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Lalitpur News: चुनौतियों को पार कर बन गया बांधों का शहर, सिंचाई के लिए मिलने लगा पानी

Thu, 27 Feb 2025 12:37 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 27 Feb 2025 12:37 AM IST
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After overcoming the challenges it became a city of dams, water started becoming available for irrigation
संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। 51 साल में जनपद ने चुनौतियों को पार किया तो बांधों का शहर बन गया। इससे सिंचाई के लिए पानी मिलने लगा तो किसान भी समृद्ध बने। वहीं, गांवों में पेयजल संकट जल जीवन मिशन मिटा रहा है। जनपद की विकास यात्रा में आज भी बांधों की काफी अहमियत है। वर्तमान में जिले में कुल 14 बांध हैं।
विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की तलहटी में बसे अपने जनपद से बेतवा, जामनी, सजनाम, शहजाद, धसान, बंडई, औड़ी, सोन, उटारी, रोहिणी सहित अन्य नदियां गुजरतीं हैं। इसके बाद भी यहां किसानों को सिंचाई और पेयजल की समस्या से जूझना पड़ता था। सिंचाई और पेयजल के लिए कुओं, बाबड़ी, तालाबों, नदी पर निर्भर रहना पड़ता था। वर्ष 1952 में साइफन प्रणाली युक्त गोविंद सागर बांध, 1958 में माताटीला बांध और 1973 में जामनी बांध परियोजना की सौगात मिली। इसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में दिक्कत लोग सिंचाई के लिए नदी, कुओं, बाबड़ी और तालाबों पर निर्भर रहते थे। ऐसे में सूखा पड़ जाने पर इन जलस्रोतों के सूख जाने या पानी कम हो जाने से किसानों को भुखमरी तक की नौबत आ जाती थी। यहां लोगों के संघर्ष से 1974 में ललितपुर को जिला घोषित किया गया। 51 वर्षों में यहां पर 11 बांध परियोजनाएं निर्मित हुई। इन बांध परियाेजनाओं से संचालित होने वाली नहरों के जरिए किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने लगा। खेती किसानी करने वाले यहां के किसानों को इसका लाभ मिला और वह उन्नतशील बनने लगे। वर्तमान में जिले में बांधों की संख्या 14 हो चुकी है। जनपद में जल जीवन मिशन के तहत पानी पहुंचाए जाने का काम तेजी से किया जा रहा है। इसमें जिले के करीब 560 ग्रामों में से 440 ग्रामों तक हर घर जल नल से पानी पहुंचाया जाने लगा है।
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शहजाद स्प्रिंकलर परियोजना निर्माणाधीन, जाखलौन पंप कैनाल से मिली सहूलियत
वर्तमान में शहजाद बांध पर शहजाद स्प्रिंकलर परियोजना निर्माणाधीन है। बिजली लाइन के लिए वन विभाग से एनओसी का इंतजार है। जाखलौन क्षेत्र में बेतवा नदी पर जाखलौन पंप कैनाल निर्मित है। इससे सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है।
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जनपद में यह हैं बांध परियोजनाएं
गोविंद सागर बांध, शहजाद बांध, जामनी बांध, सजनाम बांध, रोहिणी बांध, उटारी बांध, राजघाट बांध, माताटीला बांध, कचनौंदा बांध, लोअर रोहिणी बांध, जमडार बांध, भावनी बांध, बंडई बांध और भौंरट बांध शामिल हैं। इसमें भौंरट बांध परियोजना निर्माणाधीन है। पिछड़े क्षेत्र बालाबेहट में सौंर नदी पर बालाबेहट बांध प्रस्तावित है। सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो बालाबेहट क्षेत्र में भी एक बांध निर्मित होने का काम शुरू हो जाएगा।
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जल जीवन मिशन की स्थिति
- 15 पेयजल परियोजनाएं
- 3218 किमी लंबी पाइप लाइन
- 560 ग्रामों की संख्या
- 170366 घरों में नल कनेक्शन
- 95255 लोगों को मिलेगा शुद्ध पेयजल
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सिंचाई के साधन
- नहरों की लंबाई - 900 किमी
- निजी नलकूप - 3120
- पक्के कूपों की संख्या- 35245
- कृषि योग्य भूमि 315000 हेक्टेयर
- सिचिंत भूमि 291000 हेक्टेयर
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फोटो-28
पूर्व में ललितपुर को प्रदेश में सबसे पिछड़े क्षेत्रों में माना जाता था। लेकिन 1974 में जिला बनने के बाद यहां पर विकास की योजनाएं संचालित होने लगी। कभी पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की समस्या झेलने वाले जनपद के लोगों को राहत मिलने लगी। पेयजल के लिए जल जीवन मिशन के जरिए गांवों में पानी पहुंचाया जाने लगा है।

-अक्षय त्रिपाठी, जिलाधिकारी
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फोटो-29
जिला बनने के बाद यहां पर सिंचाई और पेयजल के लिए बांध परियोजनाएं, जाखलौन पंप कैनाल परियोजनाएं निर्मित की गई। इन परियोजनाओं का लाभ यहां के किसानों को खेती किसानी करने में मिला। उनकी फसल को समय से पानी मिलने लगा और उनकी आमदनी बढ़ने लगी।
आशुतोष चौबे उर्फ अनुपम, अध्यक्ष, ग्राम प्रधान संघ
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