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अतिरिक्त आमदनी का जरिया बना महुआ फूल
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कारीटोरन/ललितपुर। इन दिनों महुआ का फूल ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन गया है। प्रत्येक व्यक्ति चार से पांच किलो महुआ का फूल इकट्ठा कर ले रहा है, जिसे वह बाजार में बेचकर घर की छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने में कामयाब हो रहा है। इस तरह महुआ फूलों ने लोगों के चेहरे पर खुशी बिखेर दी है।
महुआ के फूल का उपयोग विभिन्न बीमारियों में औषधि के रूप में में भी किया जाता है। इसके अलावा शराब बनाने में भी इसका उपयोग होता है। इस वजह से बाजार में महुआ के फूल की जबरदस्त मांग है। इन दिनों महुआ के पेड़ में फूल आने लगे हैं जो देर रात्रि से गिरना प्रारंभ हो जाते हैं और सुबह सात-आठ बजे तक गिरते रहते हैं। इन फूलों को इकट्ठा करने के लिए लोग रात-दिन एक कर रहे हैं। कई लोग पूरी रात इन फूलों की रखवाली करते हैं। सुबह होते ही लोग एकत्रित करके फूलों को डलिया में रखकर घर ले जाते हैं। इसके बाद इन्हें सुखाते हैं और फिर सूखे फूलों को बाजार में बेच देते हैं। ब्लॉक बार क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कारीटोरन में भी बड़ी संख्या में लोग इस काम में जुटे हैं, जो लोग कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण घर लौट आए हैं, उन्हें भी रोजगार मिल गया है। कई लोगों के लिए महुआ बिना लागत का मुनाफा का सौदा साबित हो रहा है। बाजार में 5200 से 5300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से महुआ का फूल बिक रहा है।
महुआ बीनने के लिए रात में ही पेड़ के नीचे डेरा जमाना पड़ता है, क्योंकि जानवर महुआ के फूूल खा जाते हैं। रोजाना करीब पांच, छह किलो फूल इकट्ठा हो जाते हैं। सूखे फूल के रेट अच्छे मिलते हैं, जबकि गीले फूल कम दाम में बिकते हैं।-मनीराम
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गांव में बहुत सारे पेड़ खेतों की मेड़ों पर खड़े हैं। कुछ पेड़ हमारे खेत में लगे हैं तो कुछ दूसरों के खेतों में खड़े हैं, जिनके फूल बंटाई से एकत्रित कर रहे हैं। प्रकाश विश्वकर्मा
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महुआ के फूल का उपयोग विभिन्न बीमारियों में औषधि के रूप में में भी किया जाता है। इसके अलावा शराब बनाने में भी इसका उपयोग होता है। इस वजह से बाजार में महुआ के फूल की जबरदस्त मांग है। इन दिनों महुआ के पेड़ में फूल आने लगे हैं जो देर रात्रि से गिरना प्रारंभ हो जाते हैं और सुबह सात-आठ बजे तक गिरते रहते हैं। इन फूलों को इकट्ठा करने के लिए लोग रात-दिन एक कर रहे हैं। कई लोग पूरी रात इन फूलों की रखवाली करते हैं। सुबह होते ही लोग एकत्रित करके फूलों को डलिया में रखकर घर ले जाते हैं। इसके बाद इन्हें सुखाते हैं और फिर सूखे फूलों को बाजार में बेच देते हैं। ब्लॉक बार क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कारीटोरन में भी बड़ी संख्या में लोग इस काम में जुटे हैं, जो लोग कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण घर लौट आए हैं, उन्हें भी रोजगार मिल गया है। कई लोगों के लिए महुआ बिना लागत का मुनाफा का सौदा साबित हो रहा है। बाजार में 5200 से 5300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से महुआ का फूल बिक रहा है।
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महुआ बीनने के लिए रात में ही पेड़ के नीचे डेरा जमाना पड़ता है, क्योंकि जानवर महुआ के फूूल खा जाते हैं। रोजाना करीब पांच, छह किलो फूल इकट्ठा हो जाते हैं। सूखे फूल के रेट अच्छे मिलते हैं, जबकि गीले फूल कम दाम में बिकते हैं।-मनीराम
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गांव में बहुत सारे पेड़ खेतों की मेड़ों पर खड़े हैं। कुछ पेड़ हमारे खेत में लगे हैं तो कुछ दूसरों के खेतों में खड़े हैं, जिनके फूल बंटाई से एकत्रित कर रहे हैं। प्रकाश विश्वकर्मा