{"_id":"5c1eabe5bdec2256d06c6702","slug":"21545513957-lalitpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रसायनों का निर्धारित मात्रा में छिड़काव से बचेंगी रबी की फसलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रसायनों का निर्धारित मात्रा में छिड़काव से बचेंगी रबी की फसलें
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रसायनों का निर्धारित मात्रा में छिड़काव से बचेंगी रबी की फसलें
फसलों का कीट, रोगों से बचाव को नियमित निगरानी जरूरी
कृषि विभाग ने किसानों को जारी किए बचाव के टिप्स
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। रबी की फसल को कीट, पतंगों या फिर रोगों से बचाव के लिए कृषि विभाग ने किसानों के लिए नियमित निगरानी के साथ ही जरूरी टिप्स भी जारी किए हैं और विभिन्न फसलों के अनुसार खरपतवारों के लिए दवाओं का छिड़काव की सलाह दी है।
रबी के मौसम में प्रमुख फसलों गेहूं, चना, मटर, राई/सरसों एवं आलू में लगने वाले कीट, रोग और खरपतवारों से बचाव के लिए कृषि विभाग ने किसानों निर्धारित दवाओं के छिड़काव की सलाह दी है। जिला कृृषि रक्षा अधिकारी गौरव यादव ने बताया कि गेहूं की फसल में संकरी पत्ती वाले खरपतवारों गेंहूंसा एवं जंगली जई के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत डब्ल.जी.33 ग्राम(2.5 यूनिट) मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग तीन सौ लीटर पानी में घोलकर प्रथम सिंचाई के बाद 25 से 30 दिन की अवस्था पर छिड़काव करना चाहिए। गेहूं में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए मेटसल्फ्यूरॉन मिथाइल बीस प्रतिशत डब्लू.पी. की बीस ग्राम मात्रा अथवा 2.4 डी सोडियम सॉल्ट 80 प्रतिशत डब्लू.पी.की 650 ग्राम से सात सौ ग्राम मात्रा को लगभग तीन सौ लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से फ्लैट फैन नोजल से प्रथम सिंचाई के बाद 25 से तीस दिन की अवस्था पर छिड़काव से बचाव किया जा सकता है। गेहूं में संकरी एवं चौड़ी पत्ती दोनों खरपतवारों के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 प्रतिशत और इसके साथ मेसल्फ्यूरॉन मिथाइल पांच प्रतिशत डब्लूजी की चालीस ग्राम (2.5 यूनिट) अथवा मेट्रीब्यूजिन सत्तर प्रतिशत डब्लूपी की 250 ग्राम से 300 ग्राम मात्रा को लगभग पांच सौ लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से फ्लैट फैन नोजल से प्रथम सिंचाई के बाद 25-30 दिन की अवस्था पर छिड़काव किया जा सकता है। वहीं राई/सरसों की फसल में मौसम के तापमान में गिरावट होने पर माहू कीट के प्रकोप होने की संभावना होती है। यदि कीट का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर पांच प्रतिशत से अधिक हो तो एजाडिरैक्टिन रसायन 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर रसायन या फिर डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी एक लीटर या इमिडाक्लोिप्रिड 17.8 प्रतिशत ईसी 250 से 300 एमएल तक रसायन को पांच सौ लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। वहीं आलू की फसल में अगेती/पछेती झुलसा रोग का प्रकोप होने पर पत्तियों पर भूरे एवं काले रंग के धब्बे बनतेक हैं और तीव्र प्रकोप होने पर संपूर्ण पौधा झुलस जाता है। रोग के प्रकोप की स्थिति में कापरऑक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लूपी 2.5 किग्राम या फिर मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी दो किग्रा के इन दोनों में से किसी एक रसायन को 600 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि चना, मटर, मसूर में फली भेदक व कटुवा कीट फलिया में छेद बनाकर दोनों को खाता रहता है और कटुआ कीट पौधों को काटता रहता है। इसके नियंत्रण के लिए क्यूनॉलफॉस 25 प्रतिशत ईसी या प्रोफेनोफॉस पचास प्रतिशत ईसी की 1.25 लीटर मात्रा को 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। इन रसायनों के निर्धारित मात्रा में घोल बनाकर छिड़काव करना रबी की फसलों के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होगा।
विज्ञापन
फसलों का कीट, रोगों से बचाव को नियमित निगरानी जरूरी
कृषि विभाग ने किसानों को जारी किए बचाव के टिप्स
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। रबी की फसल को कीट, पतंगों या फिर रोगों से बचाव के लिए कृषि विभाग ने किसानों के लिए नियमित निगरानी के साथ ही जरूरी टिप्स भी जारी किए हैं और विभिन्न फसलों के अनुसार खरपतवारों के लिए दवाओं का छिड़काव की सलाह दी है।
रबी के मौसम में प्रमुख फसलों गेहूं, चना, मटर, राई/सरसों एवं आलू में लगने वाले कीट, रोग और खरपतवारों से बचाव के लिए कृषि विभाग ने किसानों निर्धारित दवाओं के छिड़काव की सलाह दी है। जिला कृृषि रक्षा अधिकारी गौरव यादव ने बताया कि गेहूं की फसल में संकरी पत्ती वाले खरपतवारों गेंहूंसा एवं जंगली जई के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत डब्ल.जी.33 ग्राम(2.5 यूनिट) मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग तीन सौ लीटर पानी में घोलकर प्रथम सिंचाई के बाद 25 से 30 दिन की अवस्था पर छिड़काव करना चाहिए। गेहूं में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए मेटसल्फ्यूरॉन मिथाइल बीस प्रतिशत डब्लू.पी. की बीस ग्राम मात्रा अथवा 2.4 डी सोडियम सॉल्ट 80 प्रतिशत डब्लू.पी.की 650 ग्राम से सात सौ ग्राम मात्रा को लगभग तीन सौ लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से फ्लैट फैन नोजल से प्रथम सिंचाई के बाद 25 से तीस दिन की अवस्था पर छिड़काव से बचाव किया जा सकता है। गेहूं में संकरी एवं चौड़ी पत्ती दोनों खरपतवारों के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 प्रतिशत और इसके साथ मेसल्फ्यूरॉन मिथाइल पांच प्रतिशत डब्लूजी की चालीस ग्राम (2.5 यूनिट) अथवा मेट्रीब्यूजिन सत्तर प्रतिशत डब्लूपी की 250 ग्राम से 300 ग्राम मात्रा को लगभग पांच सौ लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से फ्लैट फैन नोजल से प्रथम सिंचाई के बाद 25-30 दिन की अवस्था पर छिड़काव किया जा सकता है। वहीं राई/सरसों की फसल में मौसम के तापमान में गिरावट होने पर माहू कीट के प्रकोप होने की संभावना होती है। यदि कीट का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर पांच प्रतिशत से अधिक हो तो एजाडिरैक्टिन रसायन 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर रसायन या फिर डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी एक लीटर या इमिडाक्लोिप्रिड 17.8 प्रतिशत ईसी 250 से 300 एमएल तक रसायन को पांच सौ लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। वहीं आलू की फसल में अगेती/पछेती झुलसा रोग का प्रकोप होने पर पत्तियों पर भूरे एवं काले रंग के धब्बे बनतेक हैं और तीव्र प्रकोप होने पर संपूर्ण पौधा झुलस जाता है। रोग के प्रकोप की स्थिति में कापरऑक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लूपी 2.5 किग्राम या फिर मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी दो किग्रा के इन दोनों में से किसी एक रसायन को 600 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि चना, मटर, मसूर में फली भेदक व कटुवा कीट फलिया में छेद बनाकर दोनों को खाता रहता है और कटुआ कीट पौधों को काटता रहता है। इसके नियंत्रण के लिए क्यूनॉलफॉस 25 प्रतिशत ईसी या प्रोफेनोफॉस पचास प्रतिशत ईसी की 1.25 लीटर मात्रा को 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। इन रसायनों के निर्धारित मात्रा में घोल बनाकर छिड़काव करना रबी की फसलों के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होगा।
विज्ञापन