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न्यायिक कस्टडी में लिए गए भाजपा विधायक
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ललितपुर में आचार संहिता उल्लंघन मामले जमानत मिलने के बाद न्यायालय से बाहर आते सदर विधायक रामरतन ?
- फोटो : LALITPUR
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न्यायिक कस्टडी में लिए गए भाजपा विधायक
ललितपुर। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी के रूप में आचार संहिता का उल्लंघन करने के एक मामले में सदर विधायक रामरतन कुशवाहा के खिलाफ वारंट जारी होने पर वह न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए। उन्हें अपर सत्र/ विशेष न्यायाधीश (एमएलए/एमपी) उमेश कुमार सिरोही की अदालत में दो घंटे न्यायिक कस्टडी में रहना पड़ा। बाद में न्यायाधीश ने जमानत दे दी। शहर कोतवाली अंतर्गत मो. अफजल ने तहरीर देकर बताया था कि छह फरवरी 2017 को भाजपा प्रत्याशी रामरतन कुशवाहा द्वारा नामांकन के लिए जाते समय उनके साथ सैकड़ों की संख्या में समर्थकों व पदाधिकारी जुलूस के रूप में चल रहे थे। मुख्य मार्ग पर भीड़ के साथ नारों सहित जुलूस निकाला गया, जबकि धारा 144 और निर्वाचन की आचार संहिता प्रभावी है। रिटर्निंग ऑफीसर निर्वाचन क्षेत्र ललितपुर का आदेश व जुलूस की सीडी भी साथ में लगी है। इस पर कोतवाली पुलिस ने रामरतन कुशवाहा के खिलाफ धारा 188 व 171 एफ के तहत मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पत्रावली प्रस्तुत की।
न्यायालय ने 10 अक्तूबर 2019 को सदर विधायक रामरतन कुशवाहा को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए वारंट जारी किए। बृहस्पतिवार को विधायक रामरतन कुशवाहा न्यायालय में उपस्थित हुए, जहां न्यायालय द्वारा आरोप पर सुनवाई की गई। विधायक द्वारा उन पर लगाए आरोपों से इंकार किया। इसके बाद न्यायालय ने विधायक को जमानत दे दी और पत्रावली साक्ष्य के लिए इसी माह की 24 अक्तूबर की तारीख नियत की गई। विधायक रामरतन कुशवाहा ने बताया कि उस समय समाजवादी पार्टी की सरकार होने के कारण उनके जुलूस पर धारा 144 का उल्लंघन मानते हुए मुकदमा लिखाया गया था। सम्मन मिलने पर बृहस्पतिवार को वह न्यायालय में उपस्थित हुए और उन्हें न्यायालय से विधिवत जमानत मिल गई है। न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें लगभग दो घंटे तक जमानत से पहले न्यायिक कस्टडी में लिया गया था।
चेक बाउंस मामले में पूर्व विधायक को वारंट जारी
दो वर्ष पूर्व बैंक से चेक बाउंस होने के एक मामले में बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक फेरनलाल न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। इस पर बृहस्पतिवार को अपर सत्र/विशेष न्यायाधीश (एमएलए/एमपी) उमेश कुमार सिरोही की अदालत ने वारंट जारी किए हैं। अपर शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी ने बताया कि थाना नाराहट के ग्राम गौना निवासी रामकुमार सिंह ने न्यायालय में एक परिवाद दायर किया था, जिसमें बताया था कि क्षेत्र के पूर्व विधायक ने निजी आवश्यकता बताते हुए पचास हजार रुपये उधार मांगे, जिस पर उसने तीन जुलाई 2017 को फेरनलाल को नकद पचास हजार रुपये दिए। बदले में पूर्व विधायक ने उसे पीएनबी का 50 हजार रुपये का चेक अपने हस्ताक्षर करके जारी किया और आश्वासन दिया कि एक माह बाद चेक का भुगतान प्राप्त कर लेना। उसने विश्वास में आकर पचास हजार रुपये दे दिया। उक्त चेक उसने 14 जुलाई 2017 को सर्व यूपी ग्रामीण बैंक गौना में जमा किया। 26 जुलाई को उसे बताया गया कि बैंक खाते में पर्याप्त पैसा नहीं है। जब उसने पूर्व विधायक से बात की तो उन्होंने अगस्त 2017 के द्वितीय सप्ताह में चेक का भुगतान करने को कहा। चेक तीन मई 2017 को निर्गत किया गया था, तब चेक की वैधता तीन अगस्त 2017 तक होना बताया, लेकिन उन्होंने कोई संतोषजनक जबाब नहीं दिया। इस पर न्यायालय में परिवाद दायर किया। इस मामले में सम्मन जारी होने के बाद पूर्व विधायक ने न्यायालय में उपस्थित होकर आठ जुलाई 2019 को जमानत कराई, लेकिन न्यायालय द्वारा दी गई तारीख पर पूर्व विधायक न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। बृहस्पतिवार को न्यायालय ने पूर्व विधायक फेरनलाल के खिलाफ वारंट जारी कर 24 अक्तूबर 2019 की तारीख नियत कर दी है।
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पूर्व मंत्री के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी
वन अधिनियम के तहत एक मामले में अपर सत्र/विशेष न्यायाधीश (एमएलए/एमपी) उमेश कुमार सिरोही की अदालत ने वन अधिनियम की धारा 26 के अंतर्गत 15 मामलों में न्यायालय में उपस्थित नहीं होने पर पूर्व मंत्री पूरन सिंह बुंदेला के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए हैं और उक्त मामले में 24 अक्तूबर की तारीख नियत कर दी है।
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ललितपुर। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी के रूप में आचार संहिता का उल्लंघन करने के एक मामले में सदर विधायक रामरतन कुशवाहा के खिलाफ वारंट जारी होने पर वह न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए। उन्हें अपर सत्र/ विशेष न्यायाधीश (एमएलए/एमपी) उमेश कुमार सिरोही की अदालत में दो घंटे न्यायिक कस्टडी में रहना पड़ा। बाद में न्यायाधीश ने जमानत दे दी। शहर कोतवाली अंतर्गत मो. अफजल ने तहरीर देकर बताया था कि छह फरवरी 2017 को भाजपा प्रत्याशी रामरतन कुशवाहा द्वारा नामांकन के लिए जाते समय उनके साथ सैकड़ों की संख्या में समर्थकों व पदाधिकारी जुलूस के रूप में चल रहे थे। मुख्य मार्ग पर भीड़ के साथ नारों सहित जुलूस निकाला गया, जबकि धारा 144 और निर्वाचन की आचार संहिता प्रभावी है। रिटर्निंग ऑफीसर निर्वाचन क्षेत्र ललितपुर का आदेश व जुलूस की सीडी भी साथ में लगी है। इस पर कोतवाली पुलिस ने रामरतन कुशवाहा के खिलाफ धारा 188 व 171 एफ के तहत मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पत्रावली प्रस्तुत की।
न्यायालय ने 10 अक्तूबर 2019 को सदर विधायक रामरतन कुशवाहा को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए वारंट जारी किए। बृहस्पतिवार को विधायक रामरतन कुशवाहा न्यायालय में उपस्थित हुए, जहां न्यायालय द्वारा आरोप पर सुनवाई की गई। विधायक द्वारा उन पर लगाए आरोपों से इंकार किया। इसके बाद न्यायालय ने विधायक को जमानत दे दी और पत्रावली साक्ष्य के लिए इसी माह की 24 अक्तूबर की तारीख नियत की गई। विधायक रामरतन कुशवाहा ने बताया कि उस समय समाजवादी पार्टी की सरकार होने के कारण उनके जुलूस पर धारा 144 का उल्लंघन मानते हुए मुकदमा लिखाया गया था। सम्मन मिलने पर बृहस्पतिवार को वह न्यायालय में उपस्थित हुए और उन्हें न्यायालय से विधिवत जमानत मिल गई है। न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें लगभग दो घंटे तक जमानत से पहले न्यायिक कस्टडी में लिया गया था।
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चेक बाउंस मामले में पूर्व विधायक को वारंट जारी
दो वर्ष पूर्व बैंक से चेक बाउंस होने के एक मामले में बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक फेरनलाल न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। इस पर बृहस्पतिवार को अपर सत्र/विशेष न्यायाधीश (एमएलए/एमपी) उमेश कुमार सिरोही की अदालत ने वारंट जारी किए हैं। अपर शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी ने बताया कि थाना नाराहट के ग्राम गौना निवासी रामकुमार सिंह ने न्यायालय में एक परिवाद दायर किया था, जिसमें बताया था कि क्षेत्र के पूर्व विधायक ने निजी आवश्यकता बताते हुए पचास हजार रुपये उधार मांगे, जिस पर उसने तीन जुलाई 2017 को फेरनलाल को नकद पचास हजार रुपये दिए। बदले में पूर्व विधायक ने उसे पीएनबी का 50 हजार रुपये का चेक अपने हस्ताक्षर करके जारी किया और आश्वासन दिया कि एक माह बाद चेक का भुगतान प्राप्त कर लेना। उसने विश्वास में आकर पचास हजार रुपये दे दिया। उक्त चेक उसने 14 जुलाई 2017 को सर्व यूपी ग्रामीण बैंक गौना में जमा किया। 26 जुलाई को उसे बताया गया कि बैंक खाते में पर्याप्त पैसा नहीं है। जब उसने पूर्व विधायक से बात की तो उन्होंने अगस्त 2017 के द्वितीय सप्ताह में चेक का भुगतान करने को कहा। चेक तीन मई 2017 को निर्गत किया गया था, तब चेक की वैधता तीन अगस्त 2017 तक होना बताया, लेकिन उन्होंने कोई संतोषजनक जबाब नहीं दिया। इस पर न्यायालय में परिवाद दायर किया। इस मामले में सम्मन जारी होने के बाद पूर्व विधायक ने न्यायालय में उपस्थित होकर आठ जुलाई 2019 को जमानत कराई, लेकिन न्यायालय द्वारा दी गई तारीख पर पूर्व विधायक न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। बृहस्पतिवार को न्यायालय ने पूर्व विधायक फेरनलाल के खिलाफ वारंट जारी कर 24 अक्तूबर 2019 की तारीख नियत कर दी है।
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पूर्व मंत्री के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी
वन अधिनियम के तहत एक मामले में अपर सत्र/विशेष न्यायाधीश (एमएलए/एमपी) उमेश कुमार सिरोही की अदालत ने वन अधिनियम की धारा 26 के अंतर्गत 15 मामलों में न्यायालय में उपस्थित नहीं होने पर पूर्व मंत्री पूरन सिंह बुंदेला के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए हैं और उक्त मामले में 24 अक्तूबर की तारीख नियत कर दी है।