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जिला अस्पताल में इलाज कराना है तो घंटों का समय निकाल कर आएं
Updated Sun, 14 Oct 2018 03:44 AM IST
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जिला अस्पताल में इलाज कराना है तो समय निकाल कर आएं
ओपीडी के बाहर घंटों चिकित्सक के इंतजार में बैठे रहते हैं मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिला चिकित्सालय की ओपीडी में चिकित्सकों के बैठने में सुधार नहीं आ रहा है। इसका खामियाजा मरीजों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है। मरीजों को चिकित्सक के इंतजार में घंटों ओपीडी के बाहर बैठना पड़ता है। ऐसा ही हाल शनिवार को देखने को मिला। जहां सुबह साढ़े दस बजे तक सात से अधिक चिकित्सकों की ओपीडी कक्ष खाली रहे।
जिले मुख्यालय पर एक मात्र सहारा जिला चिकित्सालय ही है। जहां पर एक रुपये में ही सभी मर्ज का उपचार किया जाता है। जिससे सुबह से ही अस्पताल में मरीजों की लाइनें लग जाती है। लेकिन चिकित्सकों की मनमाने रवैया के कारण आने वाले मरीजों को बेवजह परेशान होना पड़ रहा है। चिकित्सालय में मरीजों को देखने का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक निर्धारित है। लेकिन सामान्यत: ओपीडी में कक्ष में सुबह के समय कुछ ही चिकित्सक बैठते हैं। शनिवार को सुबह साढे़ दस बजे अमर उजाला की टीम ने जिला चिकित्सालय में मरीजों के इलाज की हकीकत जानी। इसमें अस्पताल में अधिकांश ओपीडी सूनी रहीं। इनमें डा. डीके राज सर्जन के ओपीडी का चेंबर बंद था। इसी तरह ईएनटी डा. राकेश दत्त का चेंबर खुला होने पर मरीज उनका इंतजार कर रहे थे। वरिष्ठ फिजीशियन डा. पवन सूद के चेंबर का ताला लगा होने पर भी करीब एक दर्जन इलाज शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। एक अन्य फिजीशियन डॉ. आरपी सिंह का चेंबर खाली था। वहीं, वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अमित चतुर्वेदी व डा. मुकेश सेठ, डॉ. एलबी गुप्ता ने ओपीडी में मरीजों का उपचार करते नजर आए। दंत चिकित्सक डॉ. मनीष माथुर की ओपीडी सूनी रही। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष का चेंबर खाली था। नाक कान गला विभाग के चिकित्सक अनुपम मिश्रा के चेंबर का दरवाजा बंद था। यहां आए कई मरीज दरवाजा बंद देख काफी इंतजार के बाद घर लौट गए।
एक वर्ष बाद नहीं सुधरी बायोमेट्रिक
शासन ने चिकित्सकों व कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक कार्यालयों में लगवाई है। इसी क्रम में जिला चिकित्सालय में बायोमेट्रिक मशीन लगवाई गई है, जो लगभग एक वर्ष बीतने के बाद भी खराब पड़ी है। चिकित्सकों व कर्मचारियों की उपस्थिति सामान्य रजिस्टर में कराई जा रही है। इसका कुछ अधिकारी व कर्मचारी अनुचित फायदा उठा रहे हैं। मनमाने समय पर कुछ चिकित्सक व कर्मचारी रजिस्टर में हाजिरी लगा रहे हैं।
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निजी प्रैक्टिस भी हो सकता कारण
मरीजों का आरोप है कि जिला संयुक्त चिकित्सालय में तैनात कुछ चिकित्सक अधिकांश समय निजी प्रैक्टिस में देते हैं। इसके कारण वह अस्पताल में ओपीडी के समय पर भी ध्यान नहीं दे पाते हैं। समय पर नहीं आते हैं। कितने भी लेट आएं लेकिन ओपीडी समय से छोड़ देते हैं।
सुबह चिकित्सक ड्यूटी आते ही अस्पताल में भर्ती मरीजों का इलाज करते हैं। इसके बाद अपनी अपनी ओपीडी में बैठ जाते हैं। वर्तमान में अधिक मरीज भर्ती हैं। अस्पताल में मरीज ज्यादा हैं। जिस वजह से चिकित्सकों को समय ज्यादा देना पड़ता है। शीघ्र ही बायोमेट्रिक मशील लगाई जा र्री है।
डा. एसके बासवानी, सीएमएस, जिला अस्पताल ललितपुर
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ओपीडी के बाहर घंटों चिकित्सक के इंतजार में बैठे रहते हैं मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिला चिकित्सालय की ओपीडी में चिकित्सकों के बैठने में सुधार नहीं आ रहा है। इसका खामियाजा मरीजों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है। मरीजों को चिकित्सक के इंतजार में घंटों ओपीडी के बाहर बैठना पड़ता है। ऐसा ही हाल शनिवार को देखने को मिला। जहां सुबह साढ़े दस बजे तक सात से अधिक चिकित्सकों की ओपीडी कक्ष खाली रहे।
जिले मुख्यालय पर एक मात्र सहारा जिला चिकित्सालय ही है। जहां पर एक रुपये में ही सभी मर्ज का उपचार किया जाता है। जिससे सुबह से ही अस्पताल में मरीजों की लाइनें लग जाती है। लेकिन चिकित्सकों की मनमाने रवैया के कारण आने वाले मरीजों को बेवजह परेशान होना पड़ रहा है। चिकित्सालय में मरीजों को देखने का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक निर्धारित है। लेकिन सामान्यत: ओपीडी में कक्ष में सुबह के समय कुछ ही चिकित्सक बैठते हैं। शनिवार को सुबह साढे़ दस बजे अमर उजाला की टीम ने जिला चिकित्सालय में मरीजों के इलाज की हकीकत जानी। इसमें अस्पताल में अधिकांश ओपीडी सूनी रहीं। इनमें डा. डीके राज सर्जन के ओपीडी का चेंबर बंद था। इसी तरह ईएनटी डा. राकेश दत्त का चेंबर खुला होने पर मरीज उनका इंतजार कर रहे थे। वरिष्ठ फिजीशियन डा. पवन सूद के चेंबर का ताला लगा होने पर भी करीब एक दर्जन इलाज शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। एक अन्य फिजीशियन डॉ. आरपी सिंह का चेंबर खाली था। वहीं, वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अमित चतुर्वेदी व डा. मुकेश सेठ, डॉ. एलबी गुप्ता ने ओपीडी में मरीजों का उपचार करते नजर आए। दंत चिकित्सक डॉ. मनीष माथुर की ओपीडी सूनी रही। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष का चेंबर खाली था। नाक कान गला विभाग के चिकित्सक अनुपम मिश्रा के चेंबर का दरवाजा बंद था। यहां आए कई मरीज दरवाजा बंद देख काफी इंतजार के बाद घर लौट गए।
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एक वर्ष बाद नहीं सुधरी बायोमेट्रिक
शासन ने चिकित्सकों व कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक कार्यालयों में लगवाई है। इसी क्रम में जिला चिकित्सालय में बायोमेट्रिक मशीन लगवाई गई है, जो लगभग एक वर्ष बीतने के बाद भी खराब पड़ी है। चिकित्सकों व कर्मचारियों की उपस्थिति सामान्य रजिस्टर में कराई जा रही है। इसका कुछ अधिकारी व कर्मचारी अनुचित फायदा उठा रहे हैं। मनमाने समय पर कुछ चिकित्सक व कर्मचारी रजिस्टर में हाजिरी लगा रहे हैं।
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निजी प्रैक्टिस भी हो सकता कारण
मरीजों का आरोप है कि जिला संयुक्त चिकित्सालय में तैनात कुछ चिकित्सक अधिकांश समय निजी प्रैक्टिस में देते हैं। इसके कारण वह अस्पताल में ओपीडी के समय पर भी ध्यान नहीं दे पाते हैं। समय पर नहीं आते हैं। कितने भी लेट आएं लेकिन ओपीडी समय से छोड़ देते हैं।
सुबह चिकित्सक ड्यूटी आते ही अस्पताल में भर्ती मरीजों का इलाज करते हैं। इसके बाद अपनी अपनी ओपीडी में बैठ जाते हैं। वर्तमान में अधिक मरीज भर्ती हैं। अस्पताल में मरीज ज्यादा हैं। जिस वजह से चिकित्सकों को समय ज्यादा देना पड़ता है। शीघ्र ही बायोमेट्रिक मशील लगाई जा र्री है।
डा. एसके बासवानी, सीएमएस, जिला अस्पताल ललितपुर