कम है या फिर मात्र एक दर्जन कनेक्शन ही मुश्किल से हैं। ऐसे में यह ट्रांसफार्मर भी अनउपयोगी साबित हो रहे हैं, जबकि शहर में ही कई स्थान ऐसे में जहां ओवरलोड होने के चलते वहां अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की आवश्यकता आज भी है। गर्मियों के दिनों में यह ट्रांसफार्मर ऐसे स्थानों पर काफी उपयोगी साबित हो सकते थे।
आरएपीडीआरपी योजना का कार्य पूर्ण हो चुका है, अब आगे कार्य नहीं होगा। जो भी विद्युत ढांचा तैयार किया गया है, वह शीघ्र ही चार्ज किया जाएगा और कंपनी से मेंटीनेंस का कार्य कराया जाएगा।
-गौरव कुमार, अधिशासी अभियंता विद्युत।