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प्रशिक्षु लेखपालों पर लटकी सेवा समाप्ति की तलवार
Updated Mon, 16 Jul 2018 03:28 AM IST
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प्रशिक्षुु लेखपालों पर लटकी सेवा समाप्त की तलवार
ललितपुर। प्रदेश स्तर पर आठ मांगों को लेकर किए जा लेेखपाल संघ के आंदोलन से प्रशिक्षु लेखपालों पर सेवा समाप्त की तलवार लटक रही है। प्रशासन द्वारा हड़ताल में शामिल 45 प्रशिक्षु लेखपालों को बर्खास्तगी का नोटिस जारी किया गया है, तो वहीं, 19 लेखपाल निलंबित कर दिए गए हैं। ऐसे में यदि प्रशिक्षुु लेखपाल काम पर नहीं लौटते है तो शासन-प्रशासन द्वारा उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। कार्रवाई से इतर लेखपाल संघ के पदाधिकारियों ने मांगों पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ का आठ मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से जारी आंदोलन अब शासन-प्रशासन बीच टकराव में बदलता जा रहा है। आंदोलन खत्म कराने को लेकर जहां शासन जिला प्रशासन की मदद से हड़ताल में शामिल लेखपालों पर कार्रवाई कराकर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है, वहीं लेखपालों का संगठन भी इस लड़ाई में और भी मजबूती के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। शासन के निर्देश पर जिला में अब तक जिला व तहसील स्तर पर कार्यकारिणी में 19 लेखपाल पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं अब इस आंदोलन में शामिल 45 प्रशिक्षु लेेखपालों को बर्खास्तगी का नोटिस भी जारी कर दिया गया है, यदि वह सोमवार तक काम पर वापस नहीं लौटते हैं, तो जिला प्रशासन द्वारा उनकी सेवा समाप्त करने की चेतावनी दी गई है। सोमवार को भी यदि आंदोलन जारी रहता है। साथ ही शासन स्तर पर भी वार्ता नहीं सफल नहीं होती है तो कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। इसमें सबसे अधिक खतरा प्रशिक्षु लेखपालों को ही उठाना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में इन प्रशिक्षुओं को हड़ताल में आगे शामिल होने पर विचार चल रहा है, तो कुछ तो आंदोलन के अंत तक लेखपाल संघ के साथ खड़े होने का मन बना चुके हैं। वहीं लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि उनका संगठन किसी कार्रवाई के दबाव में आकर अपना आंदोलन वापस नहीं लेगा। उनके आंदोलन में बर्खास्तगी का नोटिस जारी होने के बाद भी सभी प्रशिक्षु व अन्य सभी लेखपाल उनके साथ हड़ताल में शामिल रहेंगे।
आम लोग हो रहे प्रभावित
लेखपालों की हड़ताल से पूरे जिले में राजस्व, पैमाईश और हदबंदी जैसे कार्य पूरी तरह से प्रभावित चल रहे हैं। इसमें सबसे अधिक परेशानी स्कूली विद्यार्थियों को प्रवेश के दौरान हो रही है। उन्हें आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसीलों के चक्कर तो काटने पड़ रहे हैं, लेकिन लेखपालों की हड़ताल की वजह से उन्हें मायूसी ही हाथ लग रही है। इसके साथ ही शासन द्वारा लागू की गईं, तमाम किसान संबंधी योजनाएं, दैवी आपदा, बाढ़ राहत कार्य, जन हानि, भूमि राजस्व के अलावा आईजीआरएस प्रणाली के तहत प्रार्थना पत्रों का निस्तारण आदि कार्य पूरी तरह से प्रभावित हैं। यदि हड़ताल लंबी चलती है तो आम लोगों व किसानों को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ जाएगी और इससे शासन प्रशासन की भी काफी मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
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आज होगी बातचीत
प्रशिक्षु लेखपालों से सोमवार को वार्ता होनी है। यदि वह वार्ता के बाद भी आंदोलन छोड़कर वापस नहीं काम पर नहीं लौटते हैं, तो उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी। अभी तक जिले में 45 प्रशिक्षु लेखपालों को बर्खास्तगी के नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जबकि 19 लेखपाल निलंबित कर दिए गए हैं।
योगेंद्र बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी।
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ललितपुर। प्रदेश स्तर पर आठ मांगों को लेकर किए जा लेेखपाल संघ के आंदोलन से प्रशिक्षु लेखपालों पर सेवा समाप्त की तलवार लटक रही है। प्रशासन द्वारा हड़ताल में शामिल 45 प्रशिक्षु लेखपालों को बर्खास्तगी का नोटिस जारी किया गया है, तो वहीं, 19 लेखपाल निलंबित कर दिए गए हैं। ऐसे में यदि प्रशिक्षुु लेखपाल काम पर नहीं लौटते है तो शासन-प्रशासन द्वारा उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। कार्रवाई से इतर लेखपाल संघ के पदाधिकारियों ने मांगों पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ का आठ मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से जारी आंदोलन अब शासन-प्रशासन बीच टकराव में बदलता जा रहा है। आंदोलन खत्म कराने को लेकर जहां शासन जिला प्रशासन की मदद से हड़ताल में शामिल लेखपालों पर कार्रवाई कराकर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है, वहीं लेखपालों का संगठन भी इस लड़ाई में और भी मजबूती के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। शासन के निर्देश पर जिला में अब तक जिला व तहसील स्तर पर कार्यकारिणी में 19 लेखपाल पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं अब इस आंदोलन में शामिल 45 प्रशिक्षु लेेखपालों को बर्खास्तगी का नोटिस भी जारी कर दिया गया है, यदि वह सोमवार तक काम पर वापस नहीं लौटते हैं, तो जिला प्रशासन द्वारा उनकी सेवा समाप्त करने की चेतावनी दी गई है। सोमवार को भी यदि आंदोलन जारी रहता है। साथ ही शासन स्तर पर भी वार्ता नहीं सफल नहीं होती है तो कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। इसमें सबसे अधिक खतरा प्रशिक्षु लेखपालों को ही उठाना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में इन प्रशिक्षुओं को हड़ताल में आगे शामिल होने पर विचार चल रहा है, तो कुछ तो आंदोलन के अंत तक लेखपाल संघ के साथ खड़े होने का मन बना चुके हैं। वहीं लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि उनका संगठन किसी कार्रवाई के दबाव में आकर अपना आंदोलन वापस नहीं लेगा। उनके आंदोलन में बर्खास्तगी का नोटिस जारी होने के बाद भी सभी प्रशिक्षु व अन्य सभी लेखपाल उनके साथ हड़ताल में शामिल रहेंगे।
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आम लोग हो रहे प्रभावित
लेखपालों की हड़ताल से पूरे जिले में राजस्व, पैमाईश और हदबंदी जैसे कार्य पूरी तरह से प्रभावित चल रहे हैं। इसमें सबसे अधिक परेशानी स्कूली विद्यार्थियों को प्रवेश के दौरान हो रही है। उन्हें आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसीलों के चक्कर तो काटने पड़ रहे हैं, लेकिन लेखपालों की हड़ताल की वजह से उन्हें मायूसी ही हाथ लग रही है। इसके साथ ही शासन द्वारा लागू की गईं, तमाम किसान संबंधी योजनाएं, दैवी आपदा, बाढ़ राहत कार्य, जन हानि, भूमि राजस्व के अलावा आईजीआरएस प्रणाली के तहत प्रार्थना पत्रों का निस्तारण आदि कार्य पूरी तरह से प्रभावित हैं। यदि हड़ताल लंबी चलती है तो आम लोगों व किसानों को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ जाएगी और इससे शासन प्रशासन की भी काफी मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
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आज होगी बातचीत
प्रशिक्षु लेखपालों से सोमवार को वार्ता होनी है। यदि वह वार्ता के बाद भी आंदोलन छोड़कर वापस नहीं काम पर नहीं लौटते हैं, तो उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी। अभी तक जिले में 45 प्रशिक्षु लेखपालों को बर्खास्तगी के नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जबकि 19 लेखपाल निलंबित कर दिए गए हैं।
योगेंद्र बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी।