फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   किसानों को नहीं भा रही औषधि खेती

किसानों को नहीं भा रही औषधि खेती

Tue, 03 Jul 2018 09:48 AM IST
Updated Tue, 03 Jul 2018 09:48 AM IST
विज्ञापन
किसानों को नहीं भा रही औषधि खेती
किसानों को नहीं भा रही औषधि खेती
विज्ञापन

अनुदान के बाद भी किसान नहीं ले रहे दिलचस्पी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। उद्यान विभाग की औषधीय पौध मिशन योजना में अनुदान होने के बाद भी किसान इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। इस योजना की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बाजार की कमी होना है। वहीं, किसान उड़द, मूंग, मक्का सरीखी खेती को छोड़कर औषधि खेती में हाथ आजमाने के लिए खुद को अभी तक तैयार नहीं कर पाया है। इससे जिले में औषधि खेती की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है।
बुंदेलखंड में किसानों की माली हालत ठीक नहीं है। जिसे सुधारने के लिए तमाम अनुदानित योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिनमें औद्यानिक विकास योजना व औषधीय पौध मिशन योजना शामिल है। जहां बुंदेलखंड एवं विंध्य क्षेत्र में औद्यानिक विकास योजना में नीबू, आम, अमरूद, अनार एवं आंवला के पौधों का रोपण किया जाता है। इस योजना में खरीफ सीजन के दौरान डेढ़ सौ हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण का लक्ष्य प्रस्तावित है। इसमें एक से ढाई एकड़ में बाग लगाया जाता है। शर्त यह है कि किसान के पास सिंचाई का साधन व तार फेंसिंग की सुविधा होना चाहिए। योजनांतर्गत एक एकड़ में 110 पौधे रोपित किए जाते हैं। जिस पर 1200 रुपये प्रति माह प्रोत्साहन राशि लाभार्थी को दी जाती है। इसी तरह औषधीय पौध मिशन योजना है। इसमें ऐलोवेरा, तुलसी, अश्वगंधा, सर्पगंधा की खेती की जाती है। अश्वगंधा, तुलसी की खेती पर 30 प्रतिशत तो सर्पगंधा की खेती पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इस योजना में अभी तक एक दर्जन आवेदन ही आए हैं जबकि औद्यानिक विकास योजना में आधा सैकड़ा आवेदन प्राप्त हुए हैं। इससे इन योजनाओं में किसानों की दिलचस्पी का अंदाजा लगाया जा सकता है। तमाम किसानों को तो इन योजनाओं की ठीक से जानकारी भी नहीं हैं। जिससे इन योजनाओं की सार्थकता सामने नहीं आ पा रही है।
विज्ञापन

---
फोटो 69
कैप्सन- हरगोविंद
सूखे खेतों में डाल दिए दाने
ग्राम में बारिश अभी फसल की बुवाई के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके बाद भी उड़द, मक्का व सोयाबीन के दाने यूं ही सूखे खेतों में डाल दिए हैं। अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। उम्मीद है कि एक दो दिन में पानी बरसेगा तो दाने उग आएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

हरगोविंद, ग्राम पटौरा
......
फोटो 70
कैप्सन- मगनलाल
खरीफ फसल बारिश पर ही निर्भर
खरीफ सीजन की फसल पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहती है। यदि बारिश अच्छी हो जाती है तो मुनाफे की खेती हो जाती है लेकिन अगर बारिश कम या अत्यधिक बारिश हो जाए तो किसान का तो मरना ही है। बारिश की आश में खेतों में बुवाई कर दी है।
मगनलाल
.....
फोटो 71
कैप्सन-देवेंद्र सिंह
योजनाओं की नहीं जानकारी
उद्यान विभाग की ओर से संचालित औषधीय पौध मिशन योजना की जानकारी नहीं है। जिससे इनका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। वर्तमान में उड़द व मूंग की बुवाई कर चुके हैं। अब उद्यान विभाग में स्प्रिंकलर सेट योजना की जानकारी लेने आए हैं।
देवेंद्र सिंह, ग्राम मड़ावरा
.....
फोटो 72
कैप्सन-हरगोविंद सिंह
उड़द व मक्का की बोई फसल
खरीफ सीजन में करीब पंद्रह एकड़ में उड़द व मक्का की बुवाई कर दी है। लेकिन बुवाई बाद से पानी नहीं बरसा है। जिससे फसल सूखने की चिंता सताने लगी है। यदि एक सप्ताह और पानी नहीं बरसा तो दोबारा बुवाई करनी पड़ेगी।

हरगोविंद सिंह, ग्राम बगौनी
.....
औषधि खेती के लिए तैयार नहीं होते किसान
औषधि खेती पर अनुदान का प्राविधान किया गया है। इसके बाद भी किसान इसकी खेती के लिए आसानी से तैयार नहीं होते हैं। इसकी प्रमुख वजह बाजार की कमी है। किसानों को चौपाल, गोष्ठियों के माध्यम से औषधि खेती के बारे में बताया जा रहा है।
सुघर सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed