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चेकडैम निर्माण की गड़बड़ी में घिरे चार बीएसए

Mon, 25 Jun 2018 12:55 AM IST
amarujala
amarujala Updated Mon, 25 Jun 2018 12:55 AM IST
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chekdem nirman me ghire 4 bsa
dam, lalitpur news - फोटो : demo
वित्तीय वर्ष 2012-13 में भूमि संरक्षण विभाग द्वारा निर्मित किए चेकडैम निर्माण की गड़बड़ी में चार बीएसए (भूमि संरक्षण अधिकारी) मुश्किल में आ गए हैं। टीएसी (टेक्निकल आडिट कमेटी) ने इनके निर्माण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई हैं। हालांकि, इसके बाद बैठाई गई जांच में गठित कमेटी ने लीपापोती का प्रयास किया है। लेकिन टीएसी अपनी जांच पर कायम है। इससे अफसरों को राहत नहीं मिल पा रही है।
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भूमि संरक्षण विभाग विभिन्न योजनाएं संचालित कर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने, कटाव को रोकने सहित जल संचयन का काम करता है। वित्तीय वर्ष 2012-13 में शासन की ओर से 60 हजार दलहन नाम से योजना संचालित की। इसमें ललितपुर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर सात चेकडैमों का निर्माण किया गया। इसी तरह महरौनी क्षेत्र में भी चेकडैम बनाए गए। इस दौरान इनके निर्माण में बड़े पैमाने में गड़बड़ियां की गई। इसकी हकीकत उस सामने आ गई जब टीएसी ने इसकी जांच की। जांच कमेटी ने उस दौरान के अफसरों पर रिकवरी की सिफारिश की। इससे भूमि संरक्षण अफसरों में खलबली मच गई। उन्होंने कार्रवाई से बचने के लिए हाथ पैर मारने शुरू कर दिए। इसका परिणाम यह हुआ कि शासन ने एक और जांच कमेटी बना दी। इसने टीएसी की जांच को झुठलाने का प्रयास किया। लेकिन टीएसी आज भी अपने रुख कायम है। इससे उन अफसरों की मुश्किलें कम होती दिखाई नहीं दे रही हैं।
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उधर, लघु सिंचाई विभाग द्वारा वर्ष 2014 में कराए गए सर्वे में 118 चेकडैम क्षतिग्रस्त पाए गए थे। इसके बाद इस तरह का कोई सर्वे नहीं हुआ। यदि वर्तमान में चेकडैमों का सत्यापन करा लिया जाए तो क्षतिग्रस्त चेकडैमों की संख्या दोगुनी से ज्यादा निकलकर आएगी। कमोवेश यही स्थिति भूमि संरक्षण विभाग के चेकडैमों की है। हालांकि इस मामले में विभागीय अफसर मौन बने हुए हैं। इस संबंध में लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मृत्युंजय कुमार का कहना है कि क्षतिग्रस्त चेकडैमों की मरम्मत के लिए धनराशि अवमुक्त नहीं होती है। इससे चिह्नित चेकडैमों की मरम्मत नहीं कराई जा सकी है।
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टीएसी ने की थी जांच  
पूर्व के वर्षों में बनाए गए चेकडैमों की जांच टीएसी ने की थी। उस दौरान जिले में कई बीएसए (भूमि संरक्षण अधिकारी) तैनात रहे। जिसका मामला अभी चल रहा है।
- डा. रामऔतार, भूमि संरक्षण अधिकारी
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