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आजादी के आंदोलन में सदैव याद किए जाएंगे पं. बृजनंदन
Updated Mon, 15 Jan 2018 02:05 AM IST
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आजादी के आंदोलन में सदैव याद किए जाएंगे पं. बृजनंदन
ललितपुर। आजादी के आंदोलन में पं. बृजनंदन शर्मा किसी परिचय के मुहताज नहीं हैं। उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लेते हुए लगभग साढ़े छह वर्ष जेल में बिताए। आजादी के उपरांत जनता द्वारा नगर पालिका अध्यक्ष पद पर चुने गए। इस दौरान उन्होंने शहर के विकास के लिए भी काम किया।
मुहल्ला सुभाषपुरा निवासी नारायणदास तिवारी के यहां बृजनंदन शर्मा का जन्म 1 दिसंबर 1911 को हुआ था। जब वह चौदह वर्ष की उम्र के थे, तभी गांधी जी से प्रभावित होकर पढ़ाई लिखाई छोड़कर स्वतंत्रता की लड़ाई में कूद पड़े। उन्होंने घर की सुधबुध त्यागकर सारा जीवन आजादी के आंदोलन में समर्पित कर दिया। वर्ष 1930 से लेकर 1942 के दौरान कई बार गिरफ्तार हुए। वर्ष 1930 में जब वह पहली बार जेल गए ब उनका अपराध इतना था कि उन्होंने शहर में एक सार्वजनिक पुस्तकालय खोला था। वर्ष 1932 में एक जुलूस निकालते समय अंग्रेजों ने उन्हें बैलगाड़ी से उतार लिया था और उनकी निर्मम पिटाई की थी। इसके बाद उन्हें चार माह एवं पचास रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। वर्ष 1941 में पं. शर्मा को छह महीने एवं सौ रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं देने पर डेढ़ माह का और कारावास दिया गया। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। वह ललितपुर, झांसी, लखनऊ, इलाहाबाद, आगरा आदि जेलों में बंद रहे। उन्होंने अंग्रेजों की नाक में दम कर दी थी। वह प्रभात फेरी निकालते, सभाएं करते थे, जिससे नौजवानों में देशप्रेम का उबाल भर आया करता था।
उन पर आजादी का इतना जुनून था कि जब उन्हें मां के निधन की सूचना मिली तो वह उनकी अंत्येष्ठी में शामिल नहीं हुए। उनका कहना था कि इस समय उनकी जरूरत भारत मां को है। आजादी के उपरांत उन्हें नगरवासियों ने नगर पालिका परिषद का अध्यक्ष बनवाया। इस दौरान उन्होंने शहर के विकास के लिए कई यादगार कदम उठाए। नवासी वर्ष की आयु में शरीर कमजोर होने पर वह 14 जनवरी वर्ष 2000 को हमेशा के लिए शांत हो गए। बीते वर्ष नगर पालिका परिषद अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने सुपर मार्केट का नाम पं. बृजनंदन शर्मा रखा।
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इनके संपर्क में रहे
पं. बृजनंदन शर्मा आंदोलन के दौरान लाल बहादुर शास्त्री, कृष्णदत्त पालीवाल, सेठ अचल सिंह, रामचंद्र पालीवाल के संपर्क में भी रहे और आजादी के आंदोलन को आगे बढ़ाया।
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ललितपुर। आजादी के आंदोलन में पं. बृजनंदन शर्मा किसी परिचय के मुहताज नहीं हैं। उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लेते हुए लगभग साढ़े छह वर्ष जेल में बिताए। आजादी के उपरांत जनता द्वारा नगर पालिका अध्यक्ष पद पर चुने गए। इस दौरान उन्होंने शहर के विकास के लिए भी काम किया।
मुहल्ला सुभाषपुरा निवासी नारायणदास तिवारी के यहां बृजनंदन शर्मा का जन्म 1 दिसंबर 1911 को हुआ था। जब वह चौदह वर्ष की उम्र के थे, तभी गांधी जी से प्रभावित होकर पढ़ाई लिखाई छोड़कर स्वतंत्रता की लड़ाई में कूद पड़े। उन्होंने घर की सुधबुध त्यागकर सारा जीवन आजादी के आंदोलन में समर्पित कर दिया। वर्ष 1930 से लेकर 1942 के दौरान कई बार गिरफ्तार हुए। वर्ष 1930 में जब वह पहली बार जेल गए ब उनका अपराध इतना था कि उन्होंने शहर में एक सार्वजनिक पुस्तकालय खोला था। वर्ष 1932 में एक जुलूस निकालते समय अंग्रेजों ने उन्हें बैलगाड़ी से उतार लिया था और उनकी निर्मम पिटाई की थी। इसके बाद उन्हें चार माह एवं पचास रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। वर्ष 1941 में पं. शर्मा को छह महीने एवं सौ रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं देने पर डेढ़ माह का और कारावास दिया गया। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। वह ललितपुर, झांसी, लखनऊ, इलाहाबाद, आगरा आदि जेलों में बंद रहे। उन्होंने अंग्रेजों की नाक में दम कर दी थी। वह प्रभात फेरी निकालते, सभाएं करते थे, जिससे नौजवानों में देशप्रेम का उबाल भर आया करता था।
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उन पर आजादी का इतना जुनून था कि जब उन्हें मां के निधन की सूचना मिली तो वह उनकी अंत्येष्ठी में शामिल नहीं हुए। उनका कहना था कि इस समय उनकी जरूरत भारत मां को है। आजादी के उपरांत उन्हें नगरवासियों ने नगर पालिका परिषद का अध्यक्ष बनवाया। इस दौरान उन्होंने शहर के विकास के लिए कई यादगार कदम उठाए। नवासी वर्ष की आयु में शरीर कमजोर होने पर वह 14 जनवरी वर्ष 2000 को हमेशा के लिए शांत हो गए। बीते वर्ष नगर पालिका परिषद अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने सुपर मार्केट का नाम पं. बृजनंदन शर्मा रखा।
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इनके संपर्क में रहे
पं. बृजनंदन शर्मा आंदोलन के दौरान लाल बहादुर शास्त्री, कृष्णदत्त पालीवाल, सेठ अचल सिंह, रामचंद्र पालीवाल के संपर्क में भी रहे और आजादी के आंदोलन को आगे बढ़ाया।