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सिरसी की गढ़ी, मड़ावरा का किला को मिलेगी पहचान, होगा कायाकल्प
Updated Sun, 22 Jul 2018 01:32 AM IST
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सिरसी की गढ़ी, मड़ावरा का किला को मिलेगी पहचान
देवगढ़ के गुफा मंदिर व प्राचीन दुर्ग का परकोटा संरक्षित करेगा पुरातत्व विभाग
पुरातत्व की सूची में जोड़े गए मध्यकालीन और छठवीं, सातवीं शताब्दी के कई प्राचीन स्थल
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जनपद में ऐतिहासिक और पर्यटन महत्व के स्थलों की पुरातत्व विभाग ने अब सुध लेना शुरू कर दिया है। शासन ने जनपद में स्थित सिरसी की गढ़ी, मड़ावरा का किला समेत करीब आधा दर्जन से अधिक पुरा महत्व के इन स्थलों को पुरातत्व विभाग में शामिल करते हुए संरक्षण किया जाएगा। इन स्मारकों की देखरेख अब राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा की जाएगी। ऐसे में अब जनपद ललितपुर में पुरातत्व विभाग में शामिल ऐसे पुरा महत्व के इन नए स्थलों की संख्या और बढ़ जाएगी।
जनपद के पुरा महत्व के स्थलों के अस्तित्व को बचाने और उनके संरक्षण किए जाने के लिए पर्यटन से जुड़ी हस्तियां लंबे समय से अपने-अपने तरीके से लड़ाई लड़ रही हैं। कई संगठनों द्वारा भी ऐसे प्राचीन स्थलों के संरक्षण के लिए कई बार जिला स्तर के अधिकारियों से लेकर विधायक और मंत्रियों तक ज्ञापन आदि के माध्यम से आवाज उठाई जाती रही है। जिले में हर 10 से 15 किलोमीटर के क्षेत्र में पुरासंपदा व आकर्षक नक्काशीयुक्त किले, मंदिर, परकोटा, गुफाएं आदि प्राचीन संपदा युक्त स्थल जगह-जगह बिखरी पड़ी है, जो देखरेख में अभाव में अपना अस्तित्व खोती जा रही हैं। पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने बताया कि जनपद के आठ स्मारकों के संरक्षण का प्रस्ताव परामर्श दात्री समिति के अनुमोदन पर शासन को भेजा गया था, जिसे शासन द्वारा मंजूरी मिल गई है। अब राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा उक्त पर्यटन महत्व के स्थलों का संरक्षण किया जाएगा। इसके लिए क्षेत्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा उक्त स्थलों का निरीक्षण भी किया जा रहा है।
ये पुरा स्थल होंगे संरक्षित
परामर्शदात्री समिति के प्रस्ताव पर पुरातत्व विभाग द्वारा जिन पुरा संपदाओं को संरक्षण की नई सूची में शामिल किया गया है, उनमें विकासखंड जखौरा अंतर्गत ग्राम देवगढ़ स्थित मध्यकालीन प्राचीन दुर्ग का परकोटा, छठवीं-सातवीं शताब्दी के देवगढ़ के गुफा मंदिर (नव प्रकाशित बौद्घ मंदिर एवं हिंदू गुफाएं व रॉक-कट प्रतिमाएं), ग्राम थनवारा स्थित मध्यकालीन ऐतिहासिक महत्व की प्राचीन बावली, ग्राम सिरसी की गढ़ी, विकासखंड मड़ावरा अंतर्गत मध्यकालीन मड़ावरा का किला, महरौनी अंतर्गत बानपुर का किला, मड़ावरा अंतर्गत ग्राम नवागढ़ स्थित पाषाणकालीन चित्रित शैलाश्रय हैं। पुरातत्व अधिकारियों के अनुसार इन पुरा स्थलों पर जीर्णोद्वार समेत कई अन्य प्रकार से संरक्षण के लिए विकास कार्य कराएं जाएंगे और इन्हें पर्यटन की दृष्टि से उपयोगी भी बनाया जाएगा।
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अभी तक यह पुरा स्थल रहे संरक्षित
राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा जिन पुरा स्थलों का पूर्व से संरक्षण किया जा किया जा रहा है, उनमें ब्लॉक बार में नवग्रह मंदिर, लक्ष्मणगढ़ मंदिर पिपरई, प्राचीन सुम्मेरगढ़ मंदिर मादौन, प्राचीन मंदिर भौंता, रणछोर मंदिर धौजरी, बालाबेहट का किला, लागौन स्थित मंदिर व कुंड, सतगता स्थित प्रस्तर बावली, प्राचीन मंदिर मड़ ककरुआ, सीराने के प्राचीन मंदिर, सौंरई का किला, सौंरई स्थित दो गोंडवानी मंदिर, 11-12वीं शताब्दी ईश्वी के शिव मंदिर गुगरवारा, प्राचीन मंदिर टोड़ी, बार का प्राचीन मकबरा, पिपरई स्थित दो गोंडवानी मंदिर, बिजरौठा स्थित प्राचीन बैठक, प्राचीन दुर्गाजी का मंदिर धनगौल आदि राज्य पुरात्व विभाग के संरक्षण के अंतर्गत आते हैं।
यह स्मारक व मंदिर हटाए गए
पुरातत्व विभाग की संरक्षित सूची से जो मंदिर व स्मारक हटाए गए हैं, उनमें 18वीं शताब्दी के दिगंबर जैन मंदिर भदौरा, बालावेहट स्थित 17-18वीं शताब्दी का हटवारा मंदिर, 18वीं शताब्दी का राम मंदिर गिरार, 18वीं शताब्दी का रामजानकी मंदिर जखौरा और 18वीं शताब्दी का जैन मंदिर सोजना शामिल हैं। इन मंदिरों को पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षण का बाहर किया गया है।
संरक्षण में आए मंदिरों व स्मारकों में यह होंगे काम
पुरातत्व विभाग के संरक्षण में शामिल हुए मंदिरों, स्मारकों और किला आदि पुरासंपदाओं की नक्काशी के क्षरण को रोकने के उपाय किए जाएंगे। प्रदेश के दर्शनीय स्थलों के साथ इन स्थलों को मानचित्र में जोड़ा जाएगा। पर्यटन व दर्शनार्थियों को उपयुक्त स्थलों पर पट्टिकाएं लगाई जाएंगी। क्षेत्र के विकास के लिए प्रमुखता के साथ बजट मिलने पर मंदिरों व संपदाओं की सुरक्षा एवं संरक्षण का कार्य पुरातत्व विभाग द्वारा किया जाएगा।
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देवगढ़ के गुफा मंदिर व प्राचीन दुर्ग का परकोटा संरक्षित करेगा पुरातत्व विभाग
पुरातत्व की सूची में जोड़े गए मध्यकालीन और छठवीं, सातवीं शताब्दी के कई प्राचीन स्थल
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जनपद में ऐतिहासिक और पर्यटन महत्व के स्थलों की पुरातत्व विभाग ने अब सुध लेना शुरू कर दिया है। शासन ने जनपद में स्थित सिरसी की गढ़ी, मड़ावरा का किला समेत करीब आधा दर्जन से अधिक पुरा महत्व के इन स्थलों को पुरातत्व विभाग में शामिल करते हुए संरक्षण किया जाएगा। इन स्मारकों की देखरेख अब राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा की जाएगी। ऐसे में अब जनपद ललितपुर में पुरातत्व विभाग में शामिल ऐसे पुरा महत्व के इन नए स्थलों की संख्या और बढ़ जाएगी।
जनपद के पुरा महत्व के स्थलों के अस्तित्व को बचाने और उनके संरक्षण किए जाने के लिए पर्यटन से जुड़ी हस्तियां लंबे समय से अपने-अपने तरीके से लड़ाई लड़ रही हैं। कई संगठनों द्वारा भी ऐसे प्राचीन स्थलों के संरक्षण के लिए कई बार जिला स्तर के अधिकारियों से लेकर विधायक और मंत्रियों तक ज्ञापन आदि के माध्यम से आवाज उठाई जाती रही है। जिले में हर 10 से 15 किलोमीटर के क्षेत्र में पुरासंपदा व आकर्षक नक्काशीयुक्त किले, मंदिर, परकोटा, गुफाएं आदि प्राचीन संपदा युक्त स्थल जगह-जगह बिखरी पड़ी है, जो देखरेख में अभाव में अपना अस्तित्व खोती जा रही हैं। पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने बताया कि जनपद के आठ स्मारकों के संरक्षण का प्रस्ताव परामर्श दात्री समिति के अनुमोदन पर शासन को भेजा गया था, जिसे शासन द्वारा मंजूरी मिल गई है। अब राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा उक्त पर्यटन महत्व के स्थलों का संरक्षण किया जाएगा। इसके लिए क्षेत्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा उक्त स्थलों का निरीक्षण भी किया जा रहा है।
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ये पुरा स्थल होंगे संरक्षित
परामर्शदात्री समिति के प्रस्ताव पर पुरातत्व विभाग द्वारा जिन पुरा संपदाओं को संरक्षण की नई सूची में शामिल किया गया है, उनमें विकासखंड जखौरा अंतर्गत ग्राम देवगढ़ स्थित मध्यकालीन प्राचीन दुर्ग का परकोटा, छठवीं-सातवीं शताब्दी के देवगढ़ के गुफा मंदिर (नव प्रकाशित बौद्घ मंदिर एवं हिंदू गुफाएं व रॉक-कट प्रतिमाएं), ग्राम थनवारा स्थित मध्यकालीन ऐतिहासिक महत्व की प्राचीन बावली, ग्राम सिरसी की गढ़ी, विकासखंड मड़ावरा अंतर्गत मध्यकालीन मड़ावरा का किला, महरौनी अंतर्गत बानपुर का किला, मड़ावरा अंतर्गत ग्राम नवागढ़ स्थित पाषाणकालीन चित्रित शैलाश्रय हैं। पुरातत्व अधिकारियों के अनुसार इन पुरा स्थलों पर जीर्णोद्वार समेत कई अन्य प्रकार से संरक्षण के लिए विकास कार्य कराएं जाएंगे और इन्हें पर्यटन की दृष्टि से उपयोगी भी बनाया जाएगा।
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अभी तक यह पुरा स्थल रहे संरक्षित
राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा जिन पुरा स्थलों का पूर्व से संरक्षण किया जा किया जा रहा है, उनमें ब्लॉक बार में नवग्रह मंदिर, लक्ष्मणगढ़ मंदिर पिपरई, प्राचीन सुम्मेरगढ़ मंदिर मादौन, प्राचीन मंदिर भौंता, रणछोर मंदिर धौजरी, बालाबेहट का किला, लागौन स्थित मंदिर व कुंड, सतगता स्थित प्रस्तर बावली, प्राचीन मंदिर मड़ ककरुआ, सीराने के प्राचीन मंदिर, सौंरई का किला, सौंरई स्थित दो गोंडवानी मंदिर, 11-12वीं शताब्दी ईश्वी के शिव मंदिर गुगरवारा, प्राचीन मंदिर टोड़ी, बार का प्राचीन मकबरा, पिपरई स्थित दो गोंडवानी मंदिर, बिजरौठा स्थित प्राचीन बैठक, प्राचीन दुर्गाजी का मंदिर धनगौल आदि राज्य पुरात्व विभाग के संरक्षण के अंतर्गत आते हैं।
यह स्मारक व मंदिर हटाए गए
पुरातत्व विभाग की संरक्षित सूची से जो मंदिर व स्मारक हटाए गए हैं, उनमें 18वीं शताब्दी के दिगंबर जैन मंदिर भदौरा, बालावेहट स्थित 17-18वीं शताब्दी का हटवारा मंदिर, 18वीं शताब्दी का राम मंदिर गिरार, 18वीं शताब्दी का रामजानकी मंदिर जखौरा और 18वीं शताब्दी का जैन मंदिर सोजना शामिल हैं। इन मंदिरों को पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षण का बाहर किया गया है।
संरक्षण में आए मंदिरों व स्मारकों में यह होंगे काम
पुरातत्व विभाग के संरक्षण में शामिल हुए मंदिरों, स्मारकों और किला आदि पुरासंपदाओं की नक्काशी के क्षरण को रोकने के उपाय किए जाएंगे। प्रदेश के दर्शनीय स्थलों के साथ इन स्थलों को मानचित्र में जोड़ा जाएगा। पर्यटन व दर्शनार्थियों को उपयुक्त स्थलों पर पट्टिकाएं लगाई जाएंगी। क्षेत्र के विकास के लिए प्रमुखता के साथ बजट मिलने पर मंदिरों व संपदाओं की सुरक्षा एवं संरक्षण का कार्य पुरातत्व विभाग द्वारा किया जाएगा।