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शिक्षा: हर बार अगली क्लास, तो क्यों किए जा रहे करोड़ों रुपए बर्बाद

Wed, 31 Jan 2018 02:20 AM IST
Updated Wed, 31 Jan 2018 02:20 AM IST
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शिक्षा: हर बार अगली क्लास, तो क्यों किए जा रहे करोड़ों रुपए बर्बाद
परीक्षा मे हर बार पास, तो क्यों करोड़ों रुपए बर्बाद
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नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के तहत कक्षा 01 से 08वीं तक के बच्चों को बिना फेल किए ही हर बार अगली कक्षा में भेज दिया जाता है। इसके बावजूद हर वर्ष परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की अर्द्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षा के आयोजन के लिए सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपए व्यय करती है। हाल ही में प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों में वार्षिक परीक्षा आयोजित कराने के लिए 19 करोड़ रुपये का वजट जारी किया है। इसमें जनपद के लिए 24.46 लाख रुपये का बजट जारी किया गया है, यह बात अलग है यूपी बोर्ड परीक्षा संपन्न होने के बाद भी मार्च के माह में परीक्षा कराई जाएगी। विगत कुछ माह पूर्व भारत सरकार के केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस नीति में बदलाव लाने के लिए राज्य सरकारों से सुझाव मांगा है। इसमें कई राज्यों ने मंजूरी भी दी है। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा को स्तर जो दिन व दिन गिरता जा रहा है, उसके पीछे का सबसे बड़ा कारण भी लोग इसी नीति को मानते हैं। परीक्षा में फेल होने का डर नहीं होने बच्चों के मन में प्रतिस्पर्धा की भावना खत्म होती जा रही है,

सरकारी विद्यालयों के बच्चे हो रहे हैं पीछे
पहले के समय में सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों का शैक्षिक स्तर काफी अच्छा होता था, लेकिन यह धीरे-धीरे घटता जा रहा है। कक्षा 08 वी तक भले ही फेल करने का नियम नहीं है, लेकिन प्राईवेट स्कूलों में मूल्यांकन जरूर किया जाता है। सरकारी विद्यालयों में बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों की कार्यप्रणाली का भी मूल्यांकन नहीं हो पाता है। जो बच्चे पढ़ाई में मेहनत करते हैं, उन्हें भी समान श्रेणी में रख दिया जाता है।
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-डा. सूफिया
प्राचार्य/मनोविज्ञान प्रवक्ता, पहलवान गुरुदीन महिला महाविद्यालय।

प्रतिस्पर्धा की भावना से होता दिमाग का विकास
प्रतिस्पर्धा की भावना से बच्चों के दिमाग का विकास होता है। बच्चों के मन से किताबों व पढ़ाई का भय मिटाने के उद्देश्य से फेल नहीं करने वाली नीति को लागू किया गया था, लेकिन यह बात सही है कि प्राईवेट विद्यालय तो नहीं लेकिन परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर काफी गिरा है। इससे बच्चों के मन से प्रतिस्पर्धा की भावना खत्म होती जा रही है, इससे संपूर्ण व्यक्तित्व विकास भी नहीं हो पा रहा है। जबकि आज का युग ही प्रतिस्पर्धा का युग बन गया है।
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-डा. संजीव शर्मा
प्रोफेसर मनोविज्ञान, नेहरू महाविद्यालय।

दबकर रह जाती हैं प्रतिभाएं
सरकारी विद्यालयों में परीक्षा का मूल्यांकन नहीं होने के कारण कई प्रतिभाएं दबकर रह जाती हैं। इसके अलावा बच्चों का रिजल्ट नहीं आने से विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता का भी पता नहीं चल पाता है और शिक्षकों की कार्यप्रणाली का भी मूल्यांकन नहीं हो पाता है। इसके अलावा अभिभावक भी अपने जिम्मेदारियों से दूर होते जा रहे हैं।
- आकांक्षा दुबे
प्रो. मनोविज्ञान, पहलवान गुरुदीन महिला महाविद्यालय।

सकारात्मक है पर कुछ बदलाव की है जरूरत
बचपन से ही पढ़ाई के बोझ तले दब जाने से उनका शारीरिक व मानसिक विकास नहीं हो पाता है, इसलिए यह कानून सही बनाया गया है, जो सकारात्मक है। केवल इसमें कुछ बदलाव होने चाहिए जो परीक्षाएं होती है, उसमें बच्चों को फेल नहीं करें, लेकिन सबसे न्यूनतम शैक्षिक स्तर वाले बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाए।
-डा. सुधाकर उपाध्याय
प्रोफेसर हिंदी, नेहरु महाविद्यालय।

पांचवीं तक ही होनी चाहिए यह नीति लागू
यह नीति केवल कक्षा 01 से पांचवीं तक ही होनी चाहिए, ताकि कक्षा 05 तक बच्चों पर पढ़ाई का बोझ न हो। इसके बाद कक्षा 06 से परीक्षा का मूल्यांकन होना चाहिए, क्योंकि ऐसा होने से जैक प्लांवट हो जाएगा। जो बच्चे पढ़ाई में काफी कमजोर हैं, उनके लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा की अलग से सुविधा होनी चाहिए। ऐसा होने से कक्षा 09वीं में हाईस्कूल में फैल होने वाले बच्चों और पढ़ाई के डर से पढ़ना छोड़ देने वाले बच्चों की संख्या कम होगी।
- वीरेंद्र कुमार दुबे
जिला विद्यालय निरीक्षक, ललितपुर।

नीति में होगा बदलाव तभी सुधरेगी शैक्षिक व्यवस्था
सरकारी विद्यालयों की शैक्षिक व्यवस्था तो पटरी से उतरी जा रही है, इसके लिए नीति में बदलाव जरूर होना चाहिए। बच्चों में भी फेल होने का भय नहीं रहता है और शिक्षक भी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट जाता है। बच्चों के साथ-साथ विद्यालय के शैक्षिक स्तर का भी परिणाम सामने आता है।

- जेपी राजपूत
प्राचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान ललितपुर।

शासन की नीति का होगा अनुपालन
शासन जो भी नीति लागू करती है उसका अनुपालन कराया जाएगा। केंद्र व प्रदेश स्तर पर इस नीति में कुछ बदलाव करने की सुरसुराहट हो रही है। जो भी बदलाव होता है उसका अनुपालन कराया जाएगा।
- अंबरीष कुमार
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।
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