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आजादी के पहले हई थी पीएन स्कूल की स्थापना
Updated Wed, 08 Nov 2017 02:07 AM IST
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जनसेवा के लिए दान कर दी थी निजी भूमि
ललितपुर। आज के दौर में जहां जनप्रतिनिधियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के साथ ही आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की तोहमत लग रही है, वहीं आजादी के पहले ललितपुर के एक ऐसे नगरपालिका अध्यक्ष हुए हैं जिन्होंने स्कूल के निर्माण के लिए जमीन न मिलने पर अपनी निजी भूमि सरकार को विद्यालय को दान में दे दी। 1942 से 1947 तक की अवधि में अध्यक्ष रहे पुरुषोत्तम नारायण चौबे के इस योगदान को आज भी ललितपुर में याद किया जाता है।
देश की आजादी के पहले भी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिए मारामारी होती थी। उस समय शहर में इकलौता गवर्नमेंट स्कूल हुआ करता था। एक बार इस स्कूल में प्रवेश की समस्या इतनी विकट हो गई कि लोग इसके समाधान के लिए नगर पालिका के चेयरमैन पुरुषोत्तम नारायण चौबे के पास पहुंच गए। उन्होंने बिना किसी देर किए स्कूल खोलने के लिए अपनी भूमि दान कर दी। जब वर्ष 1944 में इस स्कूल की स्थापना हुई तो इसका नाम पुरुषोत्तम नारायण उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रखा गया। इस संस्था में अब इंटरमीडिएट तक की शिक्षा प्रदान की जा रही है।
शिक्षा के मामले में शुरुआत से ही जिला पिछड़ा रहा है। वर्ष 1889 में गवर्नमेंट स्कूल की स्थापना हुई थी। शहर के इकलौते स्कूल पर प्रवेश का दबाव बना रहता था। इस समस्या से निपटने के लिए म्यूंसिपल बोर्ड ने प्राइमरी स्कूल शुरू किया, लेकिन इससे ऊपर की शिक्षा पाने के लिए समस्या जस की तस बनी रही। वर्ष 1942 तक ऐसा ही चलता रहा। बारह दिसंबर 1942 को पुरुषोत्तम नारायण चौबे ने नगर पालिका का चेयरमैन पद संभाला। वह वर्ष 1947 तक नगर पालिका के चेयरमैन बने रहे। वर्ष 1943 में गवर्नमेंट स्कूल में बच्चों का प्रवेश होना मुश्किल हो गया। नगरवासी चेयरमैन के पास इस समस्या को लेकर पहुंच गए। लोगों ने कहा कि बच्चों के प्रवेश नहीं हो पा रहे हैं, शहर में कोई नया स्कूल खुलवाने का प्रयास करें। इस पर उन्होंने भूमि दान कर स्कूल की कक्षाएं शुरू करा दी।
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वर्ष 1944 में हाईस्कूल की मान्यता मिली। इस दौरान स्कूल की कमान बहीदउल्ला सिद्दीकी ने संभाली। नगर पालिका बोर्ड ने चेयरमैन पुरुषोत्तम नारायण चौबे के नाम से प्रस्ताव पारित कर दिया। वर्ष 1949 में गवर्नमेंट स्कूल की जगह राजकीय इंटर कालेज अस्तित्व में आया। उसके पहले प्रधानाचार्य आरएस श्रीवास्तव बने। इससे शहर में माध्यमिक शिक्षा आसान हो गई। उधर, पीएन इंटर कालेज के प्रभारी प्रधानाचार्य रामस्वरूप नामदेव का कहना है कि वर्ष 1997 में विद्यालय को इंटमीडिएट तक की मान्यता प्रदान हो चुकी है। इसकी वित्त विहीन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। वहीं, स्कूल के रिटायर खेल अध्यापक साबिर अली का कहना है कि इस स्कूल से दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना, डा. परशुराम विरही ने शिक्षा ग्रहण की है। जम्मू कश्मीर के एडीशनल डीजीपी होकर सेवानिवृत्त हुए सैयद सोयेब अली कालेज में खेल शिक्षक रहे। चेयरमैन पुरुषोत्तम नारायण चौबे का बड़ा सम्मान था। उस समय के अंग्रेज एसडीएम उनके सामने हेड से टोपी उतार देते थे। पूर्व चेयरमैन के शिक्षा में दिए योगदान को शहरवासी कभी भुला नहीं पाएंगे।
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ललितपुर। आज के दौर में जहां जनप्रतिनिधियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के साथ ही आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की तोहमत लग रही है, वहीं आजादी के पहले ललितपुर के एक ऐसे नगरपालिका अध्यक्ष हुए हैं जिन्होंने स्कूल के निर्माण के लिए जमीन न मिलने पर अपनी निजी भूमि सरकार को विद्यालय को दान में दे दी। 1942 से 1947 तक की अवधि में अध्यक्ष रहे पुरुषोत्तम नारायण चौबे के इस योगदान को आज भी ललितपुर में याद किया जाता है।
देश की आजादी के पहले भी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिए मारामारी होती थी। उस समय शहर में इकलौता गवर्नमेंट स्कूल हुआ करता था। एक बार इस स्कूल में प्रवेश की समस्या इतनी विकट हो गई कि लोग इसके समाधान के लिए नगर पालिका के चेयरमैन पुरुषोत्तम नारायण चौबे के पास पहुंच गए। उन्होंने बिना किसी देर किए स्कूल खोलने के लिए अपनी भूमि दान कर दी। जब वर्ष 1944 में इस स्कूल की स्थापना हुई तो इसका नाम पुरुषोत्तम नारायण उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रखा गया। इस संस्था में अब इंटरमीडिएट तक की शिक्षा प्रदान की जा रही है।
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शिक्षा के मामले में शुरुआत से ही जिला पिछड़ा रहा है। वर्ष 1889 में गवर्नमेंट स्कूल की स्थापना हुई थी। शहर के इकलौते स्कूल पर प्रवेश का दबाव बना रहता था। इस समस्या से निपटने के लिए म्यूंसिपल बोर्ड ने प्राइमरी स्कूल शुरू किया, लेकिन इससे ऊपर की शिक्षा पाने के लिए समस्या जस की तस बनी रही। वर्ष 1942 तक ऐसा ही चलता रहा। बारह दिसंबर 1942 को पुरुषोत्तम नारायण चौबे ने नगर पालिका का चेयरमैन पद संभाला। वह वर्ष 1947 तक नगर पालिका के चेयरमैन बने रहे। वर्ष 1943 में गवर्नमेंट स्कूल में बच्चों का प्रवेश होना मुश्किल हो गया। नगरवासी चेयरमैन के पास इस समस्या को लेकर पहुंच गए। लोगों ने कहा कि बच्चों के प्रवेश नहीं हो पा रहे हैं, शहर में कोई नया स्कूल खुलवाने का प्रयास करें। इस पर उन्होंने भूमि दान कर स्कूल की कक्षाएं शुरू करा दी।
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वर्ष 1944 में हाईस्कूल की मान्यता मिली। इस दौरान स्कूल की कमान बहीदउल्ला सिद्दीकी ने संभाली। नगर पालिका बोर्ड ने चेयरमैन पुरुषोत्तम नारायण चौबे के नाम से प्रस्ताव पारित कर दिया। वर्ष 1949 में गवर्नमेंट स्कूल की जगह राजकीय इंटर कालेज अस्तित्व में आया। उसके पहले प्रधानाचार्य आरएस श्रीवास्तव बने। इससे शहर में माध्यमिक शिक्षा आसान हो गई। उधर, पीएन इंटर कालेज के प्रभारी प्रधानाचार्य रामस्वरूप नामदेव का कहना है कि वर्ष 1997 में विद्यालय को इंटमीडिएट तक की मान्यता प्रदान हो चुकी है। इसकी वित्त विहीन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। वहीं, स्कूल के रिटायर खेल अध्यापक साबिर अली का कहना है कि इस स्कूल से दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना, डा. परशुराम विरही ने शिक्षा ग्रहण की है। जम्मू कश्मीर के एडीशनल डीजीपी होकर सेवानिवृत्त हुए सैयद सोयेब अली कालेज में खेल शिक्षक रहे। चेयरमैन पुरुषोत्तम नारायण चौबे का बड़ा सम्मान था। उस समय के अंग्रेज एसडीएम उनके सामने हेड से टोपी उतार देते थे। पूर्व चेयरमैन के शिक्षा में दिए योगदान को शहरवासी कभी भुला नहीं पाएंगे।