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Lalitpur News: तीन फीट की गली में चल रहा 25 बेड का चिकित्सालय
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। तीन फीट चौड़ी गली में खुला 25 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल मरीजों के काम नहीं आ रहा है। रास्ता बेहद संकरा होने से वाहन नहीं जा सकते, इसलिए मरीज भी वहां जाने से कतराते हैं।
तालबेहट तहसील मुख्यालय पर वर्ष 1987 में किराये के भवन में आयुर्वेदिक अस्पताल खोला गया था। तब से अब तक इस अस्पताल को अपना भवन नहीं मिला सका। निजी भवन न होने से अस्पताल का ठिकाना लगातार बदलता रहता है।
इन दिनों यह अस्पताल नगर पंचायत के वार्ड एक के मोहल्ला चौबयाना में चल रहा है। अधिकांश लोगों की इसकी जानकारी तक नहीं है। जानकारी हो भी जाती है तो पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कारण, अस्पताल जाने के लिए दो मार्ग हैं। दोनों मार्ग से अस्पताल की दूरी लगभग 100 मीटर है।
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दोनों मार्ग की चौड़ाई तीन से चार फीट है। अस्पताल तक चार पहिया वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। गली संकरी होने से दो पहिया वाहन से भी मरीजों को लेकर जाना मुश्किल हो रहा है। कई बार गंभीर मरीज सड़क के अभाव में बीच रास्ते से लौट जा रहे हैं।
जिम्मेदारों ने नहीं दिया ध्यान : किराये के भवन में अस्पताल चलाने के लिए विज्ञापन निकाला जाता है। मानक तय करते हुए भवन स्वामियों से आवेदन मांगे जाते हैं। अधिकारी इसकी जांच करते हैं। स्थलीय निरीक्षण भी करते हैं। अस्पताल तक पहुंचने के लिए रास्ता समेत अन्य सुविधाओं की जांच करते हैं। इसके बाद अस्पताल संचालित करने के लिए भवन लेते हैं। लेकिन, जिम्मेदारों ने मानकों को ताक पर रख संकरी गली में अस्पताल की स्वीकृति दे दी।
समस्याओं से जूझ रहा सबसे बड़ा आयुर्वेदिक अस्पताल : तालबेहट में संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल जिले का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां 25 बेड की सुविधा है, जबकि ललितपुर और महरौनी के आयुर्वेदिक अस्पताल में 15-15 बेड स्वीकृत हैं। मानक विहीन भवन होने से बेड तक ठीक से नहीं डल पा रहे हैं।
ये है स्टाफ : आयुर्वेदिक अस्पताल में चिकित्सक के दो पद स्वीकृत हैं, जिसके मुकाबले एक तैनात है। वहीं, एक फार्मासिस्ट, एक वार्ड बॉय व एक स्वीपर और एक नर्स तैनात है। ध
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ललितपुर। तीन फीट चौड़ी गली में खुला 25 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल मरीजों के काम नहीं आ रहा है। रास्ता बेहद संकरा होने से वाहन नहीं जा सकते, इसलिए मरीज भी वहां जाने से कतराते हैं।
तालबेहट तहसील मुख्यालय पर वर्ष 1987 में किराये के भवन में आयुर्वेदिक अस्पताल खोला गया था। तब से अब तक इस अस्पताल को अपना भवन नहीं मिला सका। निजी भवन न होने से अस्पताल का ठिकाना लगातार बदलता रहता है।
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इन दिनों यह अस्पताल नगर पंचायत के वार्ड एक के मोहल्ला चौबयाना में चल रहा है। अधिकांश लोगों की इसकी जानकारी तक नहीं है। जानकारी हो भी जाती है तो पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कारण, अस्पताल जाने के लिए दो मार्ग हैं। दोनों मार्ग से अस्पताल की दूरी लगभग 100 मीटर है।
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दोनों मार्ग की चौड़ाई तीन से चार फीट है। अस्पताल तक चार पहिया वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। गली संकरी होने से दो पहिया वाहन से भी मरीजों को लेकर जाना मुश्किल हो रहा है। कई बार गंभीर मरीज सड़क के अभाव में बीच रास्ते से लौट जा रहे हैं।
जिम्मेदारों ने नहीं दिया ध्यान : किराये के भवन में अस्पताल चलाने के लिए विज्ञापन निकाला जाता है। मानक तय करते हुए भवन स्वामियों से आवेदन मांगे जाते हैं। अधिकारी इसकी जांच करते हैं। स्थलीय निरीक्षण भी करते हैं। अस्पताल तक पहुंचने के लिए रास्ता समेत अन्य सुविधाओं की जांच करते हैं। इसके बाद अस्पताल संचालित करने के लिए भवन लेते हैं। लेकिन, जिम्मेदारों ने मानकों को ताक पर रख संकरी गली में अस्पताल की स्वीकृति दे दी।
समस्याओं से जूझ रहा सबसे बड़ा आयुर्वेदिक अस्पताल : तालबेहट में संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल जिले का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां 25 बेड की सुविधा है, जबकि ललितपुर और महरौनी के आयुर्वेदिक अस्पताल में 15-15 बेड स्वीकृत हैं। मानक विहीन भवन होने से बेड तक ठीक से नहीं डल पा रहे हैं।
ये है स्टाफ : आयुर्वेदिक अस्पताल में चिकित्सक के दो पद स्वीकृत हैं, जिसके मुकाबले एक तैनात है। वहीं, एक फार्मासिस्ट, एक वार्ड बॉय व एक स्वीपर और एक नर्स तैनात है। ध